शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

आया सावन


सावन में बदरा बरसे

घनन घनन घन घन

बगिया में फ़ुलवा गमके

भीजे तन और मन

प्रियतम प्रियतम फ़िर बोले

दिल का ये आंगन।

पेड़ों पर पड़ गये झूले

सखियां लगी झूलन

पेंग पे पेंग बढ़ावें जैसे

छूलें नील गगन

खिलखिलाती ऐसी जैसे

बातें करें पवन।

भौंरे भी झूमन लगे

पी के फ़ूल परागण

जिन फ़ूलन पर जा बैठे

वो फ़ूल हुये मगन

इतराये वो ऐसे जैसे

बचपन में अल्हड़पन।

जूड़न में गजरे सज गये

खुशबू लिये चमेलन

काले कजरों से भर गये

खंजन जैसे नयन

रंग बिरंगी चूड़ियों संग

सजे हाथ कंगन।

पांवों में बिछुआ सोहे

बाजे संग पाजन

लगा महावर पैरों में

इतराये गोरी मन मन

सजा के टिकुली माथे पे

सखी बनी दुल्हन।

सावन तो होवे ही ऐसे

हो जाये सभी मगन

सजनी को झूला झुलाये साजन

जैसे राधा किशन

सखियन संग मन मेरा भी गाये

जल्दी आना सजन।

000

पूनम

41 टिप्‍पणियां:

राजेश उत्‍साही ने कहा…

पूनम जी आपकी यह कविता पढ़कर तो मुझे बचपन में सुना एक गीत याद आ गया। इसे लड़कियां झूला झूलते हुए गाती थीं।
कच्‍ची नीम की निबौरी सावन जल्‍दी अईयो रे।

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

आपके यहाँ सावन आया चलो अच्छी बात है लेकिन यहाँ बदल बस गरज गरज के चल देते हैं. और उमस बुरा हाल.

आपकी कविता बहुत अच्छी लगी.

राजेश उत्साही ने जिस गीत के बारे में लिखा उसे हम बचपन में सावन के झूलों में गाते थे. याद दिला दी.

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप की कविता की भाषा ने कविता मै चार चांद लगा दिये, बहुत सुंदर. धन्यवाद

दीर्घतमा ने कहा…

सुश्री पूनम जी
नमस्ते
झलुआ पड़ी कदम की दरी झूले कृष्ण मुरारी नाय,
आपने बचपन क़े सावन की याद दिला दी
इस वर्ष सुखा अकाल क़ा रूप धारण कर चुका है
आपकी की कबिता दिल को छूने वाली है
बहुत मार्मिक लगा
धन्यवाद.

दीर्घतमा ने कहा…

सुश्री पूनम जी
नमस्ते
झलुआ पड़ी कदम की दरी झूले कृष्ण मुरारी नाय,
आपने बचपन क़े सावन की याद दिला दी
इस वर्ष सुखा अकाल क़ा रूप धारण कर चुका है
आपकी की कबिता दिल को छूने वाली है
बहुत मार्मिक लगा
धन्यवाद.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत सावन का गीत

Apanatva ने कहा…

bada hee pyara sravan maas kee mahimaa batata pyara manbhavan geet .........

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जीवन की छोटी छोटी बातों को कितने करीने से पिरोकर सुन्दर सी कविता बनायी है।

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता की अलग मुद्रा है, अलग तरह का संगीत, जिसमें कविता की लय तानपुरा की तरह लगातार बजती रहती है। अद्भुत मुग्ध करने वाली, विस्मयकारी।

संजय भास्कर ने कहा…

भाषा ने कविता मै चार चांद लगा दिये, बहुत सुंदर. धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बेहतरीन!

Shekhar Suman ने कहा…

baarish ki rimjhim boondon ki bhawon se sarobar kavita....
behtareen....

देवेश प्रताप ने कहा…

इस सावन के गीत ने मन को झुमा दिया .....बहुत सुन्दर रचना .

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

puri barish ka naraja aapke panne pe dikh gaya.......:)

bahut khubsurat prastuti.......

Meenu Khare ने कहा…

कविता बहुत अच्छी लगी.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

saawan kee aai bahar re ..... haath thaamker babul kee dehree to yaad karen

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…


सावन का मनभावन चित्रण।

…………..
प्रेतों के बीच घिरी अकेली लड़की।
साइंस ब्लॉगिंग पर 5 दिवसीय कार्यशाला।

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर सावन चित्र प्रस्तुत कर दिया आपने। बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत ही मनभावन रचना..... अति-सुंदर...

hem pandey ने कहा…

सुन्दर गीत .

