मंगलवार, 18 अगस्त 2009

पुकारती धरोहरें


अभी भी बाकी है कुछ निशानियां

जो पुकारती हैं मुझको

आकर बचा लो हमको।

वो हमारी धरोहरें जो

शान थीं इस देश की

आवाज देती मुझको

आकर बचा लो हमको।

वो ऐतिहासिक स्थल

खण्डहर होती इमारतें

वो बादशाहों के ख्वाब औ

बेगमों की हसरतें

रो रो के कहते मुझको

आ के बचा लो हमको।

वो चिटकती दीवारें

जंग खाती खिड़कियां

चरमराते दरवाजे

जो थीं अद्भुत निशानियां

बुला रही हैं मुझको

आकर सम्हालो हमको।

वो आजादी के मस्तानों की कुर्बानियां

याद आते ही आंखों में

बस जाती हैं परछाइयां

कहती हैं जो देश सौंपा तुमको

अब बचा लो उसको।

प्राचीन ग्रन्थों की बहुमूल्य गाथायें

महान कवि कुल गुरुओं की

अद्भुत रचनायें

गर्त में कहीं खोती जा रहीं

कह रही हैं मुझको

वक्त है बचालो ढूंढ़ लो हमको।

भूल जाना ना ये निशानियां

पुकारती हैं सबको

रखना संभाल हमको।

0000000000

पूनम

14 टिप्‍पणियां:

Ram ने कहा…

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BrijmohanShrivastava ने कहा…

बहुत सही बात कही है इन निशानियों को बचाना चाहिए .ये शान हैं देश की ,हमारे प्राचीन गौरब की प्रतीक है ,पुरातत्त्व वाले तो फोर्मलिटी करते है हम को ही आगे आना होगा वैसे कहा ये जाता है कि ""नए घर में पुरानी चीज़ को अब कौन रखता है ,,परिंदों के लिए कूंडों में पानी कौन रखता है ,हमी थामे है गिरती दीवार को लेकिन ,सलीके से बुजुर्गों की निशानी कौन रखता है |मगर रखना चाहिए |आपके विचार समयानुकूल है ,प्रेरणाप्रद है रचना भी बहुत सुंदर बन पडी है

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इस रचना के माध्यम से सुन्दर सन्देश दिया है आपने ....... सच में आज जरूरत है इन सब को संजो कर रखने की .........

रचना गौड़ ’भारती’ ने कहा…

रचना के माध्यम से सुन्दर सन्देश
आज़ादी की 62वीं सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। इस सुअवसर पर मेरे ब्लोग की प्रथम वर्षगांठ है। आप लोगों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए मैं आपकी आभारी हूं। प्रथम वर्षगांठ पर मेरे ब्लोग पर पधार मुझे कृतार्थ करें। शुभ कामनाओं के साथ-
रचना गौड़ ‘भारती

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

हम तो बाढ़ से परेशान हैं,
मगर रचना गौड़ भारती की
इस सुन्दर रचना के लिए
बधाई तो दे ही देते हैं।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

वो ऐतिहासिक स्थल

खण्डहर होती इमारतें

वो बादशाहों के ख्वाब औ

बेगमों की हसरतें

रो रो के कहते मुझको

आ के बचा लो हमको।


bahut achhi rachna

अर्शिया अली ने कहा…

Aapne dharoharon kee aatma ko prastut kar diya hai.
( Treasurer-S. T. )

Diwakar Sinha ने कहा…

hindi ki aadat 5 saal pehle choot gayi hai...parantu aapke post pe tippaniyi karke jo maza aaya use zyada itne saalo baad hindi likhkne mein aaya...dhanyawaad!
but I will say your post was not only good, but quite thought provoking as well.

Harkirat Haqeer ने कहा…

वक्त है बचालो ढूंढ़ लो हमको।

भूल जाना ना ये निशानियां

पुकारती हैं सबको

रखना संभाल हमको।

संदेश देती नज़्म ...... !!

अल्पना वर्मा ने कहा…

पूनम जी,बहुत अच्छी कविता है.
एक सुन्दर सन्देश देती हुई.
बदलते समय के साथ खोती इन धरोहरों को बचाए रखने की आवश्यकता है.

Nirmla Kapila ने कहा…

bahut der baad aayee magar durust aayee nahee to itanee badia racanaa padhane se rah jaatee bahut bahut badhaaisundar rachana ke liye

Babli ने कहा…

हमेशा की तरह आपने बेहद सुंदर कविता लिखा है और अच्छा संदेश दिया है! कविता की हर एक पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी !

sangeeta ने कहा…

bahut sundar kriti....aitihaasik dharoharon ko bachane ka aahvaahan....sandesh deti rachna....sundar rachna ke liye bahut bahut badhai

vikram7 ने कहा…

सच से भरा सन्देश देती सुन्दर रचना