गुरुवार, 17 जून 2010

सन्देशा----


जा री प्यारी हवा तू जा

बादल से तू पूछ के आना

धरती पर कब बरसेगा वो

जल्दी से आ के बतलाना।

धीरे धीरे मत जाना तुम

सर्र सर्र करती उड़ जाना

इधर उधर मत राह भटकना

बात बता के जल्दी आना।

प्यार से कहना बादल भइया

प्यासी धरती तड़प रही

सूरज भी है आग उगलता

कब तक है उसको सहना।

खेत गांव सब सूख रहे

किसानों के चेहरे मुरझाये

पशु पक्षी भी प्यासे प्यासे

भूले वो भी चहचहाना।

विनती करना तुम बादल से

सूरज को समझा दे जरा

इतनी अकड़ भी ठीक नहीं

कि हद से ज्यादा गुजर जाना।

रिमझिम बारिश की फ़ुहारें

जब सूरज को भिगोयेंगी

भीज उठेगा उसका तन मन

प्यार से उसको समझाना।

प्यार ही एक ऐसी भाषा

जिसे पशु पक्षी भी समझते हैं

बादल के संग सूरज को भी तुम

प्यार की झिड़की दे आना।

फ़िर देखो कैसे नहीं छायेंगी

बादल की घनघोर घटाएं

सूरज भी अपना रुख बदलेगा

जब छेड़ेगी बारिश अपना तराना।

भूल ना जाना उनको तुम

धन्यवाद देती आना

इंतजार बेसब्री से तुम्हारा

समाचार शुभ ले आना।

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पूनम

37 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

प्यार ही एक ऐसी भाषा
जिसे पशु पक्षी भी समझते हैं
वाकई इस भाषा के आगे सबको नतमस्तक होना पड़ता है.
सुन्दर रचना

निर्मला कपिला ने कहा…

प्यार भरा सुन्दर सन्देश जरूर हवा पहुँचा देगी।प्रकृ्ति मे ही शक्ति है इस प्रेम को समझने की। सुन्दर कविता के लिये बधाई

दीर्घतमा ने कहा…

pyar ki bhasha se hawawo ne sandesha diya ,fir kya tha aaj pani barshana shuru ho gaya.
mausham suhana ho gaya.
bahut sundar kabita .
samyanukul

महफूज़ अली ने कहा…

आहा! सुबह सुबह कितनी अच्छी कविता पढने को मिली है..... बहुत सुंदर सन्देश के साथ .... यह कविता बहुत अच्छी लगी..... अभी सो कर उठा था..... रिफ्रेश हो गया.... बहुत अच्छी कविता.....

गुड मॉर्निंग....

श्यामल सुमन ने कहा…

समसामयिक और एक सन्दर संदेश देती रचना पूनम जी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

sanjukranti ने कहा…

इतनी अकड़ भी ठीक नहीं ही हद से ज्यादा गुजर जाना... मजेदार
जैसे बच्चे आपस में झगड़ रहे हो....

दिलीप ने कहा…

waah bahut sundar..

उम्मेद ने कहा…

बेहतरीन कविता ...प्रकृति का मानवीकरण, प्यासी धरती, बैचेन किसान और सूरज की अकङ का प्रभावी चित्र प्रस्तुत किया है आपने,शुभकामनाएं।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्यारा सन्देश भेजती सी सुन्दर रचना...

Udan Tashtari ने कहा…

वाह..बहुत प्यारी सी रचना!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रकृति का सोंधा चित्रण ।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

barish ka pyar bhara samjhana bha gaya hame........:)

sundar abhivyakti........:)

kunwarji's ने कहा…

सुन्दर रचना...

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

सुंदर संदेश !
बधाई !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

प्यारा सा संदेश ... बरखा रानी ज़रूर आएगी ...

PASHA ने कहा…

Garmi me pyase ki aas kya...paani,
tan-man bhigota sapana kya...paani,
man ki jo hai lagan vo kya...paani

basarat survaati daur me yeh man me baarish ki fuhaare barasaa gayi

laajawaab hai.... shabd nahi hai

Apanatva ने कहा…

barsaat ka nimantrn lajawab raha...

रचना दीक्षित ने कहा…

वाह !कितनी मनभावन कविता

Amitraghat ने कहा…

बहुत सुन्दर......

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता को पढ़कर एक भावनात्मक राहत मिलती है।

देवेश प्रताप ने कहा…

वाह !!! ...लाजवाब कविता .

Maria Mcclain ने कहा…

nice post, i think u must try this website to increase traffic. have a nice day !!!

अजय कुमार ने कहा…

आपके संदेश का असर हो गया ,मुम्बई में बारिश शुरू हो गई है ।

सुशीला पुरी ने कहा…

इतनी मनुहार !!!!!!और वो भी हवारानी से ! बहुत खूब ....., सचमुच धरती को पल पल इंतजार है प्यारे बादलों का ।

mehek ने कहा…

sunder pyari si kavita,badhai.

Usha Giri ने कहा…

प्रतीक्षा हो तो ऐसी , थोड़ी बारिश , थोड़ी बूंद , थोड़ी हवा.... प्रकृति के बेहद करीब॥

Razi Shahab ने कहा…

nice poetry

Mukesh K. Agrawal ने कहा…

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ है माता जी....

मेरे ब्लॉग पर उत्साहवर्धन करने का बहुत बहुत धन्यवाद

rashmi ravija ने कहा…

प्यार ही एक ऐसी भाषा जिसे पशु पक्षी भी समझते हैं
बादल के संग सूरज को भी तुम प्यार की झिड़की दे आना।
फ़िर देखो कैसे नहीं छायेंगी बादल की घनघोर घटाएं
सूरज भी अपना रुख बदलेगा जब छेड़ेगी बारिश अपना तराना।
बेहद ख़ूबसूरत रचना...एकदम प्यार भरी बदली जैसी...

Dev ने कहा…

Bahut Sundar Kavita and really very nice..Regards

The Lines Tells The Story of Life....Discover Yourself

RAJWANT RAJ ने कहा…

koi lglpet nhi ,chhote chhote shbd srl bhasha ,prakritik shjta liye huye is atisunder prstuti ke liye bhut bhut bdhai .

usharai ने कहा…

प्यार की झिड़की दे आना।!!
इतनी सुंदर प्यार की झिडकी सुन कर कौन नहीं आ जायेगा !! आह्किर कालिदास ने भी तो मेघ को प्यार की भाषा से ही अपना दूत बनाया था ! मन को मोहती है आपकी सहज सरल अभिव्यक्ति ! धन्यवाद !

Shayar Ashok ने कहा…

बहुत प्यारी और दिल को
सुकून देने वाली रचना ||
बहुत खूब !!

Asha ने कहा…

बहुत भाव पूर्ण कविता | बधाई
आशा

आशीष/ ASHISH ने कहा…

पूनम जी,
नमस्ते!
आम आदमी की भाषा में आम आदमी के दिल की बात!
अब तो बरसो............
टूट के बरसे इस बार पानी!
बह जाएँ उसमें सभी यादें पुरानी!
कुछ ऐसा बदले मेरे मन का मौसम!
लिख ही डालूँ कोई नयी कहानी!

S.M.Vaygankar ने कहा…

bahot hi badhiya rachana hai,
lagata hai shayad aapki rachana sunkar hi baarish aab aakhir aa gayee!
Thanks to you!

Maria Mcclain ने कहा…

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