रविवार, 11 जनवरी 2009

आईना


आईना हमको हकीकत दिखा गया,
पीछे न मुड के देख ये बता गया।

वो झूलती बाहें वो भागता सा मन,
याद आज हमको बचपन दिला गया।

हर चमकती चीज को सोना न समझ,
कोई उस पर पीतल का पानी चढा गया।

चेहरे के बदलते हुए भावों को तो देख,
आँखें भी धोखा देती हैं ये जता गया।

जिंदगी से भागने की कोशिश तू न कर,
कितनी है अनमोल ये कीमत बता गया।

पत्थर पर चोट करने से है शीशा ही टूटता,
आज हमारी हैसियत हमको बता गया।
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पूनम

9 टिप्‍पणियां:

  1. पूनम जी बहुत ही सही और सटीक ग़ज़ल है.....
    बहुत ही अच्छा लिखा है........


    अक्षय-मन

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  2. वो झूलती बाहें वो भागता सा मन,
    याद आज हमको बचपन दिला गया।
    .........
    bachpan ki mithi yaadon ko sakaar kar diya in panktiyon me aur kya kahu,aap bahut achha likhti hain....

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  3. हर चमकती चीज सोना ना समझ कोइ उस पर पीतल का पानी चढा गया-- बहुत ही अच्छा लिखा है बधाई व शुभ कामनायें

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  4. पत्थर पर चोट करने से है शीशा ही टूटता,
    आज हमारी हैसियत हमको बता गया।


    -वाह!! खूब कहा!! बधाई.

    म्कर संक्रांति की बहुत शुभकामनाऐं.

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  5. पूनम जी

    बहुत बहुत बधाई...
    अच्छी रचना के लिए.

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