गुरुवार, 13 नवंबर 2014

फ़रियाद

काली कोट में लाल गुलाब,
चाचा तुमको करते याद,
बाल दिवस हम संग मनायें,
बस इतनी सुन लो फ़रियाद।

बचपन क्यों अब रूठा रहता,
हर बच्चा क्यों रोता रहता,
आओ चाचा नेहरू आओ,
सारे जहां को तुम बतलाओ।

खेल खिलौने साथ छीन कर,
क्यूं सब हमें रुलाते हैं,
भारी बस्तों और किताबों,
में हमको उलझाते हैं।

क्या हमने कुछ गलत किया है,
जिसकी हमको सजा मिली है,
प्यारे थे सब बच्चे तुमको,
सुन लो इनकी ये फ़रियाद।

आओ चाचा नेहरू आओ,
जन्म दिवस हम संग मनाओ।
000

पूनम श्रीवास्तव

8 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

Sunder Balgeet

Kavita Rawat ने कहा…

बाल दिवस पर चाचा नेहरू को याद कर वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए सार्थक प्रस्तुति ..
बाल दिवस की शुभकामनायें!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (15-11-2014) को "मासूम किलकारी" {चर्चा - 1798} पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
बालदिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....बहुत दिनों के बाद आपके पोस्ट पर आया हूं।

sunita agarwal ने कहा…

खेल खिलौने साथ छीन कर,
क्यूं सब हमें रुलाते हैं,
भारी बस्तों और किताबों,
में हमको उलझाते हैं।
sahi swal hai ..aaj ki siksha pranali ne bachcho ka bachapan chhin liya hai umda rachna

Neetu Singhal ने कहा…

इसको खा के तो अग्नि देव का भी पेट ख़राब हो गया होगा....

Neetu Singhal ने कहा…

इसको खा के तो अग्नि देव का भी पेट ख़राब हो गया होगा....

abhishek shukla ने कहा…

सुंदर