सोमवार, 20 अगस्त 2012

आखिर क्यों--------?


अब मेरे बगीचे में
नहीं आता है
चिड़ियों का हुजूम
दाना चुगने के लिये।

अब भोर की बेला में
नहीं सुनाई देती
उनकी चीं चीं चूं चूं
उनकी चहचहाहट।

अब नजरें तरस गयी हैं
उन्हें देखने के लिए
पानी भरे अधफ़ूटे मटके में उनका
फ़ुदक फ़ुदक कर
अपने पर फ़ड़फ़ड़ा नहाना
और अपने पंखों को
फ़ैलाकर सुखाना।

उनका वो लुका छुपी
का खेल
एक रोमांच सा लगता था
जिनको देख हम भी
बन जाते थे बच्चे।
घने पौधों के बीच
उनका घोंसला बनाना
और फ़िर
हर वक्त अपने घोंसले के
चारों ओर
बड़ी सजगता से
निगरानी करना।

घोंसले के पास
किसी को देख
भयातुर स्वरों में चीं चीं
की करुण पुकार
उनकी हरकतें
आज भी बहुत याद आती हैं
पर क्या करें वो भी
हमने ही तो भौतिकता की
अंधी दौड़ में उन्हें
रास्ता बदलने पर
मजबूर कर दिया।

क्या कोई उन्हें
फ़िर से मना कर
हमारे बगीचे में
वापस नहीं ला सकता।
000
पूनम


28 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

हमने ही तो भौतिकता की
अंधी दौड़ में उन्हें
रास्ता बदलने पर
मजबूर कर दिया।

संवेदनशील विचार ....
अब उन्हें फिर मनाने की कोशिशें भी करनी होंगीं

expression ने कहा…

मोनिका जी ठीक कहती हैं....हमने ही नाराज़ किया है हमें ही मनाना होगा...

विचारणीय रचना...

अनु

dheerendra ने कहा…

भौतिकता की दौड में ,हमने किया मजबूर
कोशिश गर मिलकर करें,लौट आयेगीं जरूर,,,,

RECENT POST ...: जिला अनुपपुर अपना,,,

शालिनी कौशिक ने कहा…

monika ji se poori tarah sahmat.जनपद न्यायाधीश शामली :कैराना उपयुक्त स्थान

शिखा कौशिक 'नूतन ' ने कहा…

sach me chidiyaon ka na aana sabhi ko khalta hai .sarthak post
WORLD'S WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION-JOIN THIS NOW

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ा ही गहरा प्रश्न उठाया है आपने..काश इसके उत्तर मिल पाते..

Human ने कहा…

Bhaavpradhaan rachna.

Maheshwari kaneri ने कहा…

इसके जिम्मेदार हम खुद ही है ..

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

अच्छी रचना
बहुत सुंदर

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

Sanju ने कहा…

nice presentation....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गहरा प्रश्न है ... इंसान की भूख ने ये सब कर्म किया है ... और अभी अगर वो चाहे तो ये सब वापस आ सकता है ... पर देर हों से पहले ...

sushma 'आहुति' ने कहा…

gahri abhivaykti....

सुशील ने कहा…


सुंदर !
पूछना पडे़गा चिडियों से अब
फिर शुरू करेंगी आना वो कब!

yashoda agrawal ने कहा…

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 25/08/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

Vaanbhatt ने कहा…

meri tippani spam ke havale...

अजय कुमार ने कहा…

vikas kee keemat chukaa rahe hain ham

Reena Maurya ने कहा…

विचारणीय रचना..
चलो पेड़ लगाये
चिडियों को बुलाये..
:-)

sangita ने कहा…

संवेदनशील, विचारणीय रचना |

Bharat Bhushan ने कहा…

वो चिड़ियाएँ अब रूठ गई हैं. नहीं लौटेंगी शहर के वातावरण में.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

इंसान ने अपने स्वार्थ की खातिर परिंदों को भी नहीं बख्शा .... मार्मिक प्रस्तुति

shashi purwar ने कहा…

sahi kaha aapne aaj wah hoojom dekhne ko najre taras gayi hamen hi manana hoga

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया



सादर

Rewa ने कहा…

apki rachna soochne par majboor karti hai....

Ankur jain ने कहा…

सुंदर और काफी मासूम रचना।

अरुन शर्मा ने कहा…

वाह खुबसूरत अति सुन्दर बधाई
(अरुन =arunsblog.in)

Sunil Kumar ने कहा…

संवेदनशील, विचारणीय रचना ......

प्रेम सरोवर ने कहा…

पोस्ट बहुत अच्छा लगा । धन्यवाद ।