गुरुवार, 12 नवंबर 2009

गजल-- आख़िरी सलाम


खूने जिगर से लिख रहा हूं आखिरी सलाम
इल्तजा बस जरा सी कबूल इसको कर लेना।

इन्तजार करते करते हो गई इंतहा इंतजार की
दिले खयाल तब आया नहीं नसीब में तेरा दीदार होना।

जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।

तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।

तेरी नफ़रत ही बनती गयी मेरी मुहब्बत का सबब
हो सके तो जरूर इसे अपनी कड़वी यादों बसा लेना।

खत्म हुये शिकवे गिले अब अलविदा तुझे कहता हूं
जब उठेगा जनाजा मेरा बस इक नजर डाल लेना।

चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना।
0000
पूनम

22 टिप्‍पणियां:

  1. चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
    जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना।
    आप की इस गजल का हर शेर लाजवाव है.
    धन्यवाद

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  2. जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
    मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।

    अच्छा है!!

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  3. खत्म हुये शिकवे गिले अब अलविदा तुझे कहता हूं
    जब उठेगा जनाजा मेरा बस इक नजर डाल लेना।
    वेदना, करुणा और दुःखानुभूति का अच्छा चित्रऩ।

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  4. तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
    मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।
    poonamji ...
    wah
    ..bahut hi badiya sher hai sare ...bahut acha likha ye shaer ..badhai

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  5. तेरी नफ़रत ही बनती गयी मेरी मुहब्बत का सबब
    हो सके तो जरूर इसे अपनी कड़वी यादों बसा लेना।
    ........... बहुत बढिया

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  6. खत्म हुये शिकवे गिले अब अलविदा तुझे कहता हूं
    जब उठेगा जनाजा मेरा बस इक नजर डाल लेना।

    bhut sunder bhav aur ek pyaree rachana.

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  7. जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
    मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।
    बहुत अच्छी लगी आपकी रचना शुभकामनायें

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  8. जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
    मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।
    तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
    मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।
    वाह झरोखा जी बहुत सुंदर ग़ज़ल लिखा है आपने! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है! एक से बढ़कर एक शेर हैं सारे!

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  9. चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
    जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना..

    Bahoot lajawaab gazal ... rard bhare sher.... man ki udaasi ki jhalak milti hai sheron mein ... achha likha hai ...

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  10. जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
    मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना।
    waah! Poonam ji bahut hi achche ghazal likhi hai..
    aap ki ab tak ki sab se achchhe gazal lagi mujhe yah..
    sabhi sher bahut khoob!

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  11. तेरी नफ़रत ही बनती गयी मेरी मुहब्बत का सबब
    हो सके तो जरूर इसे अपनी कड़वी यादों बसा लेना।
    bahut dard bhari man ko chhooti hui rachna ,umda

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  12. चलो मैं हो गया रुखसत अब तेरे इस जहां से
    जाकर कहूंगा ऐ खुदा मेरी मुहब्बत को आबाद रखना।
    Pyar samarpit bhav se kiya ho to isi tatrah ki aawaj dil mein gungaymaan hoti hai .......

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  13. तेरे दो अश्क ही मेरी मुहब्बत का ईनाम होंगे
    मैं न सही मेरी कब्र के ही संग दो पल बिता लेना।

    वाह..... मोहब्बत के रंग में डूबी लाजवाब नज़्म पूनम जी ....हर शेर जिगर के आर-पार होता हुआ ....बहूत खूब....!!

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  14. बहुत अच्छी लगी आपकी रचना शुभकामनायें

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  15. इन्तजार की इन्तहा होने पर खून (जिगर का ) से आखिरी सलाम लिखना और मजार पर आकर आंसू बहाने की प्रार्थना जफ़र साह्ब ने दूसरी तरह से लिखा था "पये फ़ातिहा कोई आये क्यों , कोई चार फूल चडाये क्यों, कोई आके शमअ जलाये क्यों...। जब जनाजा उठे तब एक नजर डाल लेना मगर होता क्या है "उनकी गली से मेरा जनाजा निकला , वो न निकले जिनकी खातिर जनाजा निकला"अन्तिम शेर बहुत उत्तम खुदा से कहूंगा .....।बाल दिवस की रचना फ़ुलबगिया ब्लाग पर भी पढी

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  16. जीते जी ना सही जब हो जाऊं सुपुर्दे खाक मैं
    मजार पर आके मेरी अश्क दो बहा लेना...
    i am wordless........one of the best rachna in blog jagat...

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