मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

साकी


बहुत कुछ सुनने सुनाने को बाकी

मगर पहले थोड़ी पिला दे तू साकी।

सुना है इसमें बहुत है दम

ताकत है इसमें भुलाने को गम

असर मुझपे भी हो जाये ताकि-----।

सुना है इसको जिसने पिया है

वो हर बार मर –मर के ही तो जिया है।

निभाता है साथ हर गम में बाकी----।

माना गमे दर्द में काम करता दवा का

मगर बन जाता इक दिन नशा जिन्दगी का

जिगर तो जलाता साथ जां भी जो बाकी---।

नशा तो नशा है किसी किस्म का भी

जहर बन जाता इक दिन दवा भी

फ़िर भी नशा लोग करते हैं बाकी----।

सुना है जहर को मारता जहर है

सब करता इंसान जो चाहे अगर वो

फ़िर इसमें कसर क्यूं अब भी है बाकी---।

रहने दे तू मुझको पिलाने को साकी

रहने दो मुझको पिलाने को साकी-----।

0000

पूनम

39 टिप्‍पणियां:

  1. एक बढ़िया भाव..सुंदर रचना...बधाई पूनम जी

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  2. जहर हमेशा ढाती है कहर
    सुन्दर भाव की रचना

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  3. बहुत खूब आज तो साकी का पैमाना भी छलक जायेगा

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  4. अब तो हम ने पीनी छोड दी, लेकिन सच कहूं आप की कविता से पुरा नशा हो गया, बहुत सुंदर कविता लगी.
    धन्यवाद

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  5. पूनम जी,
    मैँ समझ सकता हूँ कि आप पीती नहीँ हैँ ।तो फिर दूसरोँ को पीने के लिए मजबूर क्योँ कर रही हैँ?
    इस सम्बन्ध मेँ भाटिया जी की बात मेँ भी दम है।खैर!
    आपकी कविता अच्छी है जिसने इतना सोचने को लाचार किया।

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  6. "नशा तो नशा है किसी किस्म का भी" ये सभी समझे तब न !

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  7. पता नहीं क्यों ये नशा और पीनेवालों की शायरी मुझे बड़ी भाती है...वैसे मैं पीता नहीं लेकीन फिर भी ये शायरियां अच्छी लगती हैं :P ...और हाँ , जहर को जहर ही मरता है..
    हम भी कुछ सोचने लगे आपके इस कविता पे..बेहद ही अच्छी, सोचने को मजबूर कर देने वाली कविता

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  8. सुना है इसको जिसने पिया है
    वो हर बार मर –मर के ही तो जिया है।
    निभाता है साथ हर गम में बाकी----

    बहुत खूबसूरती से कह दी है ये बात....बहुत खूब

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  9. सुन्दर भाव लिये है ये कविता....:

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  10. bahut sunder rachna punam ji...
    "बहुत कुछ सुनने सुनाने को बाकी
    मगर पहले थोड़ी पिला दे तू साकी। "
    pehli hi panktiyon me bahut dard hai...

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  11. "सुना है जहर को मारता जहर है
    सब करता इंसान जो चाहे अगर वो
    फ़िर इसमें
    कसर क्यूं अब भी है बाकी"

    ji bahut khoob!

    kunwar ji,

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  12. ऊपर पढ़ा तो मजा आ गया
    थोड़ा हमें भी नशा छा गया।

    नीचे पढ़ा तो जुलुम हो गया
    पूरा नशा ही हिरण हो गया।

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  13. बहुत लाजवाब,हर इक बात बहुत गहरी साथ ही नशा भी गहरा चढ़ा दिया आपने तो.इतनी बेहतरीन प्रस्तुती के लिए आभार

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  14. एक नशीली रचना... इतने ऐब बता दिए आपने फिर भी इस रचना के नशे से बाहर आने को जी नहीं चाह्ता...अब तो ये आलम है कि होश आया भी तो कह दूँगा मुझे होश नहीं...

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  15. bahut hi achhi rachna...
    hamesha ki tarah pasand aayi..
    yun hi likhte rahein...\
    regards..
    http://i555.blogspot.com/

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  16. gum ke bahane peena...............

    ye kaisaa jeena....................

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  17. Aise hi tukbandi mila raha hoon, nosh farmaayen!
    May de mujhko ke suroor to ho!
    Nasha na ho paaye saaki!
    Bas katra bhar madhoshi ho!
    Par hosh rahe mera baaki!!!

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  18. वाह क्या बात कही......
    एकदम नशे में सराबोर..

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  19. क्या लिख दिया पूनम ! मन प्रसन्न हो गया ।
    ज्यादा मथने से
    तीता हो जाता नीबू ।
    अमृत भी विष
    हो जाता है पीते पीते ।

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  20. तू क्या जाने पीना पिलाना कैसे पिलायी जाती है
    ढक्कन खुलता है बाद में बोतल पहले हिलायी जातीहै
    बोदा नशा शराब का उतर जाय प्रभात
    नाम खुमारी नानका चङी रहे दिन रात

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  21. तू क्या जाने पीना पिलाना कैसे पिलायी जाती है
    ढक्कन खुलता है बाद में बोतल पहले हिलायी जातीहै
    बोदा नशा शराब का उतर जाय प्रभात
    नाम खुमारी नानका चङी रहे दिन रात

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  22. बहुत खूब पूनम जी,
    आज कुछ अलग से मूड की ग़ज़ल लगी.

    -अच्छी लिखी है.

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  23. क्या बात है.. आगाज़ कुछ, अन्ज़ाम कुछ .. बहुत खूब..

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  24. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने उम्दा रचना प्रस्तुत किया है! बधाई!

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  25. आपकी कविता में पूरी बोतल का नशा है ... बहुत ही लाजवाब ... बहुत दीनो बाद मदहोशी की रचना पढ़ने को मिली ... मज़ा आ गया ...

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  26. होशो-हवास अपने सलामत रहे 'जिगर',
    मंजिल से पूछ लूंगा कहाँ जा रहा हूँ मैं...

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