मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

जीवन-- रथ


मेरे मन ने कही,मेरे मन ने सुनी

मेरे दिल की बात मेरे मन मे रही।

दो अजनबी मिले
नदी के दो पाट की तरह।

जानते थे वो एक होंगे नहीं

पर फ़िर भी संग संग चलते रहे।

पर विश्वास इसी में,प्रेम इसी में

लहरें एक दूजे को छूती रहीं।

एक वक्त ऐसा भी आया जब

साथी दोनों बिछड़ गये।

पर जितने दिन भी साथ रहा

वो जीवन में इक छाप छोड़ गये।

पर जीवन तो नदी का पाट नहीं
इक रथ के दो पहिये हैं।

इक बिगड़ा तो दूजे ने सम्भाला

पर साथ ना कभी छोड़ा अपना।

जीवन की यही तो रीति बनी

जिस बन्धन में बाँधा हमको।

रथ का पहिया यूँ ही चलता रहे

जीवन में बहुत है ये जीने के लिये।

000

पूनम

39 टिप्‍पणियां:

सतीश सक्सेना ने कहा…

साथी के लिए सकारात्मक अभिव्यक्ति के जरिये आपका समर्पण हमेशा जीत हासिल करे यही शुभकामनायें हैं !

Apanatva ने कहा…

मेरे मन ने कही,मेरे मन ने सुनी

मेरे दिल की बात मेरे मन मे रही।

samay ko ab karvat lelena chahiye :)


bahut sunder abhivykti .

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सारगर्भित रचना...

दीर्घतमा ने कहा…

भाव पूर्ण कबिता बेहद सकारात्मक बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत सुन्दर गीत.
नमस्ते पूनम जी

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

इक बिगड़ा तो दूजे ने सम्भाला
पर साथ ना कभी छोड़ा अपना।

जीवन की यही तो रीति बनी
जिस बन्धन में बाँधा हमको।

रथ का पहिया यूँ ही चलता रहे
जीवन में बहुत है ये जीने के लिये।

सुंदर ...प्यारी कविता ...... सकारात्मक संवेदनशील मनोभाव

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर रचना, धन्यवाद

Anand Dwivedi ने कहा…

पर जीवन तो नदी का पाट नहीं
इक रथ के दो पहिये हैं।


इक बिगड़ा तो दूजे ने सम्भाला

पर साथ ना कभी छोड़ा अपना।

....
Aadarniya Poonam ji bahut sundar aur sargarbhit Rachna...Dhanyavaad.

रचना दीक्षित ने कहा…

अच्छी सोच के साथ लिखी हुई कविता. शुभकामनायें.

minoo bhagia ने कहा…

' rath ka pahiya yun hi chalta rahe '
bahut achha poonam

prabhat ने कहा…

तुम फूलो में हो तुम सावन में हो...
तुम फूलो में हो तुम सावन में हो,
मेरे दिल का बगीचा सारा ही खाली, नाचती मोरनी सी आँगन में हो,
तुम फूलो में हो तुम सावन में हो,
आज कान्हा गए है बरसाने राधे ,
पता ये चला है,तुम वृन्दावन में हो,
तुम फूलो में हो तुम सावन में हो
तुम धरा की हो देवी हो नभ की हवा
तुम समंदर में हो आग पावन में हो
तुम फूलो में हो, तुम सावन में हो
क्यों ना आये ये दिल अब उसी चाँद पर,
वो चाँद वो तारे जिसके दामन में हो
तुम फूलो में हो, तुम सावन में हो
मेरे दिल का बगीचा सारा ही खाली, नाचती मोरनी सी आँगन में हो,
तुम फूलो में हो, तुम सावन में हो


प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"अगर अच्छा लगा तो ब्लॉग पर जाएये, लिंक: http://prabhat-wwwprabhatkumarbhardwaj.blogspot.com/

prabhat ने कहा…

दिल जिनका नर्म और दिमाग सादा था,
जिनसे उम्र भर साथ निभाने का वादा था
आज वे ही गुमराह कर बैठे है मुझे
जिन पर विश्वास मुझे खुद से ज्यादा था

आईने भी इजहार करने लगे है,
छुप छुप के दीदार करने लगे है,
मेरी तस्वीरे उनकी किताबो से मिली है,
सबूत है, वो प्यार करने लगे है

प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"अगर अच्छा लगा तो ब्लॉग पर जाएये, लिंक: http://prabhat-wwwprabhatkumarbhardwaj.blogspot.com/

रश्मि प्रभा... ने कहा…

दो अजनबी मिले
नदी के दो पाट की तरह।
जानते थे वो एक होंगे नहीं
पर फ़िर भी संग संग चलते रहे।
विश्वास इसी में,प्रेम इसी में
aur nihsandeh ek sukun bhi isi me

सदा ने कहा…

मेरे मन ने कही,मेरे मन ने सुनी
मेरे दिल की बात मेरे मन मे रही।

वाह ... बहुत खूब बेहतरीन शब्‍दों में अनुपम प्रस्‍तुति ।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

sahi kaha satesh sir ne...:)
bahut pyari si rachna......

mahendra srivastava ने कहा…

बहुत सुंदर... मेरे मन ने कही,मेरे मन ने सुनी,
मेरे दिल की बात मेरे मन मे रही। ऐसा सच जो वाकई मन के काफी करीब है।

