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बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

उम्मीदें


दिल में तूफ़ानों का सैलाब है मगर
फ़िर भी होठों पर हसीं-मुस्कान लिये हैं।

नाव मझधार में फ़ंसी है मगर
फ़िर भी उम्मीदों की पतवार लिये हैं।

शरीर थक रहा है धीरे धीरे मगर
फ़िर भी अरमानों का आगाज लिये हैं।

भीगी भीगी आंखों से देख रही राह मगर
फ़िर भी वो आएगा या नहीं इंतजार लिये हैं।
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पूनम





रविवार, 13 जनवरी 2013

यादों का सिलसिला


यादों का सिलसिला चलता है साथ साथ
यादों के साए से निकलना बड़ा मुश्किल।

गुजरता है जमाना गुजर जाते हैं लोग
बिखर जाता परिवार समेटना बड़ा मुश्किल।

कहते हैं वक्त हर मर्ज का इलाज पर
छोड़ गये हैं जो निशान उसे मिटाना बड़ा मुश्किल।

बीते हुये लम्हों का रहता ना हिसाब
फ़िर से जवाब पाना होता बड़ा मुश्किल।

ये समझना और समझाना होता नहीं आसान
जिन्दगी बख्शी जिसने उसी को समझाना बड़ा मुश्किल।

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पूनम