बुधवार, 1 मई 2013

कैक्टस के जंगल

(फोटो--गूगल से साभार)

ज्यों ज्यों उम्र उसकी
चढ़ रही थी परवान पे
त्यों त्यों पल रहे थे
सपने उसकी आंखों में।

घर आंगन की लाडली
नन्हीं सी कली खिली खिली
नहीं मालूम था एक दिन
मुरझायेगी वो किस गली।

पूरे घर की आंखों की पुतली
जान निसार थी जिस पर सबकी
अपने ख्वाबों के संग संग
जिसने देखे थे सपने बापू व मां के।

कदम बढ़ा रही थी धीरे धीरे
खोल रही थी पर अपने
धर दबोचा उसको पीछे से
कुछ नापाक हाथों ने।

छटपटाई रोई चिल्लायी
भाई होने की दी दुहाई
पर जिसको दया न आनी थी
वो हुआ कब किसका भाई।

बहुत लड़ी हिम्मत न हारी
पर अंततः लाचार हुई
बड़ी ही बेदर्दी से वो
हैवानियत का शिकार हुई।

बिखर गये सारे सपने
जिस्म के टुकड़े टुकड़े हो कर
चढ़ गयी फ़िर एक बेटी की बलि
शैतानों के हाथों पड़कर।

ना जाने कितनी बेटियां
ऐसी बलि होती रहेंगी
क्या सचमुच ये धरती मां
बेटियों से सूनी हो जायेगी।
000

पूनम





22 टिप्‍पणियां:

वाणी गीत ने कहा…

मार्मिक !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मार्मिक चित्रण, स्थितियाँ बदलनी होंगी..

कालीपद प्रसाद ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
कालीपद प्रसाद ने कहा…

मार्मिक !परिर्स्थिति जरुर बदलेगी !
डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
lateast post मैं कौन हूँ ?
latest post परम्परा

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

मार्मिक सुंदर अभिव्यक्ति ,,,

RECENT POST: मधुशाला,

राकेश कौशिक ने कहा…

संवेदनशील प्रस्तुति - अंतिम प्रश्न भी जायज है

राकेश कौशिक ने कहा…

संवेदनशील प्रस्तुति - अंतिम प्रश्न भी जायज है

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति,आभार.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (03-05-2013) के "चमकती थी ये आँखें" (चर्चा मंच-1233) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

आनन्द विक्रम त्रिपाठी ने कहा…

भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

सतीश सक्सेना ने कहा…

कष्टकारक :(

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...

@मेरी बेटी शाम्भवी का कविता-पाठ

कविता रावत ने कहा…

शायद माकूल जवाब किसी के पास नहीं ..
बहुत मार्मिक प्रस्तुति..

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


हैल्थ इज वैल्थ
पर पधारेँ।

आशा जोगळेकर ने कहा…

सचमुच केक्टस का जंगल हो चला है यह देश ।

ajay yadav ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
ajay yadav ने कहा…

मार्मिक लेखन |
http://drakyadav.blogspot.in/

कविता रावत ने कहा…

बहुत मार्मिक प्रस्तुति!

tejkumar suman ने कहा…

बहुत ही मार्मिक भावोँ को अति सुन्दर शब्दोँ मेँ व्यक्त किया गया है । बधाई । सस्नेह

minoo bhagia ने कहा…

bahut achhi kavita hai poonam

Reena Maurya ने कहा…

मार्मिक रचना...

आशा बिष्ट ने कहा…

मार्मिक रचना...।