शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

गीत---अजनबी शहर में


इस शहर में हम अजनबी हैं
जाने पहचाने से चेहरे हैं फ़िर भी
हर पल में लगता ये और ही कोई है।
इस शहर में-----------------।

बेमतलब यहां पे तो कुछ भी नहीं है
ऐसा हो शायद ही इन्सान कोई
यहां जो मतलबी नहीं है
इस शहर में-------------------।

है खून का रिश्ता जिससे भी जिसका
वक्त पड़ने पे देखा
बदल रक्त की रंगत ही गई है।
इस शहर में ----------------।

दुश्मनी होती नहीं किससे किसीकी
खुरच दे उसे जिल्द पुरानी समझ के
फ़िर चढ़ा दे कवर दोस्ती की नई सी।
इस शहर में ---------------------।

जाना पहचाना या हो वो बेगाना
पहले हम इन्सां हैं
फ़िर हम कोई हैं
इस शहर में -------------------।

कभी झांक कर देखो औरों के दिल में
उनमें जो है वो हमारे में भी
क्या लगता है फ़र्क थोड़ा भी कोई है
इस शहर में ---------------।

रंजो सितम से ये दुनिया भरी है
है जीना इसी में और मरना यहीं है
आपस में फ़िर क्यूं यूं ही ठनी है
इस शहर में ---------------।

शहर में ही जब अपने हम अजनबी हैं
तो दुनिया तो फ़िर भी बहुत ही बड़ी है
फ़िर भी हम क्यों अजनबी हैं।
इस शहर में ---------------।
00000000
पूनम



22 टिप्‍पणियां:

  1. संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…
    लेखनी प्रभावित करती है.

    संजय तिवारी ’संजू’ जी।
    आपको सभी की लेखनी प्रभावित करती है.

    मगर मुझे पूनम जी का गीत बहुत अच्छा लगा।
    बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  2. दुश्मनी होती नहीं किससे किसीकी
    खुरच दे उसे जिल्द पुरानी समझ के
    फ़िर चढ़ा दे कवर दोस्ती की नई सी।


    एकदम सही कहा आपने

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  3. आभार पूनम जी के इस बेहतरीन गीत को पढ़वाने के लिए.

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  4. पूनम जी को आभार पूनम जी को ही पढ़वाने के लिए. :)

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  5. रंजो सितम से ये दुनिया भरी है
    है जीना इसी में और मरना यहीं है
    आपस में फ़िर क्यूं यूं ही ठनी है
    इस शहर में ---------------
    सुन्दर गीत

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  6. SUNDAR GEET HAI .... INSAAN SAB KE HOTE HUVE BHI AJNABI HO JAATA HAI ..... SUNDAR RACHNA........

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  7. क्या बात है बहुत खुब। गजब की अभिव्यक्ति दिखी आपकी इस रचना में। बधाई

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  8. स्वार्थपरता पर खूबसूरती से लिखा है
    ,,बधाई

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  9. है खून का रिश्ता जिससे भी जिसका
    वक्त पड़ने पे देखा
    बदल रक्त की रंगत ही गई है।
    इस शहर में......।
    बेहतरीन । आभार ।

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  10. दिल में उतर गयी आपकी सुन्दर रचना

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  11. Shayad phir gaon ka rukh karne ki jarurat hai,wapas lautne ki jarurat hai.Shubkamnayen.

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  12. तहे दिल तक पहुचे ऐसा लिखती है आप |

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  14. बहुत सुन्दर रचना....बेहतरीन गीत को पढ़वाने के लिए बहुत बहुत बधाई....

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  15. मतलबपरस्त दुनिया को आईना दिखाती एक अच्छी रचना.
    सोचती हूँ पूनम जी,यही हाल रहा तो अगली पीढी कैसी दुनिया देखेगी..क्या शब्दकोश में सहयोग,प्रेम ,रिश्तों के अर्थ बदल जायेंगे?

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  16. दुश्मनी होती नहीं किससे किसीकी
    खुरच दे उसे जिल्द पुरानी समझ के
    फ़िर चढ़ा दे कवर दोस्ती की नई सी।

    बहुत ही अच्छी रचना...बधाई स्वीकार करें
    नीरज

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  17. इस लाजवाब और बेहतरीन रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ !

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  18. बहुत अच्छी रचना बन पड़ी है पूनम जी.

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