गुरुवार, 12 अगस्त 2010

एक रोमांचक मैच---


जी हां,आज मुझे एक रोमांचक मैच देखने को मिला। जिसे पढ़कर शायद आप भी हंसते हंसते लोट पोट हो जायेंगे। अब आप ये सोचेंगे कि जब मैच रोमांचक है तो फ़िर इसमें हंसने वाली बात कौन सी है?तो मैं आपको बताती हूं कि जो घटना मेरे साथ हुयी वह शायद किसी के साथ भी हो सकती है। ऐसा मैं भी महसूस कर रही हूं।

क्रिकेट मैच होने वाला था।पर अभी स्थान तय नहीं हो पाया था। एक दिन अचानक ही बैठे बैठे मेरी बेटी बोली-----मां मेढक।बस इतना सुनने के बाद मैं भी बैठे बैठे उछल पड़ी। अरे इतनी जल्दी मैच के स्थान का चुनाव कैसे हो गया। पर जब विपक्षी अचानक ही मैच फ़िक्सिंग करके मैदान में सामने आ गया हो तो फ़िर भला मैं कैसे पीछे रहती । अब जवाब तो देना ही था।

मैच शुरू हो गया। अम्पायर बेटी ने सीटी बजायी। और मैं हाथ में झाड़ू ले कर सामने आ गयी। पर ये क्या सामने वाला तो मुझसे भी तेज निकला। और वह और तेजी के साथ फ़टाफ़ट दौड़ा। मैं उसको आउट करने की कोशिश में झाड़ू लिये ----अरे अरे ये तो अंदर ही आ गया। झाड़ू इधर से उधर हिलाती रही। पर जनाब--- विपक्षी दल बहुत ही मजबूत था। जाने किस खतरनाक क्रिकेटर को फ़ील्ड में उतार दिया था।

पर मैं भी कहां हार मानने वाली थी। वो आगे कभी तो कभी मैं आगे---कभी वो बाल की तरह चौका मारकर और आगे बढ जाता जब तक मेरा झाड़ू रूपी बैट इधर उधर नाचता ही रह जाता।लगता था अब ये जीत कर ही रहेगा। मेरा भी दम फ़ूलने लगा। पर कहते हैं न कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। यही विचार कर पुनः दुगने जोश के साथ मैदाने जंग में पुनः हाजिर हो गयी।

फ़िर मैने चारों तरफ़ नज़र घुमाई कि बाल् को किस तरह से किक किया जा सकता है कि सीधे कैच आउट हो जाय। मैने अम्पायर बनी बेटी को इशारा किया बाल्टी लाओ!,वह भी फ़ाउल गेम कि तरह बाल्टी लेकर हाज़िर हो गयी।मैने जिधर जिधर से जनाबे आली का बाहर निकलने का रास्ता था उधर उधर से उनको झाडू रुपी बैट से धीरे धीरे भगाना शुरु किया।

कभी मेंढक जी बाल्टी के बिल्कुल पास आ जाते पर जैसे ही अम्पायर चिल्लाती वैसे ही जम्प लगाकर बैरंग लिफ़ाफ़े की तरह वापस हो जाते।मैं भी अरे-इधर गया लो उधर फ़िर चला गया,हटो वहां से ,जल्दी से दरवज़ा बन्द करो चिल्लाती हुई पूरी तरह प्रयास रत रही। और मेरे बच्चे दर्शक बन कर हंसते- हंसते बेदम हो रहे थे।आज़ मम्मी और एक मेंढक में जम कर जंग हो रही थी । उनकी खुद की सिट्टी-पिट्टी गुम थी पर इस रोमांचक मैच ने उनका हौसला बढा दिया था।

मेरा भी उत्साह बढा अब मेंढक महोदय को घर से बाहर निकालना जरुरी हो गया थ।आखिर मेरी भी इज्जत का सवाल जो था बच्चों के सामने। अपनी इमेज बरकरार रखनी थी।मैंने बाल्टी को उठा कर सीधे बाउन्ड्री वाल यानी अपने घर के इन्ट्रेंस पर रख दिया।।और फ़िर मेंढक महाशय को जो भगाना शुरु किया कि वो भी बेचारे उछ्ल उछ्ल कर शायद पस्त हो चले थे।उसके उछ्लने की गति धीमी पड गयी थी। उसमें फ़ुदकने की हिम्मत अब नहीं थी। वो भी उलटते पलटते नजर आने लगे। बच्चे चिल्लाये मम्मी जोर से-----अब इस तरफ़ से। मैनें भी उधर दृष्टिपात किया और एक जोर का सिक्सर मारा। बच्चों के मुंह से निकला---मम्मी,मेढक बाल्टी के अंदर आ गया। और मैं भी एक लम्बी सांस लेने को रुक गयी। आखिर लंच ब्रेक के बाद से बराबर मैच हो रहा था। अब तो उसका द एण्ड होना ही चाहिये।

