सोमवार, 25 जून 2012

इन्तहां प्यार की---



हद से गुजर जाती है जब इन्तहां प्यार की
इक आह सी निकली इस दिल के गरीब से।

नजरे अंदाज उनके कुछ इस कदर बदले
अनजाने से बन निकलते वो मेरे करीब से।

हाले दिल जो गैरों ने सुना वो लेते तफ़री
अपने भी देखते हमको बड़े अजीब से।

ये दिल दौलत की दुनिया होती जब तक पास
बन जाते हैं सब बड़े हम नसीब से।

ताउम्र  जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से।
000
पूनम

34 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ ....

Anupama Tripathi ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति ..

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

ताउम्र जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से।


मन को प्रभावित करती सुंदर अभिव्यक्ति ,,,,,

RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: आश्वासन,,,,,

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हर शेर लाजबाब , मुबारक हो

संजय भास्‍कर ने कहा…

लाजवाब ग़ज़ल है ... एक एक शेर जैसे एक एक अनमोल मोती ..

संजय भास्‍कर ने कहा…

आदरणीय पूनम जी
नमस्कार !
जरूरी कार्यो के ब्लॉगजगत से दूर था
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ !

Dinesh pareek ने कहा…

बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ
बहुत खुबसूरत बहुत लाजबाब
और आप मेरे ब्लॉग पे आये इस के लिए आपका बहुत बहुत आभार
मेने आपको follow कर लिया है आप मुझे भी और मेरे ब्लॉग को follow करती है तो मुझे और ख़ुशी होगी

रविकर ने कहा…

अगर झरोखे में दिखे, गजल गजब उत्कृष्ट ।

ताक-झाँक नियमित करूँ, नहीं हटाऊं दृष्ट ।

नहीं हटाऊं दृष्ट , गरीबी बड़ी नियामत ।

जिन्दा वह इंसान, झेल के बड़ी क़यामत ।

स्नेह दीप को बार, चुने चेहरे वह चोखे ।

बाइस्कोप संवार, ताकता उसी झरोखे ।।

Kewal Joshi ने कहा…

"ताउम्र जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से"...

सुंदर अभिव्यक्ति.

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत खूब ।

कल 27/06/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


''आज कुछ बातें कर लें''

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ सुन्दर अभिव्यक्ति..

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सुन्दर भाव... बढ़िया रचना...
सादर.

दिगंबर नासवा ने कहा…

ताउम्र जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से ..

वो एक झलक ही तो पूरी जिंदगी होती है .... सब कुछ तो मांग लिया एक दुआ में ...

यशवन्त माथुर ने कहा…

बेहतरीन

सादर

Rohit ने कहा…

बात तो सही है....आह ही निकलती है गरीब के दिल से ...प्यार की इतंहा तो ये भी हो जाती है जब जाते-जात आंखे खुली रहती हैं इंतजार में

M VERMA ने कहा…

ताउम्र जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से।


बहुत सुन्दर .. वाह

रविकर ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति, कितने कम की आस और कितनी गहरी प्यास..

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

कोमल भावनाओं में रची-बसी सुन्दर रचना ....

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

bahut acchi prastuti.....dil ki aavaj
ko shabdon me ukera ....

virendra sharma ने कहा…

हाले दिल जो गैरों ने सुना वो लेते तफ़री
अपने भी देखते हमको बड़े अजीब से।
तुम जो आओ , तो प्यार आ जाए ,ज़िन्दगी में बहार आ जाए ....सुन्दर भाव पूर्ण आधुनिक भाव बोध से संसिक्त ग़ज़ल .

Satish Saxena ने कहा…

सुंदर रचना ...
बधाई !

Kavita Rawat ने कहा…

bahut sundar pyarbhara andanj mein rachi-basi sundar prastuti..

Rakesh Kumar ने कहा…

ताउम्र जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से।


आपने तो इन्तहां कर दी है प्यार की.
सुन्दर भावमय प्रस्तुति के लिए आभार.

मेरे ब्लॉग पर आईएगा.
नई पोस्ट जारी की है.

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति..
सुन्दर रचना...
:-)

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

अच्छी रचना
बहुत सुंदर

Minoo Bhagia ने कहा…

हद से गुजर जाती है जब इन्तहां प्यार की / इक आह सी निकली इस दिल के गरीब से।

achhi ghazal ahi poonam par gustakhi maaf , matle ki first line mein kaafiya nahin hai

आशा बिष्ट ने कहा…

umda ghazal..

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

ताउम्र जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से।

उम्दा दर्जे की ग़ज़ल।

G.N.SHAW ने कहा…

पूनम जी सभी शब्द अर्थ प्रधान है ! करिश्मे के पुजारी बहुत है !बधाई !

Suresh kumar ने कहा…

ताउम्र  जीने की अब ललक
हमको नहीं..
बस एक मुलाकात हो जाए
मेरी महजबीं से......
बहुत खुबसूरत बहुत लाजबाब.....

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति। मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद।

Sanju ने कहा…

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

शिवनाथ कुमार ने कहा…

ताउम्र जीने की अब ललक हमको नहीं
बस एक मुलाकात हो जाए मेरी महजबीं से

सुंदर भाव !