शनिवार, 5 सितंबर 2009

ख्वाब देखो जरूर-----


ख्वाब देखो तो जरूर पर इतना देखो
तुम्हारे पांवों को ढंक सके चादर इतना तो देखो।

अपने से ऊपर देखो तो जरूर पर इतना देखो
तुमसे नीचे भी कोई है इतना तो देखो।

एक चींटी भी कोशिश से चढ़ती है पहाड़ इतना देखो
कुछ पाने के लिये हिम्मत है जरूरी इतना तो देखो।

अच्छा बीज ही बनता बेहतर पौधा इतना देखो
अच्छे कर्मों से ही होता है बड़ा इन्सां इतना तो देखो।

यदि चाहत है तो उंचाई तक पहुंचोगे जरूर इतना तो देखो
पांव टिके हैं जमीं पर कितने इतना तो देखो।

एक माचिस की लौ भी दूर करती है अंधेरा इतना तो देखो
बन के देश के दीपक रौशनी दे सकते सबको इतना तो देखो।
********
पूनम

24 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर रचना !!

Mithilesh dubey ने कहा…

वाह बहुत खुब, बेहद भाव पुर्ण रचना। बधाई

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया भाव!

M VERMA ने कहा…

अपने से ऊपर देखो तो जरूर पर इतना देखो
तुमसे नीचे भी कोई है इतना तो देखो।
बेहतरीन भाव -- बेहतरीन अभिव्यक्ति

हेमन्त कुमार ने कहा…

बेहतर । आभार।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

पूनम जी।
सुन्दर भावों से सजी रचना के लिए बधाई!

mehek ने कहा…

sunder bhav se bani sunder rachana,bahut khub

Vivek Rastogi ने कहा…

बहुत अच्छी रचना और भाव बधाई आपको।

ओम आर्य ने कहा…

सुन्दर विचारो से भारी पडी है आपकी कविता.....जो जीवन को सफलता की पाठ पढा रही है .......बेहद खुब्सूरत रचना के लिये बहुत बहुत बधाई.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आशा और विशवास भरती सुन्दर रचना ...........

अल्पना वर्मा ने कहा…

यदि चाहत है तो उंचाई तक पहुंचोगे जरूर इतना तो देखो
पांव टिके हैं जमीं पर कितने इतना तो देखो।
waah waah!

bahut khoob Poonam ji,

is gazal ka to har sher hi ek seekh aur hosla deta hua hai..

Sakaratmak bhaav liye hue bahut achchee rachna.

अनिल कान्त : ने कहा…

aap bahut bhavpoorn likhti hain

Priya ने कहा…

ek lucknowites ki tippadi pakar achcha laga.....aur aapki rachna wakai jaandaar hai

लता 'हया' ने कहा…

shukria.u r welcomed ,aati rahiye,aapki dhroharon ki pukaar sunene yogya hai.har har hinustaani ke liye.

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने और साथ में तस्वीर भी बहुत सुंदर है!
मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है -
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अपने से ऊपर देखो तो जरूर पर इतना देखो
तुमसे नीचे भी कोई है इतना तो देखो।

पूनम जी बहुत सारगर्भित रचना है...मेरी बधाई स्वीकार करें

नीरज

महफूज़ अली ने कहा…

ख्वाब देखो तो जरूर पर इतना देखो
तुम्हारे पांवों को ढंक सके चादर इतना तो देखो।

pahli pankti ne hi speechless kar diya......

Ultimate kavita hai aapki.......

sangeeta ने कहा…

bahut khoobsurat abhivyakti....prernadaayak rachna...badhai

Apanatva ने कहा…

बहुत ही प्रेरक रचना |

Apanatva ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
मीनू खरे ने कहा…

यदि चाहत है तो उंचाई तक पहुंचोगे जरूर इतना तो देखो
पांव टिके हैं जमीं पर कितने इतना तो देखो।

बहुत ही सुन्दर लिखा है पूनम जी. हर शेर खूबसूरत बना पड़ा है. बधाई.

Basanta ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव!

गर्दूं-गाफिल ने कहा…

अपने से ऊपर देखो तो जरूर पर इतना देखो
तुमसे नीचे भी कोई है इतना तो देखो।

karuna aur santulan

एक माचिस की लौ भी दूर करती है अंधेरा इतना तो देखो
बन के देश के दीपक रौशनी दे सकते सबको इतना तो
desh bhaktee ke zazbe ko salam

Jogi ने कहा…

waah ...bahut hi achha likha aapne..