शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

गीत---अजनबी शहर में


इस शहर में हम अजनबी हैं
जाने पहचाने से चेहरे हैं फ़िर भी
हर पल में लगता ये और ही कोई है।
इस शहर में-----------------।

बेमतलब यहां पे तो कुछ भी नहीं है
ऐसा हो शायद ही इन्सान कोई
यहां जो मतलबी नहीं है
इस शहर में-------------------।

है खून का रिश्ता जिससे भी जिसका
वक्त पड़ने पे देखा
बदल रक्त की रंगत ही गई है।
इस शहर में ----------------।

दुश्मनी होती नहीं किससे किसीकी
खुरच दे उसे जिल्द पुरानी समझ के
फ़िर चढ़ा दे कवर दोस्ती की नई सी।
इस शहर में ---------------------।

जाना पहचाना या हो वो बेगाना
पहले हम इन्सां हैं
फ़िर हम कोई हैं
इस शहर में -------------------।

कभी झांक कर देखो औरों के दिल में
उनमें जो है वो हमारे में भी
क्या लगता है फ़र्क थोड़ा भी कोई है
इस शहर में ---------------।

रंजो सितम से ये दुनिया भरी है
है जीना इसी में और मरना यहीं है
आपस में फ़िर क्यूं यूं ही ठनी है
इस शहर में ---------------।

शहर में ही जब अपने हम अजनबी हैं
तो दुनिया तो फ़िर भी बहुत ही बड़ी है
फ़िर भी हम क्यों अजनबी हैं।
इस शहर में ---------------।
00000000
पूनम



24 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

bahut hi sundar rachana hai .....badhayi

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

लेखनी प्रभावित करती है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…
लेखनी प्रभावित करती है.

संजय तिवारी ’संजू’ जी।
आपको सभी की लेखनी प्रभावित करती है.

मगर मुझे पूनम जी का गीत बहुत अच्छा लगा।
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

विपिन बिहारी गोयल ने कहा…

दुश्मनी होती नहीं किससे किसीकी
खुरच दे उसे जिल्द पुरानी समझ के
फ़िर चढ़ा दे कवर दोस्ती की नई सी।


एकदम सही कहा आपने

Udan Tashtari ने कहा…

आभार पूनम जी के इस बेहतरीन गीत को पढ़वाने के लिए.

Udan Tashtari ने कहा…

पूनम जी को आभार पूनम जी को ही पढ़वाने के लिए. :)

vikram7 ने कहा…

रंजो सितम से ये दुनिया भरी है
है जीना इसी में और मरना यहीं है
आपस में फ़िर क्यूं यूं ही ठनी है
इस शहर में ---------------
सुन्दर गीत

दिगम्बर नासवा ने कहा…

SUNDAR GEET HAI .... INSAAN SAB KE HOTE HUVE BHI AJNABI HO JAATA HAI ..... SUNDAR RACHNA........

Mithilesh dubey ने कहा…

क्या बात है बहुत खुब। गजब की अभिव्यक्ति दिखी आपकी इस रचना में। बधाई

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बहुत ही सरल,भावभीनी रचना

sangeeta ने कहा…

स्वार्थपरता पर खूबसूरती से लिखा है
,,बधाई

हेमन्त कुमार ने कहा…

है खून का रिश्ता जिससे भी जिसका
वक्त पड़ने पे देखा
बदल रक्त की रंगत ही गई है।
इस शहर में......।
बेहतरीन । आभार ।

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

दिल में उतर गयी आपकी सुन्दर रचना

sandhyagupta ने कहा…

Shayad phir gaon ka rukh karne ki jarurat hai,wapas lautne ki jarurat hai.Shubkamnayen.

Apanatva ने कहा…

तहे दिल तक पहुचे ऐसा लिखती है आप |

Apanatva ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना....बेहतरीन गीत को पढ़वाने के लिए बहुत बहुत बधाई....

अल्पना वर्मा ने कहा…

मतलबपरस्त दुनिया को आईना दिखाती एक अच्छी रचना.
सोचती हूँ पूनम जी,यही हाल रहा तो अगली पीढी कैसी दुनिया देखेगी..क्या शब्दकोश में सहयोग,प्रेम ,रिश्तों के अर्थ बदल जायेंगे?

नीरज गोस्वामी ने कहा…

दुश्मनी होती नहीं किससे किसीकी
खुरच दे उसे जिल्द पुरानी समझ के
फ़िर चढ़ा दे कवर दोस्ती की नई सी।

बहुत ही अच्छी रचना...बधाई स्वीकार करें
नीरज

Babli ने कहा…

इस लाजवाब और बेहतरीन रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ !

ज्योति सिंह ने कहा…

haqeekat se judi hui ,wakai achchhi rachana hai .

Sujata ने कहा…

Beautiful!

मीनू खरे ने कहा…

बहुत अच्छी रचना बन पड़ी है पूनम जी.

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com