मंगलवार, 20 नवंबर 2012

चाहत




बीते पलों को याद कर
जरा तुम मुस्कुरा लेना
तेरे साथ ही हूं मैं सदा
एहसास यही बस कर लेना।

मेरी जिन्दगी में आना भी
तेरा हुआ कुछ इस तरह से
बाद पतझड़ के ज्यूं
छुप के बसंत का आना ।

जुबां से कोई कुछ भी कहे
उस पर न यकीन करना
सजा रखा है दिल ने
बस तेरा आशियाना।

सागर है कितना गहरा
इससे न हैं हम वाकिफ़
तेरी नजरों में जब से डूबे
मुश्किल उबर भी पाना।

दिल की तो हर धड़कन
मेरी सांसों का शरमाया
जाना तुझी से हमने
जिन्दगी को यूं जी लेना।

दुआ रब से यही है मेरी
बस इतना करम तू करना
निकले जनाजा मेरा
मेरी मांग फ़िर से भरना।
   0000
पूनम



23 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

अच्छी रचना
सुंदर

Vinay Prajapati ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

आखिर क्यों नहीं पहुँचती हमारी पोस्ट गूगल सर्च तक?

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत सुन्दर अच्छी रचना,

कसम जनाजे पे मेरे आने की खाते है ग़ालिब
हमेशा खाते थे जो मेरी जान की कसम आगे."ग़ालिब"

recent post...: अपने साये में जीने दो.

madhu singh ने कहा…

bahut umda..... kabile tarif

शालिनी कौशिक ने कहा…

.शानदार अभिव्यक्ति बधाई

expression ने कहा…

वाह...
बहुत सुन्दर...रूमानी कविता..

अनु

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ी ही गहरी और प्रभावी रचना..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

"अनंत" अरुन शर्मा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
अरुन शर्मा - www.arunsblog.in

आशा बिष्ट ने कहा…

सागर है कितना गहरा इससे न हैं हम वाकिफ़ तेरी नजरों में जब से डूबे मुश्किल उबर भी पाना। ..kya kahne bahut khoob..

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना.......

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर चाहत .... अच्छी प्रस्तुति



आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 22 - 11 -2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में ....
अधूरे सपने- अधूरी चाहतें!!.........कभी कभी यूँ भी .... आज की नयी पुरानी हलचल में ....संगीता स्वरूप

. .

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

वाह !

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

दीर्घतमा ने कहा…

पूनम जी नमस्ते
बहुत सुन्दर कबिता आप अभूत अच्छी कबिता करती है अधिक प्रसंसा करने पर भगवन करे की आपको अहंकार न आये.
धन्यवाद

आनन्द विक्रम त्रिपाठी ने कहा…

खूबसूरत रचना पूनम जी ।

राकेश कौशिक ने कहा…

बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आया और बढ़िया रचना पढ़कर आना सार्थक हुआ

Anupama Tripathi ने कहा…

बहुत गहरी बात ...बहुत सुंदर रचना ....शुभकामनायें ...

aparna ने कहा…

punam....
wah kya bat kahi hai.antim pankti to bahut hi sundar lagi.

कविता रावत ने कहा…

बीते लम्हों की सुन्दर प्रस्तुति ..

Apanatva ने कहा…

poonam kaisee ho ?
mera to man bharee kar gayee ye panktiya.......pad kar...
Aabhasee duniya se ek arase se mai sampark me nahee
rah payee.

Ateet kee yade v accha sath bhavishy kee rah ko sugam bana deta hai....

apna dhyaan rakhana.

प्रेम सरोवर ने कहा…

उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई। मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

http://www.parikalpnaa.com/2012/12/blog-post_6786.html