शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009

बात


बात ही बात में,बात शुरू होती है,
बात ही बात में,बात निकल जाती है,
बात ही बात में, सुबह हो जाती है,
बात ही बात में,शाम हो जाती है।

बात ही बात में,सवाल हो जाता है,
बात ही बात में, बवाल हो जाता है,
बात ही बात में, सैलाब बह जाता है,
बात ही बात में, हिसाब हो जाता है।

बात ही बात में,अंदाज बदल जाते हैं,
बात ही बात में,अल्फाज बदल जाते हैं,
बात ही बात में ,बात छुपी होती है,
बात ही बात में,राज खुल जाते हैं.

बात ही बात में,ईमान बदल जाता है,
बात ही बात में,इन्सान बदल जाता है,
बात ही बात में,बात बन जाती है,
बात ही बात में,बात बिगड़ जाती है।

बात ही बात में,क्या बात करें बात की,
बात ही बात में, इतिहास बदल जाता है।
०००००००००००००
पूनम

10 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा ने कहा…

aur baaton -baaton mein itni achhi rachna likhi jaati hai......

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आज के माहौल में, बस बात ही तो बात है।
बात में ही प्रेम है, और बात में आघात है।।

आपने बात के चत्कार को उजागर कर दिया है।
बधाई।

shyam kori 'uday' ने कहा…

बात ही बात में,ईमान बदल जाता है,
बात ही बात में,इन्सान बदल जाता है,
.... bahuta hee sundar rachanaa.

k ने कहा…

पूनम जी ,
आज पहली बार आपका ब्लॉग पढ़ा और लगा की अज ही पूरा ब्लॉग पढ़ डालूँ.बहुत अच्छी रचनाएँ हैं .जितनी भी तारीफ की जाया कम है.
काकू

sanjay vyas ने कहा…

बात निकली है तो दूर तलक जायेगी. बधाई.

Kavi Kulwant ने कहा…

very nice.. congrats..

k ने कहा…

बात ही बात में क्या बात कही है
आपकी बात की हर बात सही है .
काकू

Dr.Bhawna ने कहा…

अच्छी रचना लिखी आपने ...बधाई...

परमजीत बाली ने कहा…

बढिया रचना लिखी है

sangeeta ने कहा…

वाह, क्या बात है, बहुत खूब