जख्म जाने कब के भर गए होते
यदि बार बार उनको कुरेदा न जाता।
बात बनती हुयी यूँ बिगड़ती नहीं
यदि बार बार उसको बढाया न जाता।
गैरों से अपनेपन का एहसास ही न होता
यदि बार बार अपनों ने ठुकराया न होता।
हंसती हुयी जिंदगी यूँ वीरान न होती
यदि बार बार उसको रुलाया न जाता।
विरहन की आस यूँ ही न टूटती
यदि बार बार उसको भरमाया न जाता।
कसौटी पर जिंदगी के खरा उतरता न कोई
यदि बार बार उसको आजमाया न जाता।
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पूनम
यदि बार बार उनको कुरेदा न जाता।
बात बनती हुयी यूँ बिगड़ती नहीं
यदि बार बार उसको बढाया न जाता।
गैरों से अपनेपन का एहसास ही न होता
यदि बार बार अपनों ने ठुकराया न होता।
हंसती हुयी जिंदगी यूँ वीरान न होती
यदि बार बार उसको रुलाया न जाता।
विरहन की आस यूँ ही न टूटती
यदि बार बार उसको भरमाया न जाता।
कसौटी पर जिंदगी के खरा उतरता न कोई
यदि बार बार उसको आजमाया न जाता।
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पूनम