रविवार, 23 नवंबर 2008

कविता


कविता ने ख़ुद कविता से कहा,
क्यों नहीं रचते हो तुम मुझे,
क्यों फेंक दिया है मुझे,
मन के एक कोने में कसमसाने के लिए,
मैं तो करती हूँ इंतजार तुम्हारा,
कब आयेगी याद मेरी,
कब तुम मुझे इन अंधेरों से खींच कर,
अपनी अनकही अव्यक्त भावनाओं को,
मेरे ही द्वारा अभिव्यक्त कर,
कागज पर उतारोगे,
ओर मैं भी इठलाती इतराती,
तुम्हारे साथ मन की गहराइयों से,
उतरती चली जाऊंगी ,
अपनी नई रचना के साथ.
००००००००
पूनम श्रीवास्तव

4 टिप्‍पणियां: