गुरुवार, 14 जनवरी 2010

बागबां


चमन आज भी खुशबुओं से गुलजार होता है

ये कौन कहता है की चमन वीरान होता है

जहां हर पर्व पर आज भी लगते हैं मेले

जो लोगों की भीड से आबाद होता है

जहां गंगा स्नान सूर्य प्रनाम की प्रथा आज भी है बनी

जो जय गंगे और हर हर महादेव की नाद से गूंज उठ्ता है

तीरथ धामों पर जहां लगते भक्तों के आज भी रेले

हर शख्स जहां सबसे पहले करने को दर्शन तैयार रहता है

जहां हर धरमों के लोग संग में चलते हैं हरदम

जब मिलते आपस में गले तो खुशियों में चार चांद लगता है

वीरान से जंगलों में बहुत कुछ है आज भी बाकी

जहां कोयलों की कूक पछियों का कलरव होता है

कांटों के संग फ़ूलों की जहां है बेमिसाल दोस्ती

जो चंदन सी खुशबू आज भी अपनी बिखराता है

मिलजुल कर जो सुखदुख आपस में बांट लें हम

फ़िर देखो खिला खिला कैसा हर बागबां होता है।

20 टिप्‍पणियां:

  1. मिलजुल कर जो सुखदुख आपस में बांट लें हम फ़िर देखो खिला खिला कैसा हर बागबां होता है।
    अच्छी सोच और विचार. शुभकामनाएं.

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  2. सकारात्मक सोच की सुंदर अभिव्यक्ति , अच्छी रचना

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  3. अच्छी सोच और विचार. शुभकामनाएं

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  4. जहां हर धरमों के लोग संग में चलते हैं हरदम जब मिलते आपस में गले तो खुशियों में चार चांद लगता है

    बहुत सुन्दर रचना
    धन्यवाद

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  5. बढ़िया कहा आपने ..सुख दुःख में सब साथ हो तो बात ही क्या है ..बढ़िया अभिव्यक्ति

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  6. सकारात्मक सोच की सुंदर अभिव्यक्ति. अभिनन्दन.

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  7. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति......बस यूँ ही चमन खिलता रहे....

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  8. आमीन .......... आपको आज के दिन की ......... नमना स्नान की ........ मकर संक्रांति की बहुत बहुत बधाई .......

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  9. पूनम जी अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

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  10. मकर संक्रांति की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ!
    बहुत ही बढियां पोस्ट ! बहुत सुन्दर रचना !

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  11. poonam jee aapke blog par aakar bahut hee accha
    lagata hai.kitnee khoobsooratee se aapne hamaree sanskrutee .prakruti sabhee ka ullekh sakrmak roop se kar diya .bahut acchee lagee aapkee ye rachana.
    happy Makar Sankranti.

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  12. कांटों के संग फ़ूलों की जहां है बेमिसाल दोस्ती
    जो चंदन सी खुशबू आज भी अपनी बिखराता है मिलजुल कर जो सुखदुख आपस में बांट लें हम
    फ़िर देखो खिला खिला कैसा हर बागबां होता है।

    पूनम जी।
    आपकी रचना सुन्दर है!

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  13. मिलजुल कर जो सुखदुख आपस में बांट लें हम फ़िर देखो खिला खिला कैसा हर बागबां बहुत ही सुन्दर रचना है धन्यवाद

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  14. भावप्रधान रचना तो है ही शब्दों का चयन भी मनोरम है पंछियों का कलरव,फूल और कांटों की दोस्ती,चमन का खुशबुओं से गुल्जार होना और हर धर्म के लोगों का साथ साथ चलना ।आपस मे सुख दुख बांटने की आकांक्षा -उत्तम रचना

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  15. आपको और आपके परिवार को वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनायें!
    बहुत सुन्दर लिखा है आपने!

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  16. माँ भारती पर गर्व कराती इस सुंदर नज्म के लिए आभार.

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