गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

जीत


जिंदगी का हर लुत्फ़ तू
उठाये जा उठाये जा
कब हो जाए ये बेवफा
हर लम्हा तू जिए जा,तू जिए जा।

जिंदगी चाहत भी है
मोहलत भी है जिंदगी
जिंदगी खुदा की इनायत
इबादत तू किए जा,तू किए जा।

जिंदगी के दो पहलू
कभी खुशी कभी गम कहीं
वास्ता दोनों से तेरा
हंस के तू निभाए जा ,तू निभाए जा।

जिंदगी की बिसात पर
मौत की चादर तनी
जीत जायेगी जिंदगानी
मौत को तू हराए जा,तू हराए जा.
************
पूनम


10 टिप्‍पणियां:

  1. जिंदगी के दो पहलू
    कभी खुशी कभी गम कहीं
    वास्ता दोनों से तेरा
    हंस के तू निभाए जा ,तू निभाए जा।

    .........बहुत सुंदर रचना............यह पंक्तियाँ मुझे खासतौर से पसंद आयीं।

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  2. जिंदगी चाहत भी है
    मोहलत भी है जिंदगी
    जिंदगी खुदा की इनायत
    इबादत तू किए जा,तू किए जा।
    .....waah

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  3. जिंदगी के दो पहलू
    कभी खुशी कभी गम कहीं
    वास्ता दोनों से तेरा
    हंस के तू निभाए जा ,तू निभाए जा।


    पूनम जी ,बहुत अच्छे भाव हैं इस काविता में.
    जीवन है ही छोटा -और ख़ुशी और ग़म का आना जाना तो लगा ही रहता है..बस चलते जाना है और हर हार को जीत में बदलते जाना है.

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  4. soch bahut sahi hai,ant ki panktiyaan zyada shashakt hai shuruvaat ke mukaable

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  5. Aapka blog bahut pasand aaya. Aapki kavitayen pasand aayeen sath men luknow ki yaden taza kar gayeen. Kaviton ke satth chitra bahut pasand aaye.

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  6. बहुत ही शानदार कविता!

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  7. जिंदगी के दो पहलू
    कभी खुशी कभी गम कहीं
    वास्ता दोनों से तेरा
    हंस के तू निभाए जा ,तू निभाए जा।

    its a very simple and sensitive interpretation of life cycle.. simply awesome..

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