गुरुवार, 25 मार्च 2010

दर्दे --जिन्दगी


दवा ही बन ग़यी है जिन्दगी जिनकी,

दुआ कीजिये वो जहर न बने।

लहू जो दौड़ रहा जिस्म में,

दुआ कीजिये बेअसर न बने।

पिये जा रहे हैं गमों के चिलम,

दुआ कीजिये वो कहर न बन॥

नहीं देख सकता जो औरों का चैन,

दुआ कीजिये वो नज़र न बने।

समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,

दुआ कीजिये वो जिगर न बने।

आबाद है जहां नेक इन्सानों से ही,

दुआ कीजिये वो वीराना शहर न बने।

000

पूनम

32 टिप्‍पणियां:

  1. wah punam ji maja aa gaya apki post padh kar...acchhi rachna. aur rhythem b acchha ban pada he.

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  2. बहुत ही सुंदर रचना जी
    धन्यवाद

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  3. आनन्द आया..बेहतरीन!!

    -

    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

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  4. बहुत खूब ......लाजवाब प्रस्तुति

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  5. उम्मीदें तो एक-एक कर के

    सारी ढही,

    चलो दुआ एक और सही,

    जिसे हम बताना चाहते है

    वो इतना बेखबर तो नहीं,

    चलो दुआ एक और सही,

    कुंवर जी,

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  6. समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
    दुआ कीजिये वो जिगर न बने।

    बहुत खूब....बिलकुल दुआ है की गम ज़माने के सब समेट लें...

    खूबसूरत भावों से सजी अच्छी ग़ज़ल

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  7. आबाद है जहां नेक इन्सानों से ही,
    दुआ कीजिये वो वीराना शहर न बने।

    ye panktiya bahut pasand aaee .........

    aasheesh aur duaa douno sath hai par .........

    galat dava hee jahar ban saktee hai poonam jee..........aur adhikta bhee...........:)

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. दुआ है पूनम जी .....!!

    आप यूँ ही नेक ख्यालात से जुडी रहें ......!!

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  10. समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
    दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
    आबाद है जहां नेक इन्सानों से ही,
    दुआ कीजिये वो वीराना शहर न बने।

    वाह पूनम जी बहुत नेक ख्याल हैं.हम भी यही दुआ करेंगे. एक बेहतरीन प्रस्तुती पर बधाई स्वीकारें

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  11. Shabdo ki kami hai. Dard jinki jindgi ho, wo hamesh khush rahtey hain. Kyonki Bhagwaan ne dard bardasht karney ki taakat sbko nahi di. Shubh Kaamnyeyn.

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  12. नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
    दुआ कीजिये वो नज़र न बने।
    क्या बात है पूनम जी, कमाल का लिखा है...बहुत ही बढ़िया

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  13. बढ़िया लिखा आपने........."
    amitraghat.blogspot.com

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  14. जरूर, जरूर। यह तो बहुत सात्विक दुआयें हैं। कौन न करना चाहेगा।

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  15. गमों की चिलम मत पीजिए। चिलम पीना सेहत के लिए हानिकारक है। हाँ चिलम भर सकती हैं किसी की भी। बढिया लिखा है आपने।

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  16. "नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
    दुआ कीजिये वो नज़र न बने।"
    सच्ची और सीधी बात - सुखी रहने का सार.

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  17. समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,

    दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
    wah poonam ji ...bahut badiya ....acha laga aapko padhna ..bahut khoob

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  18. नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
    दुआ कीजिये वो नज़र न बने।
    समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
    दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
    बहतु सुन्दर और सठिक पंक्तियाँ! ज़िन्दगी की सच्चाई को आपने बखूबी प्रस्तुत किया है ! उम्दा रचना!

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  19. दबा दबा ही रहे वो ज़हर न बने ,और जो दूसरों को चैन से बसर करते न देख सके वह नजर ही न बने बहुत उत्तम चिंतन |जहां नेक इंसान रहते हों वहां वीरानी न आये |अभी ऐसा लगता है जैसे यह रचना व्यक्तिगत हो |इस रचना को सार्वजनिक बनाने के लिए दो लाइनों में मामूली सा संशोधन करना होगा एक तो पहली लाइन में जिन्दगी मेरी की जगह जिन्दगी जिनकी और पांचवी लाइन में पिए जा रही हूँ की जगह पिए जारहे हैं जो | बहुजन हिताय बहु जन सुखाय रचना |बधाई |

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  20. मेरे लिखने का उद्देश्य य़ह नही था कि सुधार किया जाये बल्कि निवेदन यह था कि यह रचना , एक बचन मे है कुछ शब्द बदल देने पर बहुबचन मे भी हो सकती है ।अभी आपकी स्वम की ओर से है, बाद मे सबकी ओर से हो सकती है ।

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  21. नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
    दुआ कीजिये वो नज़र न बने।
    समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
    दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
    Par upkar ke bhav jagati aapne rachna bahut achhi lagi.
    Bahut badhai

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  22. जी मुझे भी आपसे मिलने का मन था ....अब अगली बार ऐसा न हो ....वैसे भी कभी हजरतगंज मे या दूरदर्शन मे यदि आप आती हों तो भेंट हो सकती है .या फिर किसी गोष्ठी मे ....

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