बच्चे बाल्टी को हाथ लगाने से अभी भी कतरा रहे थे। क्योंकि जनाबे आली मेढक अभी भी उड़ान भरने की कोशिश कर रहे थे।कि शायद सीमा रेखा पार कर मैच जीत जायें। पर अब तो मैच का खात्मा लगभग हो ही चला था।पर असली रोमांच भरा दृश्य अभी बाकी था। मेढक को बाहर ले कैसे जाया जाय? वो तो अपना रंग बार बार दिखा रहे थे।

पर फ़िर मैंने लम्बी सांस लेने के बाद झाड़ू हाथ में लिया और बाल्टी को डरते डरते झाड़ू से ही बाहर करने लगी।बच्चे बोले मम्मी देख के---वो उछल कर बाहर आ जायेगा।पर मैंने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली थीं। ड़रते-डरते भी मैं अन्ततः उसको घर से बाहर मैदान में ले जाकर फ़ेंकने में कामयाब हो गयी। और बच्चे ताली बजाकर हंसते हंसते पेट को हाथ से दबाये बोले---मम्मी दि ग्रेट---।

तो था न ये रोमांचक मैच जो रोमांच के साथ भरपूर मनोरंजन भी कर गया। आपको कैसा लगा ये तो जरूर बताइयेगा---पर सच मानिये ये मैच फ़िक्सिंग नहीं था।एक हक़ीकत ये भी है कि आपका भी इनसे सामना यदा कदा जरुर पड़ता होगा।

000

पूनम

33 टिप्‍पणियां:

दीर्घतमा ने कहा…

पूनम जी पहले तो मै आपकी कबिता को पढ़कर कबिता पढने क़ा आदी हो गया ,लेकिन यह मैच तो आपने अद्भुत खेला आपकी बेटी ने भी अच्छी अम्पायारी की ,
बहुत ही रोचक प्रस्तुति है आपको वर्णन हेतु शब्द नहीं मिल पा रहा ,यह कबिता जैसा ही उच्च कोटि क़ा गद्द्य पोस्ट है बड़ा ही रोचक ढंग से लिखा गया है .
बहुत-बहुत धन्यवाद.

मनोज कुमार ने कहा…

मज़ेदार! रोचक!!

राज भाटिय़ा ने कहा…

जीत के लिये आप को बधाई जी, लेकिन घर आये मेहमान की कुछ तो इज्जत रकती:)

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

मैं तो सोच रहा हूँ कि उस बेचारे मेढक के बच्चे अगर कहीं आस पास होंगे तो अपनी माँ या शायद बाप की इस हार पर उसका बहुत मज़ाक उड़ा रहे होंगे!! वैसे आपकी इच्छा शक्ति का जवाब नहीं. बिन बुलाए मेहमान बनकर आपके घर जाना ख़तरनाक है!!

महफूज़ अली ने कहा…

यह मैच तो बड़ा ज़बरदस्त रहा... कितना मज़ा आया होगा न... यही इमैजिन कर रहा हूँ....... बहुत अच्छी लगी आपकी यह पोस्ट...

lokendra singh rajput ने कहा…

हा हा हा........ मजेदार!

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! बहुत रोचक!!

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर, रोचक और मज़ेदार पोस्ट रहा! उम्दा प्रस्तुती!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

:):) वर्णन बहुत बढ़िया रहा..

रानीविशाल ने कहा…

:D Mazedaar

RAJWANT RAJ ने कहा…

poonam di ,hm sbhi mhilao ko is match ka nam jhadu match rkhna chahiye kyo ki sbhi apni apni grihsthi me aise match se kai kai bar ru b ru hoti hai . aapki viridhi team fir shreef hai uchhl uchhl kr chouke chhkke lgati hai pr meri virodhi team to mujhe aisa khdedti hai ki mai maidan chhod kr bhag kr plang pr chd jati hu . aap bhut khushkismat hai ki match jiti mgr mai apni virodhi ''chhipkli ''team se hmesha hari hu , bavjood iske match jeetne our bhut hi umda rchnadhrmita ke liye hardik bdhai .
di ! mja aa gya .

