शनिवार, 16 जून 2012

गज़ल


तुम्हारी याद मे आंसू आंखों से छलकते हैं,
सावन के बारिश ज्यूं मेघों से बरसते हैं।

तुम जो गये तो बस दिल ही टूट गया,
वो जिगर कहाँ से लाऊँ जो पत्थर के होते हैं।

चौबीस पहर तस्वीर तेरी इन आंखों में बसती हैं,
मिटाऊँ कैसे उनको जो नज़रों से ओझल नही होते हैं।

दिलासा देते तो जाते हो की जल्दी ही आऊँगा,
और हम इन्तज़ार में पल-पल फ़िर गिनने लगते हैं।

बिन तुम्हारे ज़िंदगी अधूरी सी लगती है,
अब के आकर ना जाना वादा इक तुमसे लेते हैं।

आयेगा खत का जवाब यही ख्वाब देखते हैं,
इसी उम्मीद को दामन से लिये हम तो जीते हैं।
000
पूनम

20 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति |
बधाई पूनम जी -
मैंने देखा जब 'झरोखे' से तो-

इन्तजार में जी रहे, अश्रु-पान के संग |
"पूनम" की यह चांदनी, राहू-केतु से तंग ||

dheerendra ने कहा…

वाह ,,, बहुत बेहतरीन गजल ,,,बधाई पूनम जी,,,,

RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

Maheshwari kaneri ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर गज़ल..पूनम जी,

रचना दीक्षित ने कहा…

बिन तुम्हारे ज़िंदगी अधूरी सी लगती है,
अब के आकर ना जाना वादा इक तुमसे लेते हैं।

सुंदर प्रस्तुति.

Trupti Indraneel ने कहा…

तुम्हारी याद मे आंसू आंखों से छलकते हैं,
सावन के बारिश ज्यूं मेघों से बरसते हैं।

बहुत सुन्दर !

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बढिया है

अरुन शर्मा ने कहा…

वाह पूनम जी बेहद खुबसूरत ग़ज़ल
(अरुन = arunsblog.in)

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और सारगर्भित अभिव्यक्ति..

Noopur ने कहा…

Dil ko chhuti sundar rachna :)

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बेहतरीन ग़ज़ल

Mamta Bajpai ने कहा…

आयेगा खत का जवाब यही ख्वाब देखते हैं,
इसी उम्मीद को दामन से लिये हम तो जीते हैं।
बहुत खूब

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत गजल

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत खूब।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

तुम जो गये तो बस दिल ही टूट गया,
वो जिगर कहाँ से लाऊँ जो पत्थर के होते हैं...

बहुत उम्दा ... उनके जाने के गम से तो पत्थर के दिल भी रो उठेंगे फिर इंसान की क्या बात ... लाजवाब शेर हैं सभी ...

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत सुंदर ...उम्मीद जगाती रचना ...

सतीश सक्सेना ने कहा…

पूनम से निराशा नहीं झलकनी चाहिए..

सदा ने कहा…

कल 20/06/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


बहुत मुश्किल सा दौर है ये

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

तुम्हारी याद मे आंसू आंखों से छलकते हैं,
सावन के बारिश ज्यूं मेघों से बरसते हैं।
तुम जो गये तो बस दिल ही टूट गया,
वो जिगर कहाँ से लाऊँ जो पत्थर के होते हैं।

मन को उद्वेलित करने वाली सुन्दर गजल....

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

amrendra "amar" ने कहा…

अनुपम भाव .
.. बेहतरीन प्रस्‍तुति।