शनिवार, 4 अगस्त 2012

गज़ल


आज अपने ही शहर में
बन के मेहमां हम खड़े हैं
देख के हालत ये अपनी
बेकसी से रो पड़े हैं।

हंस के जो मिलते थे पहले
आज परदे में छुपे हैं
एक सिक्के के दो पहलू
सामने मेरे पड़े हैं।

सूर्य के रथ की धुरी सी
चल रही थी ज़िन्दगी
राहु बन कर के वो मेरा
रास्ता रोके खड़े हैं।

पहचान की हर सरहदों को
काट कर मीठी छुरी से
देखते हैं वो तमाशा
किस डगर पर हम खड़े हैं।

आज अपने ही-----।
0000

पूनम

19 टिप्‍पणियां:

दीर्घतमा ने कहा…

बहुत सुन्दर कबिता ------ एक सिक्के के दो पहलु सामने मेरे पड़े है----------- बहुत -बहुत धन्यवाद.

expression ने कहा…

ऐसा दौर भी आता है कभी.............

बहुत बढ़िया रचना पूनम जी.

अनु

dheerendra ने कहा…

पहचान की हर सरहदों को
काट कर मीठी छुरी से
देखते हैं वो तमाशा
किस डगर पर हम खड़े हैं।

बहुत बढ़िया गजल ,,,,पूनम जी,,,,,

RECENT POST ...: रक्षा का बंधन,,,,

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरती से मन के भावों को उतारा है गजल में।

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

अच्छी रचना

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

राह कौन है, नहीं ज्ञात है,
आशाओं की अभी रात है।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

जीवन की कटु सचाई को इस गज़ल में बहुत ही सुंदरता से बयान किया है आपने!!

शिखा कौशिक ने कहा…

sarthak prastuti .बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति . मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

रचना दीक्षित ने कहा…

पहचान की हर सरहदों को
काट कर मीठी छुरी से
देखते हैं वो तमाशा
किस डगर पर हम खड़े हैं।

सुंदर गीत पूनम जी बधाई और मित्रता दिवस पर शुभकामनायें.

Sanju ने कहा…

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

sushma 'आहुति' ने कहा…

behtreen gazal....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 06/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Vaanbhatt ने कहा…

एक कमेन्ट सुबह चेपा था...कहीं स्पैम में तो नहीं चला गया...

yashoda agrawal ने कहा…

बढ़िया ग़ज़ल

Shanti Garg ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग

जीवन विचार
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत खूब

कल 08/08/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


'' भूल-भुलैया देखी है ''

Asha Saxena ने कहा…

बहुत भावपूर्ण रचना और सुन्दर शब्द चयन |
आशा

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत खूब... वाह!
सादर.