राकेश कौशिक ने कहा…

भुक्तभोगी द्वारा रोचक मैच का धाराप्रवाह वर्णन.

वन्दना ने कहा…

हा हा हा………………बहुत ही मज़ेदार रहा। आप तो हिम्मत वाली हैं मै होती तो घर ही छोड कर भाग जाती।

Sonal ने कहा…

bahut hi umda....
mazaa aa gya pad kar....

Meri Nayi Kavita par aapke Comments ka intzar rahega.....

A Silent Silence : Naani ki sunaai wo kahani..

Banned Area News : Now, use Botox to zap that horrendous migraine

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

हमको तो मैच फ़िक्स किया हुआ लग रहा है.:) क्योंकि एंपायर ने कोई फ़ाऊल वाऊल नही दिया. सामने वाली टीम (मेंढक) को बैटिंग का मौका ही नही दिया गया.
लिहाजा मैच दुबारा होना चाहिये. मेंढक जी को सस्म्मान वापस घर के अंदर लाया जाना चाहिये और ताऊ सरीखे तटस्थ अंपायर को रेफ़री बनाकर मैच दुबारा खेला जाना चाहिये.

रामराम.

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

वाह जी क्‍या बात है
पर यह मेढक क्रिकेट के
किस खिलाड़ी का प्रतीक है
स्‍पष्‍ट कीजिएगा
अन्‍यथा न लीजिएगा।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ी मजेदार है रनिंग कमेन्ट्री

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

क्या मैच है!!! बहुत ही रोचक.

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही रोचक.

nilesh mathur ने कहा…

मम्मी दि ग्रेट की जय हो, आप महान हो मम्मी जी, मैं दुआ करता हूँ कि वो मेंढक रोज आपके घर आये और ऐसा मैच रोज हो, बच्चे खुश रहेंगे!

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत रोचक और मजेदार। शुभकामनायें

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ohhhhhhhhhhhh, aakhir aap match jeet gai

'उदय' ने कहा…

... बेहतरीन ... रोचक अभिव्यक्ति !!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हा हा हा ... आपने सफलता के साथ रनिंग कमेंट्री बयान करी है इस मैच की .... मज़ा आ गया पढ़ कर ...

रचना दीक्षित ने कहा…

चलिए मैच तो एक दम रोमांचक रहा, हाँ अगर मेनका गाँधी को आपके मैच की खबर लगी तो शायद मेढकों को सताने का आरोप भी आप पर जरूर लगेगा. वहरहाल खूब हँसाने के लिए आपको धन्यबाद और स्वतंत्रता दिवस की ढेरों बधाई

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

ha..ha...mazaa aa gaya....sahaj hasya..wahwa..

Babli ने कहा…

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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ !

बेचैन आत्मा ने कहा…

मजेदार...
मै तो एक डब्बू और एक दफ्ती लेता हूँ..झट से डब्बू से ढक देता हूँ, दफ्ती को धीरे-धीरे नीचे से लगा देता हूँ फिर उलट देता हूँ. नीचे डब्बू ऊपर दफ्ती बीच में मेंढक राम. फिर बाहर ले जा कर जोर ऊछाल देता हूँ..क्यों है न आसान तरीका..!

सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कहा…

मज़ेदार प्रस्तुति.

Parul ने कहा…

waah..ye kuch naya hai...hehehe..too gud!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

वाह ...मैं तो ताऊ जी सहमत हूँ .....
फिक्सिंग का मामला लगता है ......
तो मेढक महाशय दोबारा हाजिर किये जायें ......
थर्ड एम्पायर के रूप में बेचैन आत्मा मौजूद रहे ....वो इसमें सिद्धहस्त हैं ......!!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

मजेदार मैच...हमने ऐसा एक मैच चूहे के साथ खेला था और बुरी तरह से हार गए...वो अपनी मर्ज़ी से चला गया हम उसे आउट नहीं कर पाए...हमने भी झाड़ू बाल्टी सबका प्रबंध किया था...लेकिन चूहा चूहा था...मेंडक नहीं...
नीरज