गुरुवार, 26 नवंबर 2009

वो भयानक दिन


आज वो खूनी मंजर फ़िर याद आ गया
सब की आंखों को फ़िर से वो बरसा गया।

मांएं इंतजार में बैठी बस नजरें बाट जोह रही
विधवायें सूनी मांग लिये हर कोने में सिसक रहीं।

बेबस अनाथ बच्चे जैसे अपनों को भीड़ में ढूंढ़ रहे
खो चुके जो अपनी पहचान खुद अपना परिचय पूछ रहे।

कहीं पथराई सी आंखें हैं जिनका सब कुछ लुटा हुआ
आज का खूनी दिन देखो फ़िर से उनको रुला रहा।

हम सब बेबस बन कर के कैसे हाथों को बांधे खड़े रहे
मूक दर्शक व श्रोता बन कर केवल मन में चीत्कार लिये।

भीगी पलकों से ही हमने श्रद्धांजलि अर्पित कर दी उनको
रस्म अदाई की अपनी फ़िर अगले पल ही भुला दिया।

ऐसी दिल दहलाने वाली घटना जिससे था जर्रा जर्रा कांपा
डर डर के लमहे बीते थे आगे अब जाने क्या होगा ।

खून सभी का एक ही है फ़िर क्यों करते हैं हम बटवारा
मिल करके दुआ करो रब से हादसा न हो फ़िर दोबारा।
00000000
पूनम




20 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

खून सभी का एक ही है फ़िर क्यों करते हैं हम बटवारा
मिल करके दुआ करो रब से हादसा न हो फ़िर दोबारा।
आप की बविता बहुत अच्छी लगी,
धन्यवाद

panchayatnama ने कहा…

आपकी पीड़ा मन को छू जाती है

Udan Tashtari ने कहा…

भूलना तो शायद किसी के लिए भी संभव नहीं है. रचना बहुत उम्दा है.

Apanatva ने कहा…

dil ko dukha jane walee ghatana thee ye scar jo pade hai shayad samay hee mita pae .bahut accha sandesh detee hai aapakee rachana . badhai sandesh ke liye

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपने बहुत मार्मिक लिखा है!
पढ़कर दिल भर आया है।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

un hazaaron ke naam......shradhanjali

शरद कोकास ने कहा…

ज़रा याद करो कुर्बानी ...

sangeeta ने कहा…

भीगी पलकों से ही हमने श्रद्धांजलि अर्पित कर दी उनको रस्म अदाई की अपनी फ़िर अगले पल ही भुला दिया।

poonam ji,
kadwa sach likha hai....aisa hi karte hain log....vicharneey rachna....sundar abhivyakti...badhai

दिगम्बर नासवा ने कहा…

JINHONE APNE PRIY JANO KO KHOYA HAI VO AISE DARDNAAK HAADSO KO BHULA NAHI SAKTE ... BHAGVAAN KARE YE HAADSE DUBARA NA HON ...
SHAGEEDON KI YAAD MEIN LIKHI RACHNA BAHUT MAARMIK HAI ...

शरद कोकास ने कहा…

मार्मिक रचना है ।

Krishna Kumar Mishra ने कहा…

बहुत उम्दा कविता है

अल्पना वर्मा ने कहा…

maarmsparshi rachna.
hamari bhi shraddhanjali hai.

Nirmla Kapila ने कहा…

बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति है शुभकामनायें

Priya ने कहा…

haan .......dua to yahi hai ki haadse na ho dobara

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

फिर न देखें कोई आंखें कभी इस दुनिया में
मेरी आंखों ने जो ये खून का मज़र देखा!!!
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

बहुत अच्छी कविता लिखी है आपने । रचना गहरा प्रभाव छोडऩे में समर्थ हैं ।

मैने अपने ब्लाग पर एक कविता लिखी है-रूप जगाए इच्छाएं । समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-
http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत ठीक कहा आपने की यह सब दुबारा न हो ..पसंद आई आपकी यह रचना शुक्रिया

Babli ने कहा…

हम सब बेबस बन कर के कैसे हाथों को बांधे खड़े रहे
मूक दर्शक व श्रोता बन कर केवल मन में चीत्कार लिये।
भीगी पलकों से ही हमने श्रद्धांजलि अर्पित कर दी उनको रस्म अदाई की अपनी फ़िर अगले पल ही भुला दिया।
आपने बहुत ही मार्मिक रचना लिखा है जिसे पढ़कर आंखों में आँसू आ गये ! उस भयानक हादसे को कभी भुलाया नहीं जा सकता जिसमें बेगुनाहों और मासूम लोगों की जानें चली गई! हर एक पंक्तियाँ आपने सच्चाई को दर्शाते हुए सही चित्रण किया है !

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

भीगी पलकों से ही हमने श्रद्धांजलि अर्पित कर दी उनको
रस्म अदाई की अपनी फ़िर अगले पल ही भुला दिया।

खून सभी का एक ही है फ़िर क्यों करते हैं हम बटवारा
मिल करके दुआ करो रब से हादसा न हो फ़िर दोबारा।

सही कहा आपने हम तो बस रस्म अदाई भर कर सकते हैं ......!!

Reetika ने कहा…

samvedansheel rachna!