रचना दीक्षित ने कहा…

अपने इस तरह से प्रियतम को बुलाया की दिल्ली में सावन आ ही गया बहुत सुन्दर प्यार और दुलार भरी बचपन की यादें

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

बेचैन आत्मा ने कहा…

सावन के महीने में धरती पर पानी भले ही कम बरस रहा हो, ब्लॉग जगत अपनी मस्ती में रोज झूम रहा है.
..सुंदर गीत के लिए बधाई.

अभिन्न ने कहा…

बेकार हो जाता यह सावन का मास इस बार अगर आपकी यह रचना नहीं होती
श्रींगार रस से परिपूर्ण आपकी यह कविता अत्यंत सुन्दर ओर सराहनीय है कमाल की पंक्तियाँ बन पड़ी हैं
.......
जूड़न में गजरे सज गये खुशबू लिये चमेलन
काले कजरों से भर गये खंजन जैसे नयन
रंग बिरंगी चूड़ियों संग सजे हाथ कंगन।
पांवों में बिछुआ सोहे बाजे संग पाजन
लगा महावर पैरों में इतराये गोरी मन
मन सजा के टिकुली माथे पे सखी बनी दुल्हन।

RAJ SINH ने कहा…

आजकल तो सावन , झूले सब भुला दिए गए लेकिन हमारे जैसों को तो आपकी यह सावनी फुहार सराबोर कर गयी .

सरलतम शब्दों का चयन और गहरी अनुभूति संवारती रचना जिसमे परम्पराओं की महक छुपी है .
सुन्दर और सजीव पुलक भी .

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा है आपने ! उम्दा प्रस्तुती!
मित्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ!

Shayar Ashok ने कहा…

इस सावन के गीत ने मन मोह लिया ||
बहुत खुबसूरत , रचना ||

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

shaandaar aur bhaavuk rachna
sawan ke jhoollo de bahut kuchh yaad aa gaya........
dil ke gahrayio me utarne wali prastuti

Deepak Shukla ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Deepak Shukla ने कहा…

Hi..

Kavita ke mradu bolon se hi..
Aise bheege apne tan-man..
Jyon barkha barasi ho rim-jhim..
Bhavon ka aaya ho sawan..

Gori ke hathon main chudi..
Khankaye shabdon ke kangan..
Hruday ko aisa lagta jaise..
Hota ho meetha sa spandan..

Yaad hame bhi koi aaya..
Jab jab bhi sawan hai aaya..
Man ke har kone bhi aise..
Mahak uthe jaise ho upvan..

Jab jab kare badra chhaye..
Beete din sab yaad ho aaye..
Bagon main jhule ki peengon..
Sang lahrata kisi ka daaman..

Man ka mor utha hai naach..
Sawan ki barkha main aaj..
Jitne madhur shabd kavita ke..
Utne sundar hain ahsaas..

Deepak..

आशीष/ ASHISH ने कहा…

आपको अच्छी लगती होगी बरसात! मुझे तो मुई एसिड रेन लगती है!
मूंह चिढाती है कम्बखत!
खैर, रचना तो अच्छी है ही!

अभिन्न ने कहा…

धन्यवाद,आदरणीय पूनम जी आप के ब्लॉग पर यह पढने को मिला की आप समाज,देश ओर दुनिया के लिए एक सोच रखती हो ओर अन्याय चाहे कहीं भी हो उसे बर्दाश्त नहीं कर सकती --यह एक अच्छे ओर सच्चे ह्रदय की पहचान है आपकी रचनाये बहुत ही प्रेरक है आपका सदैव स्वागत, जर्रानवाजी के लिए पुन: शुक्रिया

Parul ने कहा…

man ke jharokhe se ye sawan aur bhi naya lag raha hai :)

Shraddha ने कहा…

bahut pyari kavita !!

Shraddha ने कहा…

bahut pyari kavita !!

Voice of youths ने कहा…

It's really very good poem.I have no word to say.I came first time on your blog post.

Voice of youths ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Dr.Bhawna ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सखियन संग मन मेरा भी गाये
जल्दी आना सजन..

सावन में पी की याद तो आती है ... मान को सताती भी है .... बहुत मधुर रचना है सावन की फुहार जैसी ...

kamal jat ने कहा…

बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ लिखत हो
वेलडन पूनम जी

kamal jat ने कहा…

बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ लिखत हो
वेलडन पूनम जी