शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

वो उम्र


वो एक उम्र ही तो होती है

जो ऐसी होती है

हर शै पर एक बार

जरूर से आती है।

वो एक उम्र ही तो होती है

जो ऐसी होती है

हर शख्स के जीवन में

सपन सतरंगी लाती है।

वो एक उम्र ही तो होती है

जो ऐसी होती है

अपने हर तरफ़ इक खूबसूरत

अहसास सा पाती है।

वो एक उम्र ही तो होती है

जो ऐसी होती है

अपनी ख्वाहिशों का

सुन्दर सा जाल बनाती है।

वो एक उम्र ही तो होती है

जो ऐसी होती है

कोई तो इस जाल को

पूरा बुन जाती है।

वो एक उम्र ही तो होती है

जो ऐसी होती है

और कोई इस जाल में

फ़ंस के रह जाती है।

वो भी तो एक उम्र ही है

जो सब पा जाती है

या फ़िर कभी दोनों को

संगसंग जीती है।

00000

पूनम

36 टिप्‍पणियां:

Manish Pandey ने कहा…

Achcha prayash hai, jari rakhein, aur nikhar aayega...

दीर्घतमा ने कहा…

पूनम जी बहुत समयानुकूल कबिता सुन्दर मनमोहक जागरूकता पैदा करने वाली.
बहुत-बहुत धन्यवाद

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

काश हम भी उस उम्र को पहचान पाते ....अच्छी प्रस्तुति

Sunil Kumar ने कहा…

vah umar koun si hai poonam ji ?.rachna ant tak bandhe rakhti hai uttar ki liye

उपेन्द्र ने कहा…

bahoot hi sunder kavita.... umra ke bare men sunder ehsas .....

मनोज कुमार ने कहा…

काश कि वह उम्र ठर जाती। या काफ़ी लंबा होती। सुंदर भावाभिव्यक्ति।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

जीवन को बनाती या बिगाड़ती है यह उम्र...... बड़ी प्रासंगिक और प्रभावी रचना ...... आभार पूनमजी...

रचना दीक्षित ने कहा…

समय समय की बात है.... बेहतरीन भावों से सजी प्रस्तुति

Shekhar Suman ने कहा…

पूनम जी, बहुत ही प्यारी कविता है....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हमारी उम्र ही तो रहती है हमारे साथ, ताउम्र।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

umra ka yah falsafa yaad rahta hai aur dil karta hai ki wahin laut jayen ...bahut achhi rachna

केवल राम ने कहा…

उम्र का तकाजा भी ..क्या तकाजा है ...बहुत सुंदर कविता ..पुरे जीवन को विश्लेषित कर दिया आपने
चलते -चलते पर आपका स्वागत है

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

ओह, यह उम्र थी जरूर, पर जरा जल्दी ही गुजर गई! :(

कविता रावत ने कहा…

Umra ka bahut hi sahi vishleshan kiya hai aapne.. aabhar
bahut achhi prastuti lagi.

sada ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत शब्‍दों के साथ आपने उम्र को समेटा है अपने अंदाज में ...बधाई सुन्‍दर लेखन के लिये ...।

ashish ने कहा…

सुन्दर भावपूर्ण कविता , उम्र चाहे जो हो , हर उम्र मनुष्य को कुछ करने के लिए प्रेरित करती है .

shikha varshney ने कहा…

यह उम्र भी क्या चीज़ है टिकती ही नहीं .सुन्दर अभिव्यक्ति .

BrijmohanShrivastava ने कहा…

सर्व प्रथम तो मै उस रेखा चित्र की बात करुं जिसे देख कर गाना याद आया बचपन के दिन भी क्या दिन थे उडते फिरते तितली बन। इस उम्र में सतरंगी सपने और इच्छाओं का जाल बनता है। कितनी गम्भीर बात लिखदी कि किसी का जाल पूरा बुना जाता है और कोई इसमें फंस कर रह जाता है। ज्यादातर वही स्थिति होती है जो आपने अन्तिम लाइन में कही है कि दौनो को संग संग ही जीना पडता है और यही स्वाभाविक भी है

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ... !

वन्दना ने कहा…

पता ही नही वो उम्र कब आकर चली गयी मगर शायद ऐसी ही होती है……………सुन्दर प्रस्तुति।

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

अफसोस तो इस बात का है पूनम जी कि यह उम्र फिसलती चली जाती है रेत की तरह... या कहिये रेत घड़ी की तरह... अंतर इतना है कि रेत घड़ी को उलटकर समय को वापस किया जा सकता है पर जीवन में उस उम्र कओ नहीं लौटाया जा सकता.

Udan Tashtari ने कहा…

वो एक उम्र ही तो होती है

सच


वही ऐसा बेहतरीन अनुभव भी लिखवाती है -वो एक उम्र ही तो होती है

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत ही अच्छी कविता... बहुत ही सुंदर भाव हैं....

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

वो एक उम्र ही तो होती है
जो ऐसी होती है
हर शै पर एक बार
जरूर से आती है।

वो एक उम्र ही तो होती है
जो ऐसी होती है
हर शख्स के जीवन में
सपन सतरंगी लाती है।

अच्छी प्रस्तुति...

dev ने कहा…

शब्दों, भावों और भावनाओं का अनूठा संगम है आपके व्यक्तित्व मे.....

मे एक बार एक कवित्री को लेखक के रूप मे देखने की तमन्ना रखता हूँ....एक बार वहाँ भी अपनी कलम का जादू बिखेरिये...

'उदय' ने कहा…

... bhaavpoorn rachanaa !!!

anjana ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति .....

केवल राम ने कहा…

पूनम जी
नमस्कार
किस तरह आप सबका शुक्रिया करूँ ...बस यही प्रार्थना है ...मुझे यूँ ही मार्गदर्शन प्रदान करते रहना ...आपका बहुत बहुत आभार

Babli ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर रचना! ख़ूबसूरत एहसास के साथ उम्दा प्रस्तुती!

Shekhar Suman ने कहा…

हिंदी साहित्य के एक महान कवि ...

निर्मला कपिला ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति। बधाई।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वो इक उम्र तो होती है ... पर बहुत जल्दी बीत जाती है .. पंख लगा कर बीत जाती है ... अछे सपने संजोय हैं रचना मिएँ ......

shekhar suman ने कहा…

मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है..
कृपया मेरे नए ब्लॉग को फोलो करें... मेरा नया बसेरा.......

निर्मला कपिला ने कहा…

उम्र का फसाना क्या कहें\ बहुत अच्छी लगी रचना। बधाई।

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब , शुभकामनायें !

Apanatva ने कहा…

ati sunder abhivykti........

der se aa pane ke liye kshamaprarthee bhee hoo........