मंगलवार, 16 मार्च 2010

यकीन



तुम्हारे यकीं का इंतजार करते करते

अब थक चुकी हूं मैं

फ़िर भी तुम्हें आया नहीं यकीं

मुझ पर अब तक

उससे तुम नहीं

मेरा आत्म सम्मान टूटता है

और मैं तुम्हें यकीन दिला के

रहूंगी तब तलक

जब तलक सांस में सांस रहेगी।

अन्तिम सांस अंतिम क्षण तक

तुम्हारे इंतजार में जाने

मैंने कितने अफ़साने

अपने ऊपर लिख डाले

यहां तक कि अब

लिखते लिखते

जज्बात रूपी लफ़्जों की

स्याही भी खत्म होने को

चली है और अब तक

कागजों का इतना बड़ा पुलिंदा

बन चुका है जो कि

खुद ही घुट घुट कर

जल चुकी हुई आधी शमा को

पूरी तरह जलने में

तुम्हारा साथ देगी

और तब तुम्हें लगे

कि हां मैनें तुम्हारे

यकीन को हां में बदलने

में शायद

काफ़ी देर कर दी

पर फ़िर भी मुझे खुशी होगी

कि चलो कम से कम

तब तो तुम्हें यकीन आया

और ये सब किसी

और के लिये भी एक

सबक होगा।

0000

पूनम

39 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया...सहज शब्दों में छुपे गहरे भाव...
    सुन्दर अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  2. ये सब किसी और के लिये भी एक सबक होगा। ..गहरे भाव हैं इस में सुन्दर अभिव्यक्ति शुक्रिया

    जवाब देंहटाएं
  3. इनती चाहत, समर्पण और
    "ये सब किसी
    और के लिये भी एक
    सबक होगा।"
    सब्र - अपने लिए फिर भी कुछ नहीं - आभार

    जवाब देंहटाएं
  4. ये यकीं दिलाना भी कितना कठिन काम है ना....एक दर्द जो बयां करके भी बयां नहीं किया....बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह....बहुत गहरे भाव लिये आप की कविता... इंतजार ओर इंतजार

    जवाब देंहटाएं
  6. "सहज भावाभिव्यक्ति......."
    प्रणव सक्सैना
    amitraghat.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह....बहुत गहरे भाव लिये आप की कविता... इंतजार ओर इंतजार

    जवाब देंहटाएं
  8. sach hi hai....yakin dilana itna mushkil kyun hota hai..aksar..?

    जवाब देंहटाएं
  9. देर से आये पर दुरूस्त आये
    सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  10. विरह क्या होता है, प्रतीक्षा की घुटन और निराशा की पराकाष्ठा सभी भावों को आपने इस कविता में सुंदरता से संजोया है.वाह...

    जवाब देंहटाएं
  11. यहां अभिव्यक्ति की स्पषटता प्रमुख है।

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत गहरी रचना...आनन्द आया.

    जवाब देंहटाएं
  13. सबसे पहले आभार,
    रचना बहुत अच्छी लगी.सरल भाषा में भावनाओं कि सुन्दर अभिव्यक्ति. शुभकामनायें.

    जवाब देंहटाएं
  14. अच्छा है... शिकायत करने का, उलाहना देने का और प्रेम प्रकट करने का तरीका बढ़िया है...
    लेकिन जज्बात की स्याही कभी ख़त्म ना हो और हमें यह सब अलग-अलग रूपों में पढने को मिलता रहे...

    जवाब देंहटाएं
  15. एक बेहतरीन अभिव्यक्ति...सुंदर भाव से परिपूर्ण सुंदर कविता....धन्यवाद पूनम जी

    जवाब देंहटाएं
  16. बहुत खूब कहा है य़कीन दिलाना भी यकीनन बड़ा मुश्किल सा काम होता है

    जवाब देंहटाएं
  17. जोरदार जज्बा और जज्बात -बनायें रखें इसे !

