सोमवार, 19 जनवरी 2009

सपने


बंद आँखों में हैं सपने
खुली आँखों में हैं सपने
कभी लगते हैं बेगाने
कभी लगते हैं ये अपने।

कभी वर्षों गुजर जाते
कभी पल में पूरे हो जाते
न जाने कैसे कैसे खेल
खिलाते हैं ये सपने।

कभी कलियों से खिल उठते
कभी बुझते हैं दीपक से
कभी मृग मरीचिका बन कर
हमें चिढाते हैं ये सपने।

तेरे सपने मेरे सपने
पीछे मुडे तो बीते सपने
आगे बढे तो दिखते सपने
काश कभी वो दिन भी आए
पूरे हों जब सबके सपने।
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पूनम

13 टिप्‍पणियां:

  1. Poonam ji ,
    Apne bahut sahee bat apnee kavita men likhi hai.
    kash kabhee vo din bhee aye
    poore hon jab sabke sapane.
    Hardik badhai.

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  2. तेरे सपने मेरे सपने
    पीछे मुडे तो बीते सपने
    आगे बढे तो दिखते सपने
    काश कभी वो दिन भी आए
    पूरे हों जब सबके सपने।
    poonaji
    aapki har kavita mein saadgi hoti.
    sapne mein bhi ek saadgi mahsoos hoti hai. Badhaai ho.

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  3. सपनों में भी एक सहजता है......
    बहुत सुन्दर

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  4. सपने ही तो अपने होते हैं,
    बाकी कौन अपने होते हैं.
    बंद आँखों में पा लेते हैं जहाँ की खुशी,
    खुली जो आँखें तो देखा कहाँ थी खुशी.

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  5. बिल्कुल सही बात है /सपने बंद और खुली दोनों आँखों से देखे जाते है /हम कुछ ऐसे सपने भी अज्ञानता वश देखते है जिनके पूरे होने की कोई उम्मीद नहीं होती परन्तु वे सुखद होते है तो हमें भी देखना अच्छा लगता है और जो पल में पूरे हो जाते हैं वे तो सपने होते ही नहीं है /सबके सपने कभी पूरे नहीं होते /कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ,कहीं जमी तो कहीं आसमा नहीं मिलता /वैसे बीते सपने भी नहीं देखना चाहिए और आने वाले सपने भी नहीं देखना चाहिए /आज का सपना देखना ही श्रेयष्कर है

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  6. बहुत बडिया विचार हैं कामना करती हूँ कि आपका ये सपना पूरा हो

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  7. तेरे सपने मेरे सपने
    पीछे मुडे तो बीते सपने
    आगे बढे तो दिखते सपने
    काश कभी वो दिन भी आए
    पूरे हों जब सबके सपने।
    बहुत खूबसूरत जज्ब्बत पिरोये हैं आपने
    प्रदीप मनोरिया 09425132060
    http://manoria.blogspot.com
    http://kundkundkahan.blogspot.com

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  9. ponamji
    Gustaakhi maaf,
    ye char lines aapki kavita se prerit ho kar likhin hain.

    Band aankhon se dekhiye,ya
    Khuli aankhon se dekhiye
    par,jindgi mein mere mitro
    Sundar sapne jaroor dekhiye.

    Sapne jindgi ko sajaate hain
    Ye dekhne vaale bataate hain.
    jaroor kahna chahoonga Ye baat
    Sapne jeevan bhar nachaate hain.

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  10. कभी मृग मरीचिका बन कर
    हमें चिढाते हैं ये सपने।

    sapno ka bahut sundar chitran .
    khoobsurat kavita.

    badhai

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  11. कुछ सपने अधूरे रह जाएँ तभी इनका अस्तित्व है. और उन अधूरे सपनो में हम चाह की तूलिका से मनचाहे रंग भरते हैं, उन्हें जीते हैं अपने ढंग से.
    सुंदर रचना.

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  12. सपनों को सच की करती कविता।

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  13. tere sapne.........mere sapne...ham sabke sapne....aise sapne..vaise sapne.....naa jaane kaise-kaise sapne.......sapne-sapne....sapne-sapne......jaan hi le-le naa kahin ye adhure sapne...!!

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