सोमवार, 28 दिसंबर 2009

आंसुओं के नाम


इन आंसुओं को नाम क्या दूं दोस्तों
जिन्होंने धोखा हर बार दिया है
वक्त को पल में बदल देते हैं जो
इन्होंने अपना रूप हजार किया है।

अछूता नहीं कोई इनसे जहां में
सभी का इनसे पड़ता है वास्ता
कहीं खुशी के इजहार में छलके आंसू
तो कभी गम में भी बरसात किया है।

तराजू के पलड़ों पर
इनका भार इतना ज्यादा
कि सच और झूठ में अन्तर क्या
सभी को इसने भरमा दिया है।

कहीं झूठ को चीर कर आंसुओं ने
सचाई को सामने ला दिया है
कहीं पर नकाब ओढ़कर झूठ का
सचाई को ही धोखे में डाल दिया है ।

कभी तो आंसुओं में इतनी ताकत
कि पत्थर को मोम बना दिया है
और कभी आंसू ही बन के पत्थर
घावों से दिलों को भर दिया है

लाख तूफ़ां को सहते हुये भी जिसने
खुशी का ही सागर छलकाया है
कभी बन के प्रेम का दरिया ये
कहीं नफ़रत का बीज भी बोया है।

है आंसू खुद में इतनी बड़ी हस्ती
जो मिटा सके पल में सारी ही बस्ती
अपने इसी बल पर तो ही इसने
कितने दिलों पर राज किया है।

वक्त बेवक्त बह कर इन आंसुओं ने
नाम खुदा के भी फ़रेब किया हैं
इसीलिये लोगों ने शायद इन्हें
घड़ियाली आंसू का नाम दिया है।
00000
पूनम

20 टिप्‍पणियां:

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

अछूता नहीं कोई इनसे जहां में
सभी का इनसे पड़ता है वास्ता
कहीं खुशी के इजहार में छलके आंसू
तो कभी गम में भी बरसात किया है।

आँसू से कोई बच नही पाता है दुख तो दुख है ये आँसू सुख में भी छलक जाते है ..बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..बढ़िया गीत..बधाई!!

बेनामी ने कहा…

आप की कलम में दम है. रोने धोने से आगे बढ़िए. वैसे भी आंसू कुछ खास अवसरों के लिए ही होते हैं> आदमी हरदम रोता नहीं रहता.

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

waah poonam ji pehli baar apko padha bahut acchhi aansuo ki vyakhya ki hai.bahut khoobsurat rachna.

badhayi.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही अच्छी लगी आप की यह रचना,

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा भावपूर्ण!!

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता।
आने वाला साल मंगलमय हो।

मनोज कुमार ने कहा…

ये आंसू दिल की जुबान हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद
आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

Apanatva ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Apanatva ने कहा…

ati sunder rachana badhai 1kai bhumikae dikha dee aapanne .samarpan aur akramak douno hee roop sanjoe hote hai ye.

sangeeta swarup ने कहा…

आंसू पर की गयी आपकी खोज शत प्रतिशत सही है......सुन्दर रचना...बधाई

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

आंसू सुख और दुःख दोनों की अभिव्यक्ति है..अच्छा लिखा है आपने ..शुक्रिया

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI ने कहा…

.......................... शायद इन्हें
घड़ियाली आंसू का नाम दिया है।

शायद !!
धोखा खाना और धोखा देना भी तुलनात्मक ही लगता है ..... कुछ कुछ कमजोर और ताकतवर के बीच जन की तरह !!

सो......... निवेदन कि मजबूत बनिए !!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कभी तो आंसुओं में इतनी ताकत
कि पत्थर को मोम बना दिया है
और कभी आंसू ही बन के पत्थर
घावों से दिलों को भर दिया है ....

तभी तो कहते हैं की आँसुओं में बहुत ताक़त है ....... और अगर ये सच्ची दिल से निकलें हों तो ज़रूर असर होता है ...... नव वर्ष की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ ...........

Ravi Rajbhar ने कहा…

Bahut sunder lajabab prastutui rakhi hai aapne...badhai.

अल्पना वर्मा ने कहा…

ये आँसू दिल की ज़ुबान होते हैं,
आँसुओं पर यह कविता भावों के सशक्त अभिव्यक्ति लगी.

अल्पना वर्मा ने कहा…

नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएँ .

रश्मि प्रभा... ने कहा…

आंसू ही तो मोती बन जाने की क्षमता रखते हैं

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

बहुत सुन्दर।
आंसुओं की असलियत परखना इन्सानियत परखना है!

sandhyagupta ने कहा…

Poonam ji,nav varsh ki dheron shubkamnayen.

बेनामी ने कहा…


पूनम जी आपके पास भाव भी है भाषा भी है पर शिल्प की पकड कुछ कमजोर है