बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

आ जाओ ना-----


कई दिनों से ढूंढ़ रही हैं

मेरी नजरें उनको

और मन ही मन में

याद कर रही हैं

बहुत ज्यादा

पर वो हैं कि

नजर आते ही नहीं।

माना कि हमने भी

किया उनको

बहुत नजर अन्दाज़

इस बीच कई बार

उन्होंने कोशिश भी की

आने की

पर मैं आगे नहीं बढ़ पाई।

यूं तो कई बार

लगा कि उन्होंने

दिल के दरवाजे पर दस्तक दी और

जब तक

मैं उन्हें पुकारती

वो गायब हो जाते।

हद हैऐसी भी

निठुरता अच्छी नहीं

अब तो

वापस आ भी जाओ ना---

ओ मेरे शब्दों--------।

000000

पूनम

37 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

कभी कभी नहीं आते शब्द बार बार बुलाने पर भी......

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Shabdon ko dil ke gahre ehsaason se bulaao to jaroor aayenge ... Vo Kathleen nahi jaate bas hum hi unko bhool jate hain ...

shekhar suman.. शेखर सुमन.. ने कहा…

bahut dino baad aapka likha kuch padha... :)

dheerendra ने कहा…

बेहतरीन रचना,लाजबाब प्रस्तुतीकरण..
बहुत दिनों बाद आपकी लेखनी पढ़ने को मिली बहुत अच्छा लगा,....
...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

वाणी गीत ने कहा…

कभी कभी शब्द भी यूँ ही खेलते हैं आंखमिचौली हमारे साथ !
सुन्दर अभिव्यक्ति !

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

सारे शब्द एकत्र हो कविता का रूप ले जन्म लेंगे आपके हृदय से |

Mithilesh dubey ने कहा…

सुन्दर भावमयी रचना ।

Shah Nawaz ने कहा…

खूबसूरत अहसास लिए हुए...

amrendra "amar" ने कहा…

bahut achhi rachna

shubhkamnayen

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" ने कहा…

दोनों तरफ आग लगी रहती है
दिल की तमन्ना दिल में रहती है
एक टिस मन में सदा बसी रहती है

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

पूनम!
शब्दों ने सुन ली है, वे लौट आये हैं.. आखिर कब तक कोइ स्वर या शब्द दूर रह सकता है अपने सर्जक से.. और परिणाम है यह कविता बहुत ही मधुर!! शब्दों को वापस लौटाने का धन्यवाद!! बस यूं ही सजाते रहिये उन्हें!!

रविकर ने कहा…

क्या आपकी उत्कृष्ट-प्रस्तुति

शुक्रवारीय चर्चामंच

में लिपटी पड़ी है ??

charchamanch.blogspot.com

सदा ने कहा…

अनुपम भाव संयोजन ।

Apanatva ने कहा…

poonam aapne bulaya aue dekhiye shavd chale bhee aae .....
:)
kaisee ho

shikha varshney ने कहा…

ओह...खोये ही कहाँ हैं?/देखिये तो कितनी सुंदरता से तो आये हैं.

Suman ने कहा…

कई दिनों से ढूंढ़ रही हैं
मेरी नजरें उनको
और मन ही मन में
याद कर रही हैं
बहुत ज्यादा
पर वो हैं कि
नजर आते ही नहीं।
सही कहा है मै भी कई दिनों से
ढूंड रही हूँ .......सुंदर अहसास है !

sushma 'आहुति' ने कहा…

सुन्दर शब्दावली,

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शब्द ढूढ़ने मैं भी निकला...

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज charchamanch.blogspot.com par है |

Rakesh Kumar ने कहा…

ओ मेरे शब्दों.....

वाह! क्या बात है.
आप आयीं भी तो अभूतपूर्व धमाके के साथ.
'आ जाओ ना...' पढकर हृदय आनन्दित हो गया है.

आप वापिस आईं इसकी मुझे बेहद खुशी है.
ईश्वर आपको सदा ही खुश व् स्वस्थ रखें.

समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

kase kahun?by kavita verma ने कहा…

sundarta se ki gayee manuhar...aur shabd vapas aaye to apni sari khoobsuarati samete hue...

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.


अनोखा अंदाज़ !
काबिले-तारीफ़ रचना !
शब्द हो जाने को किसका मन न करेगा …
:)


बहुत सुंदर प्रस्तुति !


हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

G.N.SHAW ने कहा…

पूनम जी ..आप बहुत दिनों बाद लौटी है ! यादो और खवाबो की परछाई बिखेरती कविता ! बधाई

रचना दीक्षित ने कहा…

शब्द बार बार बुलाने का आह्वाहन बहुत सुंदर लगा. बधाई.

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

एक अलग अंदाज में सुंदर प्रस्तुति....... प्यार भरा कोमल एहसास.
पुरवईया : आपन देश के बयार- कलेंडर

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

lajabab prastuti vyatha aur virah ka sundar sanyojan ...badhai poonam ji

कविता रावत ने कहा…

हद है—ऐसी भी
निठुरता अच्छी नहीं
अब तो
वापस आ भी जाओ ना---
ओ मेरे शब्दों--------।

....सच ज्यादा निष्ठुरता भली नहीं......
बहुत बढ़िया मनोभाव..

minoo bhagia ने कहा…

kya baat hai poonam :)

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर रचना ,लाजवाब प्रस्तुति ..

ashish ने कहा…

kab tak ruthenge ye shabd aap jaise vidushi se . aakhir unhe bhi to sammaniy thaur chahiye.

Shayar Ashok : Assistant manager (Central Bank) ने कहा…

बहुत खुबसूरत रचना ||
लाज़वाब प्रस्तुति ||

Rachana ने कहा…

निठुरता अच्छी नहीं

अब तो

वापस आ भी जाओ ना---

ओ मेरे शब्दों--------।
kya sahi likha shbd kabhi kabhi bahut aankh michaouli khelte hain
rachana

Rakesh Kumar ने कहा…

मुझे पता चला है कि आज आपका जन्मदिन है.

मेरी तरफ से आपको जन्मदिन कि बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.आप सदा ही प्रसन्नचित्त और स्वस्थ रहें यही दुआ और कामना करता हूँ.

mridula pradhan ने कहा…

itne pyar se bulaya hai....zaroor wapas aayenge.

सुमन'मीत' ने कहा…

sahi kha poonam ji kabhi kabhi shabd kahin kho se jate hain .....

Atul Shrivastava ने कहा…

गहरे भाव।
सुंदर रचना।

vidya ने कहा…

सच बड़े निर्मोही है....
आते तो सुन्दर सृजन करती...

सुन्दर भाव,,,