रविवार, 10 मई 2009

मातृ दिवस

मां शब्द ही अवर्णनीय,अतुलनीय है।उनके बारे में लिखना किसी के लिये सम्भ्व नहीं है।
दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि उनके लिये लिखना सागर की एक बूंद की तरह होगा।
आज मातृ दिवस पर मैं अपनी एक कविता प्रकाशित कर रही हूं।

मां
मां सिर्फ़ शब्द नहीं
पूरी दुनिया पूरा संसार है मां
अंतरिक्ष के इस पार से
उस पार तक का अंतहीन विस्तार है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं--------------------।

शिशु की हर तकलीफ़ों को रोके
ऐसी इक दीवार है मां
शब्दकोश में नहीं मिलेगा
वो कोमल अहसास है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं-------------------।

सृजनकर्ता सबकी है मां
प्रकृति का अनोखा उपहार है मां
ममता दया की प्रतिमूर्ति
ब्रह्म भी और नाद भी है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं---------------------।

स्वर लहरी की झंकार है मां
लहरों में भी प्रवाह है मां
बंशी की धुन है तो
रणचण्डी का अवतार भी है मां।
मां सिर्फ़ शब्द नहीं---------------------।

मां सिर्फ़ शब्द नहीं
पूरी दुनिया पूरा संसार है मां।
000000000000
पूनम


16 टिप्‍पणियां:

raj ने कहा…

ma pe jitna kahe kam hai.....wonderful post...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

मां सिर्फ़ शब्द नहीं--------------------शब्दों में बांधना मुमकिन भी नहीं,बहुत ही सुन्दर रचना...

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर एवं भावपूर्ण रचना.

गुलमोहर का फूल

BrijmohanShrivastava ने कहा…

अन्तरिक्ष के इस पार से उस पार तक /बच्चों की तकलीफ रोकने वाली दीवार /ब्रह्म भी नाद भी /लहरों का प्रवाह ,बंशी की धुन /साथ ही रणचंडी का अवतार भी /माँ पर यह कविता ही नहीं है माँ की प्रार्थना भी है

Kavi Kulwant ने कहा…

bahut khoob..

अल्पना वर्मा ने कहा…

अंतरिक्ष के इस पार से
उस पार तक का अंतहीन विस्तार है मां।

waah! bahut hi sundar panktiyan!
Poonam ji ,
abhi tak kayee kavitayen is vishay par kayee blogs par padh chuki hun...aap ki yah saral ,sundar aur behad bhaav bhari kavita dil ki gahrayeeyon se nikali hai...pasand aayi.

Science Bloggers Association ने कहा…

माँ वाकई माँ होती है। हम तो बस इतना ही कहेंगे कि माँ तुझे सलाम।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

bhawna ने कहा…

maa is sabd me hi jo amrit hai vah bolne bhar se hi hame jila deta hai . maa par aap ki rachna padhi bahut bhali lagi . aapko matri divas par badhai .

विनय ने कहा…

माँ के लिए आपने बहुत सुन्दर कविता लिखी है, बधाई

Babli ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आपकी टिपण्णी के लिए!
बहुत ही ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! माँ के बारे में तो जितना भी लिखा जाए कम है! माँ हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं! माँ की वजह से ही हम आज इस दुनिया में कदम रखे हैं!

Mansi ने कहा…

Bahut shandaar hai maa par likhi kavita....itna accha hum nahi likh sakate...maa sirf shabd nahi hai...sahi kaha aap ne

neelam ने कहा…

aap ne humaare baal -udyaan par aakar kaha i aapko yahaan aana achcha lagta hai ,to humne bhi jhat se chapplen pahni aur chale aaye padosi ka dharm nibhaane ,aapke blog par aaye to bahut achcha laga sach maaniye kavitaaon se jyaada yah jaankar ki aap lucknow ki ,humaare shahar ki hi raunak hain ,aap humaare blog par apni rachnamatak prastutiyan bhej sakti hain ,baal -udyaan ko aapki ,aapki rachnaaon ka intazaar rahega .khuda haafij

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

"मां सिर्फ़ शब्द नहीं
पूरी दुनिया पूरा संसार है मां
अंतरिक्ष के इस पार से
उस पार तक का अंतहीन विस्तार है मां"
बहुत सुन्दर....बहुत ही ज्यादा पसंद आई ये पोस्ट

satish kundan ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना....


मैंने भी माँ के लिए कुछ लिखा है ,उसकी दो पंगती लिख रहा हूँ....

माँ....तुम्हे कैसे बांधू मैं शब्दों में......

हर शब्द तुम्हारी दासी है...
पूरी कविता पढने के लिए मेरे ब्लॉग पर आइये आपका स्वागत है

satish kundan ने कहा…

bahut khubsurti se aapne maa ki mahima ka bakhan kiya hai .....badhai

कंचनलता चतुर्वेदी ने कहा…

"मां सिर्फ़ शब्द नहीं
पूरी दुनिया पूरा संसार है मां"
रचना बहुत अच्छी लगी...