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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

आज मैं कविताओं से अलग हट कर अपनी एक बाल कहानी प्रकाशित कर रही हूं। आप भी इसका आनन्द उठाइये।

चित्रात्मक-- कहानी

गिल्लू गिलहरी


गोल मटोल गिल्लू गिलहरी सभी को बहुत प्यारी थी।उसके शरीर पर पड़ी लम्बी धारियां और उसकी लम्बी सी पूंछ देखते ही बनती थीं।वह रोहन के बगीचे में एक पेड़ के कोटर में रहती थी।

रोहन को जब भी मौका मिलता वह उसके पास पहुंच जाता।गिल्लू को आवाज देता तो वह झट से पेड़ से उतर कर आती। और रोहन के चारों ओर चक्कर काटने लगती।

रोहन गिल्लू का सबसे अच्छा दोस्त था।रोहन से गिल्लू जरा भी नहीं डरती थी।वह रोहन की हथेलियों से दाने उठा कर इत्मिनान से कुतरती।और रोहन भी उसे उठा कर प्यार से सहलाता।

एक बार रोहन बीमार पड़ गया।डाक्टर ने उसे बिस्तर से उठने के लिये मना कर दिया।जब दो तीन दिनों तक वह बगीचे में नहीं आया तो गिल्लू परेशान हो गई।वह बार बार पेड़ से उतरती और रोहन के घर के दरवाजे की तरफ़ देखती।फ़िर दुखी होकर वापस पेड़ पर चढ़ जाती।

एक दिन वह बहुत हिम्मत करके रोहन के घर में जा घुसी।वह सीधे रोहन के बिस्तर पर चढ़ गयी। रोहन उसे देखकर बहुत खुश हुआ।वह भी अपनी दोस्त से मिलने के लिये परेशान था।

डाक्टर के इलाज से रोहन की तबीयत सुधरने लगी थी।गिल्लू भी अपने दोस्त का बहुत ध्यान रखती।जब रोहन आराम करता तो वह भी अपने कोटर में चली जाती। रोहन के जागने पर वह अपनी पूंछ हिलाती आती और झट उसके बिस्तर में घुस जाती। फ़िर खूब उछल कूद मचाती।गिल्लू की प्यारी हरकतों से रोहन के मम्मी पापा भी हंसते हंसते लोट पोट हो जाते।

आज रोहन स्कूल जाने लगा तो उसने देखा गिल्लू भी बहुत खुश नजर आ रही थी।उसने आंखें मटका कर रोहन को बाय किया।रोहन हाथ हिलाता अपने स्कूल की तरफ़ बढ़ गया।

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पूनम श्रीवास्तव

सोमवार, 10 अगस्त 2009

बालगीत


आज मैं अपना एक बालगीत प्रकाशित कर रही हूं।

वैसे आप लोग मेरे अन्य बालगीत फ़ुलबगिया ब्लाग

पर पढ़ सकते हैं।

नाना जी की मूँछ

नाना जी की मूँछ
जैसे गिलहरी जी की पूंछ
अकड़ी रहती हरदम ऐसे
जैसे कोई रस्सी गयी हो सूख।
नाना जी मूँछों पर अपनी
हरदम देते ताव
पहलवान जी जैसे कोई
जीत गए हों दाँव।
कभी दाई मूँछ तो कभी बांई फ़ड़कती
कभी ऊपर उठती कभी नीचे गिरती
दरोगा की मूँछ भी
उनके आगे पानी भरती ।
नाना जी की मूँछ हरदम
ऐंठन में ही रहती
शान न गिरने पाए कभी
हरदम कोशिश करती ।
नाना जी की मूँछ की
गली गाँव में पूछ
फ़ेल हो गई उनके आगे
नत्थू राम की मूँछ ।
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पूनम