बुधवार, 18 अगस्त 2010

आ जा री निंदिया


जब नींद नहीं आती रातों में

खयालों में विचरण करती हूँ

लोग नींद में सपने देखते हैं

मैं जागती आँखों से नींद को ढूँढती हूँ।


मेरी आँखों से निकल कर नींद

जा बसी औरों की आँखों में

भूल गयी शायद वो भी मेरा घर

मैं उसे खोजती फ़िरती हूं।


नींद तू मेरी आँखो में आ जा

इन्तज़ार तेरा है मुझको

इन आँखों में फ़िर से समा जा

हर वक़्त ये चाहत रखती हूँ।


जीवन में तू कितनी अनमोल

अब है मुझको पता चला

पहले मैंने तुझको ठोकर मारी

अब पछताती रहती हूं।


पलकें तेरी स्वागत को तैयार

बस तेरे आने की देरी है

बहुत छकाती है तू मुझको

मैं फ़िर भी मनाती रहती हूँ।


तू कल्पना नहीं हक़ीकत है

जो सबकी आँखों में बसती है

मेरी आँखों में आ के बस जा

विनती यही मैं करती हूँ।


तू नहीं जानती तेरे इन्तज़ार में

मैंने कितनी रातें गँवाईं हैं

जब कुछ भी समझ नहीं आता

यूँ ही पन्ने भरती रहती हूं।


अब तो शायद तुझको थोड़ा

ही तरस आ जाये मुझ पर

तू वक़्त बेवक्त कभी भी आ जाये

बस इन्तज़ार तेरा करती हूँ।

000

पूनम

29 टिप्‍पणियां:

रानीविशाल ने कहा…

Waah Punamji,
Kavita to vakai sundar hai....maze ki baat yah hai ki is mamale main bhagwaan se main dil se dua karungi aapke liye ki
Meri nidiya tujhe lag jaae.....main jaagu tu so jaae!
main to need ke mare satai hui hun...kaya karu need bahut aati hai
:)
bhadiya prastuti...Badhai

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

नींद कहाँ उड़ा दी है ? :)

बहुत अच्छी तरह वर्णित किया नींद का न आना भी ....अच्छी प्रस्तुति

कविता रावत ने कहा…

अब तो शायद तुझको थोड़ा
ही तरस आ जाये मुझ पर
तू वक़्त बेवक्त कभी भी आ जाये
बस इन्तज़ार तेरा करती हूँ।
....jab man mein kuch dukh-dard umadta ghumta hai to neend ud jaati hai..
Gahari neend sukun deta hai....aur sukun man ke achhe hone par hi milta hai..
bahut bhavpurn rachna

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

नीदं को बुलाने का ह्द्र्यपूर्ण काव्यात्म्क प्रयास!

सुबह की ताजगी में
रात की नीदं ही तो धीरे धीरे अनावरित होती है.
जीवन का द्वन्द यही तो है, शायद!

vikram7 ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति

रश्मि प्रभा... ने कहा…

मैं जागती आँखों से नींद को ढूँढती हूँ।
kya kahun, mann khush ho gaya

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जागती आँखों को धोखा दे बन्द आँखों में ही आती है नींद।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अरे वाह!
--
यह लोरी तो बहुत अच्छी रही!

Akhtar Khan Akela ने कहा…

behn poon ji bhut khub nind ka jo svrup or aadaan prdaan prstut kiya he vaaqyi sochne laayq he , akhtar khan akela kota rajsthan

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सूंदर कविता जी धन्यवाद

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

achhi rachna hai ji.......sadhuwad..

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता।

Babli ने कहा…

वाह! आपने इतनी सुन्दरता से नींद न आने पर हर एक पंक्ति लिखा है कि आपकी लेखनी की तारीफ़ के लिए अलफ़ाज़ कम पर गए! बेहद ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना! चित्र भी बहुत बढ़िया लगा!

महफूज़ अली ने कहा…

वाह! क्या कहने कविता के... बहुत अच्छी लगी....

सहज साहित्य ने कहा…

पूनम जी !
आ जा री निंदिया -कविता में भावों को नूतन ढंग से प्रस्तूत करने के लिए बधाई !

सूर्य गोयल ने कहा…

जबरदस्त कविता के साथ बहुत सुन्दर भाव पेश किये है. मेरी बधाई स्वीकार करे. आपके ब्लॉग का तसल्ली से चक्कर काट कर आ रहा हूँ. अपने दिल के भावो को बहुत सुन्दर शब्दों में पिरो कर कविता लिखती है आप. सदर नमन. फर्क मात्र इतना है की मै उन्ही भावो से गुफ्तगू करता हूँ. मेरी गुफ्तगू में स्वागत है आपका.
www.gooftgu.blogspot.com

अरुणेश मिश्र ने कहा…

पूनम जी . कविता की विषयवस्तु प्रशंसनीय ।
स्वप्न मे मुझसे
मिला कोई ।
नींद मेरी रात भर रोई ।

अरुणेश मिश्र ने कहा…

पूनम जी . कविता की विषयवस्तु प्रशंसनीय ।
स्वप्न मे मुझसे
मिला कोई ।
नींद मेरी रात भर रोई ।

रचना दीक्षित ने कहा…

अब तो शायद तुझको थोड़ा

ही तरस आ जाये मुझ पर

तू वक़्त बेवक्त कभी भी आ जाये

बस इन्तज़ार तेरा करती हूँ।
इतना इनतज़ार और फिर भी नींद का न आना. कुछ तो बात है ????

PASHA ने कहा…

Kavita ke baare kuch kahane me mujhe bahut kathnai ho rahi hai. Yeh itani sundar hai ke shabd nahi mil rahe. Aap maang bhi rahi hai to niid, niid ka matalab kewal sona nahi hai santusti bhi hai kya ek kavi man kabhi santust ho payegaa?

bahut hi sundar

Deepak Shukla ने कहा…

Hi..

Bachpan main soya karte the..
Maa ki apni lori sun ke..
Jab bade hue to soye hum..
Man main kuchh sapne hum bun ke..

Kuchh diva swapn tum bhi chun lo..
Jeevan ke taane baane se..
Na rok sakega koi bhi..
Tujh tak nindia ko aane se..

Maa ki lori gar yaad tumhen..
Usko bhi sang main tum gaana..
Man ko tum samjhakar rakhna..
Usko na vyarth main bhatkaana..

Nindiya aayegi teri bhi..
Ek din meethi si Palkon main..
Jo kabse door rahi tujhse..
Wo fir aayegi raaton main..

Ajma ke dekhiye..

Sundar kavita..

Deepak,

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

hmmmmm नींद नहीं आने पर ऐसी प्यारी कविता रच देना, उस वक्त को सार्थकता प्रदान करने जैसा है. आभार.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अच्छी नींद आना बहुत ज़रूरी है ... बस सेहत के लिए ही नही ... सपनों को देखने के लिए भी जिनमें वो आता है जिसका इंतेज़ार होता है .... बहुत उम्दा रचना ...

hem pandey ने कहा…

नींद न आने पर भी पन्नों को भर कर नींद न आने का सार्थक सदुपयोग हो रहा है.

अशोक बजाज ने कहा…

बहुत बढ़िया पोस्ट.बधाई

Babli ने कहा…

रक्षाबंधन पर हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

anupama's sukrity ! ने कहा…

सुन्दरता से दर्शायी बेबसी -
शुभकामनाएं

ZEAL ने कहा…

.अच्छी प्रस्तुति