बुधवार, 21 जुलाई 2010

सूरज और रजनी


पेड़ों की शाखाओं

के झरोखों से

जब छिटकती हैं

सूरज की किरणें

हरित पत्तियों पर

तो लगता है

प्रकृति के प्रांगण में

हर तरफ़

चांदी की थाल

पत्तों पर बिखर गयी है।

भोर में उगता सूरज

धीरे धीरे

अपने पदार्पण की सूचना

देता है

तब उसकी गुनगुनाती धूप

मन को ऊर्जा

और एक अनोखे

अहसास से

मानो भर जाती है।

दिन भर अपनी

पूरी सामर्थ्य दिखाकर

जब पत्तियों से

छनती हुयी चमक

धीरे धीरे कम

होती जाती है

तब साथ निभाने

प्रकृति का

रजनी मिलाती है हाथ

सूरज से

उसके पदागमन के साथ ही

प्रकृति के लिये

उसके प्रांगण में

उतर आयी रजनी

अपने पूरे मनोयोग के साथ

प्रकृति से

करने लगती है अठखेलियां ।

000

पूनम

24 टिप्‍पणियां:

  1. भोर औ शाम के साथ 'प्रकृति'। बहुत सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  2. प्रकृति से सुन्दर साक्षात्कार
    सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर कबिता .
    एक अच्छे मन से लिखी गयी है
    बहुत-बहुत धन्यवाद.
    भावात्मक गीत.

    जवाब देंहटाएं
  4. कल्पना की प्रकृति या प्रकृति की कल्पना। बहुत सुन्दर पूनमजी।

    जवाब देंहटाएं
  5. शब्दों का चयन अति सुन्दर ..........
    अच्छा लिखा है आपने.............

    जवाब देंहटाएं
  6. पूनम जी, आपकी कविता पढ़कर बहुत अच्‍छा लगा । इतना अच्‍छा कि मैं उसे कुछ इस तरह पढ़ गया-

    पेड़ों की शाखाओं के
    झरोखों से जब उतरती हैं
    सूरज की किरणें हरित पत्तियों पर
    तो लगता है मानों प्रकृति के प्रांगण में
    हर तरफ़ सुनहरी थाल की चमक पत्तों पर बिखर गयी है

    भोर में उठता सूरज
    धीरे धीरे अपने पदार्पण की सूचना देता है
    तो उसकी गुनगुनाती धूप मन को ऊर्जा और
    एक अनोखे अहसास से भर जाती है

    दिन भर अपनी पूरी सामर्थ्य दिखाकर
    जब पत्तियों से छनती हुयी चमक
    धीरे धीरे कम होती जाती है
    तब साथ निभाने प्रकृति का
    रजनी हाथ बढ़ाती है
    उसके प्रांगण में उतर आती है
    अपने पूरे मनोयोग के साथ
    प्रकृति से करने अठखेलियां ।
    (इस गुस्‍ताखी के लिए क्षमा याचना सहित)

    जवाब देंहटाएं
  7. प्रकृति की कल्पना की सुन्दर रचना... रजनी ने हाथ मिलाया सूरज से...waah

    जवाब देंहटाएं
  8. Sundar manohari bhavon se saji aapki kavita man ko behad bhali lagi.. aur han Rajesh ji ka andaaj bhi behad achha laga..
    Haardik shubhkamnayne

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी लगी ये कविता !!और हाँ सूरज और रजनी का ये कुछ पल का मिलना भी देखिये न कितना गज़ब ढाता है

    जवाब देंहटाएं
  10. शब्दों का चयन अति सुन्दर .......सुन्दर रचना...

    जवाब देंहटाएं
  11. वाह ! शब्दों के सहारे कितना सुन्दर चित्रांकन ..

    जवाब देंहटाएं
  12. jahan bhor ke aagman ka sundar chitran.
    wahin sandhya kaal se ratri tak ka bhi..ye hi to hai samay chkr!

    dukh aur sukh ka ek dusre se nata jaise rajani ka suraj se hai...

    bahut hi sundar kavita likhi hai Poonam ji.

    जवाब देंहटाएं
  13. प्रकृति के प्रांगण में

    हर तरफ़

    चांदी की थाल

    पत्तों पर बिखर गयी है......

    ....हम तो आपकी रचनाओं के मुरीद हो गए हैं।
    .

    जवाब देंहटाएं
  14. शब्दों का चयन अति सुन्दर .......सुन्दर रचना...

    जवाब देंहटाएं
  15. उसके पदागमन के साथ ही

    प्रकृति के लिये

    उसके प्रांगण में

    उतर आयी रजनी

    अपने पूरे मनोयोग के साथ

    प्रकृति से
    करने लगती है अठखेलियां ।

    मनोरम..जैसे मीठी सी सुबह हो गयी हो दुबारा से..बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  16. प्रकृति का सुन्दर बिम्ब प्रस्तुत किया है । शब्द- चयन बहुत सधा हुआ एवं अर्थानुभूति को गहन बनाने में सक्षम है ।

    जवाब देंहटाएं