    जवाब देंहटाएं
  18. हम जब किसी की भावनात्मक अभिव्यक्ति से रू ब रू होते हैं, तो अपने जूतों से बाहर नहीं आ पाते, और उस एहसास को या तो दूर से ही छूने की कोशिश करते हैं, या अपने पूर्वग्रह या खुद के नज़रिये से उसे तौलते हैं.

    यहां एक नारी की संवेदनायें , समर्पण , आशंकायें,विरह की घुटन, प्रतिक्षा की पीडा सभी इस एक कविता में परिलक्षित हो गयी.

    एक पुरुष होने के कारण उतने अंतरंग की गहराई में नहीं जा पाया, मगर जब भी एक नारी के नज़रिये से जानने का प्रयास भर किया तो यह सब को अंशिक रूप से समझ पाया. वह इसलिये कि शायद हर पुरुष में कहीं एक नारी भी होती होगी.(& Vice versa)

    जवाब देंहटाएं
  19. क्या बात है यकीं का इन्तजार करते करते थक जाने पर भी तुम्हे यकीं न आया ,और यकीं दिलाती रहूँगी |यकीं शब्द की पुनराब्रत्ति (अलंकार )जज्वात रूपी शब्दों की स्याही (रूपक )
    से सुसज्जित रचना ,बल्कि भावप्रधान रचना बहुत अच्छी लगी

    जवाब देंहटाएं
  20. सुन्दर-सरल, भावपूर्ण रचना...
    किसी को यकीं दिलाना...किसी भी कीमत पर..
    अपने जीवन के सारे शब्दों को ख़त्म करके भी..
    पीड़ा,बेबसी अनेक भाव हैं कविता में....

    जवाब देंहटाएं
  21. बहुत बढ़िया रचना प्रस्तुति ...

    जवाब देंहटाएं
  22. बहुत अच्छी रचना हैं. बधाई
    http://www.takeoneready.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  23. eki aakriti ko uchhalte huye jo rekhankan hai oh kavita ka nichor hai...badhiya

    जवाब देंहटाएं
  24. 'लफ़्जों की स्याही भी खत्म होने को चली है'

    कितने दर्द भरे अहसास हैं...यह कविता गहन भाव भरी है.
    मन को छू गयी.
    दिलिप जी और ब्रिज Sir ने इतने अच्छे से व्याख्या कर दी hai कविता और अधिक शस्क्त हो गयी.

    जवाब देंहटाएं
  25. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ......भाव पूर्ण रचना

    जवाब देंहटाएं
  26. yakeen.....
    ho jata hai ya krna pdta hai....?
    hm aaj tak yahi nahi samajh paaye!

    lekin aapki rachna bahoot achchhi lagi !

    kunwar ji,

    जवाब देंहटाएं
  27. यकीं दिलाना कठिन तब और है जब सामने वाले का यकीं न हो ।

    जवाब देंहटाएं
  28. rachna bahut marmi hai..

    lekin kya poonam ji yakin jb kisi ko na ho to use yakin jabardasti dilaya ja sakta hai ? shayed nahi...use dheel do...sochne do...waqt aane par khud-b-khud yakin aa jayega...warna jyada yakin dilane ka effect ulta b padta hai.

    जवाब देंहटाएं
  29. Ati sunder,
    sampoorn samerpan ki abhivyakti hai apki rachana
    Badhai

    जवाब देंहटाएं
  30. बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं..और इसका हम सभी को यकीन है..

    जवाब देंहटाएं
  31. यकीन दिलाना बहुत ही कठिन है .... दिल के जज्बातों को अच्छे से पिरोया है ...

    जवाब देंहटाएं
  32. चर्चा मंच पर आपकी प्रस्तुति देख बहुत अच्छा लगा.

    आखिर आपके कोशिश ने यकीन करा ही दिया.

    जवाब देंहटाएं