G.N.SHAW ने कहा…

जीवन की रथ / ट्रेन हमेशा चलती रहेगी ! दो पटरिया ( सुख और दुःख ) कभी नहीं मिलेंगी !बहुत ही सुन्दर

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति ...यही जीवन चक्र है

BrijmohanShrivastava ने कहा…

मेरी बात रही मेरे मन में , कुछ कह न सकी उलझन में । साथ साथ चलते है पर मिल नहीं सकते, वक्त ने हमे रेल की पटरी बना दिया ।एक बहुत गहरी बात कही गई है इस रचना में कि जितने दिन का साथ रहा एक छाप छोड गये। अन्तिम तो बहुत ही बढिया है कि एक बंधन जो बंध गया है तो जब तक जीवन है वस रथ का पहिया चलता रहे चलता रहे और किसी की नजर न लगे , एक दूजे को सम्हालते हुये यह जीवन यात्रा पूरी होजाये । बहुत बहुत अच्छी रचना

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय पूनम जी
नमस्कार !
नदी के दो पाट की तरह। जानते थे वो एक होंगे नहीं पर फ़िर भी संग संग चलते रहे।
.......बेहद खूबसूरत शब्‍दों का संगम है इस अभिव्‍यक्ति में

शालिनी कौशिक ने कहा…

man ki bhavnaon kee behad khoobsurat abhivyakti.badhai.

शिखा कौशिक ने कहा…

जानते थे वो एक होंगे नहीं

पर फ़िर भी संग संग चलते रहे
bahut sundar bhavabhivyakti.

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत खूब, बेहतरीन प्रस्‍तुति.........

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

हमारी परम्पराओं और समाजी सरोकार की बात है यह.. बहुत ही खूबसूरत!!

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

parallel lines never meet but travel together...till infinity...

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

रथ का पहिया चलता रहे
जीवन में बहुत है यह जीने के लिये ।
कितना सही कहा है । जीवन रथ के दोनो पहियों में जरूरी है सांमजस्य । चलना तो उन्हें समांतर ही है ।
बहुत बढिया ।

prabhat ने कहा…

aur sunnneye, aapne poora blog pada...? aasha hai ab aap poora blog padh kar apni priy kavita par mujhe mujhe comment dengi..

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सारगर्भित रचना|धन्यवाद|

ashish ने कहा…

जीवन से भरी , और उत्प्रेरित करती खूबसूरत रचना . सुँदर भाव में लिपटी हुई . आभार .

अविनाश मिश्र ने कहा…

एक वक्त ऐसा भी आया जब
साथी दोनों बिछड़ गये।

पर जितने दिन भी साथ रहा
वो जीवन में इक छाप छोड़ गये।
वाह ! बहुत ही सुन्दर..

पूनम जी मेरे ब्लॉग per अपना कीमती वक्त देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

आगे भी प्रोत्साहित करते रहिएगा

avinash001.blogspot.com दोस्तों आपका इंतजार रहेगा

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दोनों पहियों का चलना आवश्यक है।

Rajeev Panchhi ने कहा…

बहुत सुंदर ....

रथ का पहिया यूँ ही चलता रहे,
जीवन में बहुत है ये जीने के लिये।

आपकी बात पसंद आई.

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सारगर्भित रचना|धन्यवाद|

KAVITA ने कहा…

मेरे मन ने कही,मेरे मन ने सुनी

मेरे दिल की बात मेरे मन मे रही।
...sach mein aisi duvidha jidangi mein bahut baar aati hai jab ham apne man kee baat kisi ko share nahi kar paate hain..
bahut badiya prastuti.. haardik shubhkamnayne..

OM KASHYAP ने कहा…

namaskaar ji
bahut hi parbhavit kiya aapki iss rachna ne bahut sunder likhte hein aap
aapka abhar

OM KASHYAP ने कहा…

der se pahuchne ke liye maafi chahata hoon

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

पूनम जी आप मेरे ब्लॉग पर आईं रचना को सराहा मेरे लिये तो बहुत खुशी का दिन था । आशा है आपका स्वास्थ्य अब सम्हल रहा होगा । मेरे लिये भी कभी कभी बहुत मुश्किल हो जाता है नेट पर जाना जब और आवश्यक काम सामने आ जाते है । दोस्तों में क्षमा कैसी । स्नेह बनाये रखें ।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

जीवन की एक सच्चाई को बड़े सरल शब्दों में प्रस्तुत किया ....अच्छा लगा.. बधाई

विजय रंजन ने कहा…

दो अजनबी मिले
नदी के दो पाट की तरह। जानते थे वो एक होंगे नहीं पर फ़िर भी संग संग चलते रहे। पर विश्वास इसी में,प्रेम इसी में लहरें एक दूजे को छूती रहीं। एक वक्त ऐसा भी आया जब साथी दोनों बिछड़ गये। पर जितने दिन भी साथ रहा वो जीवन में इक छाप छोड़ गये।
Bahut sahi kaha aapne poonam ji..Bahut acchhi rachna.

ज्योति सिंह ने कहा…

रथ का पहिया यूँ ही चलता रहे

जीवन में बहुत है ये जीने के लिये।
bahut sahi baat kahi ,saath rahe bas ek doosre ko sambhalte huye ,badhiya .