बुधवार, 29 सितंबर 2010

इम्तहान जिंदगी का


हर कदम पर जिंदगी लेती है इम्तहान

कब कहां किस रूप में ले किसको पता।

उलझनों में इस कदर कर देती है गुमराह

सुलझाते सुलझाते आदमी हो जाता है परेशां।

कभी तो ये जिंदगी लगती रेत का मकां

जो हल्की सी आंधी में भी मिट जाती जाने कहां।

और कभी जिंदगी बन जाती मजबूत पतवार

भंवरों में से भी जूझ बढ़ आगे पा जाती मुकाम।

जिंदगी तो रखती है मौत से भी वास्ता

फ़िर आगे बढ़ा ले जाती है वो अपना कारवां।

जिंदगी को हर तरह से जीना है जिंदादिली का नाम

अजीज मान कर जी लें जिंदगी का हर लम्हां।

0000

पूनम

35 टिप्‍पणियां:

महफूज़ अली ने कहा…

बहत ही सुंदर कविता....

Shekhar Suman ने कहा…

bahut hi khubsurat rachna....
sach mein
zindagi imthaan leti hai....
mere blog par thode se bargad ki chhaon mein jaroor aayein...

nilesh mathur ने कहा…

वाह! क्या बात है!

Apanatva ने कहा…

poonam bahut sunder abhivykti....

ek pyara saa sandesh detee rachana....

aatm bal bana rahana chahiye...har mushkil dafaa ho jatee hai.............

Aabhar

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यही ज़िंदगी है ..

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

जिंदगी के फल्सफां पर उत्तम रचना..बधाई.

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय POONAM जी
नमस्कार !

कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई

कविता रावत ने कहा…

जिंदगी तो रखती है मौत से भी वास्ता
फ़िर आगे बढ़ा ले जाती है वो अपना कारवां।
जिंदगी को हर तरह से जीना है जिंदादिली का नाम
अजीज मान कर जी लें जिंदगी का हर लम्हां।
.....सच में जिन्दादिली से जीना ही जिंदगी का नाम है..
....बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Pratik Maheshwari ने कहा…

अच्छा है..
इम्तहान तो होते ही रहेंगे.. कब तक इनसे डर के मरेंगे?

रचना दीक्षित ने कहा…

वाह! क्या बात है!बहत सुंदर बात और कविता

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

माना, जिन्दगी लेती है, इम्तिहाँ,
पर दे जाती है मुकम्मल जहाँ।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जिंदगी को हर तरह से जीना है जिंदादिली का नाम

bilkul aur zindagi wahin hoti bhi hai

मनोज कुमार ने कहा…

आपकी इस कविता में से भावनाऒं का ऐसा सैलाव उठा कि कई पल रुक कर उन भावधाराओं को निहारने पर विवश कर गया। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
चक्रव्यूह से आगे, आंच पर अनुपमा पाठक की कविता की समीक्षा, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हर कदम पर जिंदगी लेती है इम्तहान
कब कहां किस रूप में ले किसको पता..

सच कहा ... जिंदगी इंतेहाँ लेती है ... और नतीज़ा भी भोगना पढ़ता है ... यहाँ ही ...

ashish ने कहा…

जिंदगी की सच्चाई और कठिनाई पर आप की पारखी कलम खूब चली है . भाव भीनी कविता.

ZEAL ने कहा…

.

जिंदगी को हर तरह से जीना है जिंदादिली का नाम

अजीज मान कर जी लें जिंदगी का हर लम्हां।...

This should be the spirit !

Regards,

.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना!!

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

ज़िंदगी का सम्पूर्ण दर्शन आपने इन अशार में समेट कर रख दिया, जिन्हें समझने में सारी ज़िंदगी सर्फ़ हो जाती है!!

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

लाजवाब

Shaivalika Joshi ने कहा…

Sach yahi to hai jindagi

Kunwar Kusumesh ने कहा…

ज़िन्दगी की उठापटक को चित्रित करती आपकी कविता अच्छी लगी. आप नियमित लिखती रहती हैं,good.
आपने मेरा ब्लॉग देखा एवं प्रतिक्रिया दी , कृतज्ञ हूँ .
कुँवर कुसुमेश
मोबा:09415518546

Kailash C Sharma ने कहा…

जिंदगी तो रखती है मौत से भी वास्ता
फ़िर आगे बढ़ा ले जाती है वो अपना कारवां।

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...आभार..

निर्मला कपिला ने कहा…

ज़िन्दगी की दास्तां जिसका न शुरू है न अन्त। बहुत अच्छी रचना। बधाई

शरद कोकास ने कहा…

यही है ज़िन्दादिली की परिभाषा

Dr.Bhawna ने कहा…

Bahut khubsart jindgi ki paribhasha..

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने! सही में इसी का नाम ज़िन्दगी है जहाँ खुशियाँ और मुश्किलें सबसे गुज़रना पड़ता है! ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति के साथ उम्दा रचना!

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष ने कहा…

अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH ने कहा…

जीवन दर्शन!
सार्थक रचना!
आशीष
--
प्रायश्चित

Vidushi ने कहा…

Magar kyu zindagi khud se nafrat karna sikha deti h???

ushma ने कहा…

जिंदगी को हर तरह से जीना है जिंदादिली का नाम !!!आपकी कविता जिन्दगी और ताजगी से भरी होती है ! बहुत बहुत धन्यवाद पूनम छाये रहिये !लिखते रहिये !

mridula pradhan ने कहा…

bahot achchi kavita.

'उदय' ने कहा…

... bahut sundar !!!

ZEAL ने कहा…

कभी कभी जमीन पर

रेंगने वाले

कीड़े के डंक भी

इतने घातक नहीं होते

जितने कि जहरीले

शब्दों के व्यंग्य बाण ।

So true !

.

संजय भास्‍कर ने कहा…

पूनम जी आपकी इस रचना को कविता मंच पर साँझा किया गया है

कविता मंच
http://kavita-manch.blogspot.in