गुरुवार, 19 मई 2011

शऽऽऽऽऽऽचुप।


शऽऽऽऽऽऽ चुप

दीवारें भी करती हैं

सरगोशियां

यह बात महसूस

होती है सही।

आपने जुबां घर पे

खोली

और बात दरो दीवारों

से गुजर कर

हवाओं में फ़ैल गयी

शायद आपने सुना नहीं?

आपने कहा था क्या

और दीवारें आपकी

बाहर क्या क्या

गुल खिला गईं।

दिमाग सोचने को

मजबूर और

जुबां है अब बंद

इसी लिये दिल की बात

को चुपके से

पन्नों पर उतार गई।

000

पूनम

53 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

हम्म सही है दीवारों के भी कान होते हैं ..पर आज ये जाना कि मुँह भी होता है ... सुन्दर प्रस्तुति

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhut khubsurat rachna..

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

दिमाग सोचने को
मजबूर और
जुबां है अब बंद
इसी लिये दिल की बात
को चुपके से
पन्नों पर उतार गई।
कहीं न कहीं तो शब्द जगह पाते ही हैं.... बहुत सुंदर पूनमजी

minoo bhagia ने कहा…

'ghar ke daro-deewar saja kar dekho '..
gulzar sahab ki ek ghazal jise shayad jagjit singh ji ne gaya hai yaad aa gayi ,
deewarein kya gul khila gayin , achhi soch hai poonam

रश्मि प्रभा... ने कहा…

आपने कहा था क्या

और दीवारें आपकी

बाहर क्या क्या

गुल खिला गईं।

... ab aur satark ho jao

Rakesh Kumar ने कहा…

एक गाना याद आ रहा है मुझे
'कुछ दिल ने कहा...कुछ भी नहीं
कुछ दिल ने सुना .. कुछ भी नहीं
ऐसी भी बातें होती हैं .ऐसी भी बातें होती हैं'

'दिल की बात चुपके से पन्नों पर उतार गई'
बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति.बहुत बहुत आभार.
आशा करता हूँ आपका स्वास्थ्य अब ठीक चल रहा होगा.प्रभु से प्रार्थना करता हूँ की आप पूर्णतया स्वस्थ हो यूँ ही कोमलसुन्दर भावों की मधुर मधुर तरंग छेड़ती ही रहें. .

कुश्वंश ने कहा…

बेहतरीन कविता, हृदयस्पर्शी बधाई

Deepak Saini ने कहा…

आपकी कविता बहुत कुछ सिखा गयी
सुन्दर रचना

Apanatva ने कहा…

chaliye aise hee sahee baat aapkee hum tak pahuch hee gayee.......
:)
shubhkamnae.......

SAJAN.AAWARA ने कहा…

PAHLE SUNA THA KI DIVARON KE KAAN HOTE HAIN, AAJ PATA KI DIVAREN BOLTI BHI HAIN. ISME SANDEH NAHI HAI KI FUTURE ME HUME SUNNE KO MILEGA KI ARE WO DIWAAR TO DEKHTI HAI..... KYUN MAM MENE SAHI KAHA NA?
BAHUT HI ACHI KAVITA LIKHI HAI AAPNE. . .
MUJHE TO EK SIKH MILI HAI, AB JAB BHI KISI SE BAAT KARO TO KHULE MEIDAAN ME. . .
JAI HIND JAI BHARAT

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

chuppi ko bhi kagaj pe utar diya aapne..adbhut!!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन की बातें यूँ ही कविता बन बह जाती हैं।

Gyandutt Pandey ने कहा…

बिल्कुल! रचनात्मकता के लिये मौन बहुत आवश्यक है!

Kailash C Sharma ने कहा…

दिमाग सोचने को

मजबूर और

जुबां है अब बंद

इसी लिये दिल की बात

को चुपके से

पन्नों पर उतार गई...

बहुत सच कहा है...बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..

shikha varshney ने कहा…

मन की बातें कहने के लिए पन्नों का रास्ता बुरा नहीं.
सुन्दर कविता.

रचना दीक्षित ने कहा…

आपने कहा था क्या
और दीवारें आपकी
बाहर क्या क्या
गुल खिला गईं।

बात निकलेगी तो दूर तलाक जायेगी. बड़े सही अनुभव को कविता में डाला है. बधाईयाँ पूनम जी सुंदर एवं संवेदनशील रचना के लिए.

मदन शर्मा ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ! बहुत सुंदर पूनमजी, आपका अंदाज़ सबसे अलग है ! शुभकामनायें आपको!!
कृपया मेरे ब्लॉग पर आयें http://madanaryancom.blogspot.com/

mahendra srivastava ने कहा…

जुबां है अब बंद

इसी लिये दिल की बात

को चुपके से

पन्नों पर उतार गई।

जी आपकी रचनाएं आसान शब्दों में गंभीर अर्थ लिए होती हैं। वाकई बहुत सुंदर

G.N.SHAW ने कहा…

पूनम जी दीवारों के भी कान होते है ! सारगर्भित

बेनामी ने कहा…

बेहतरीन कविता,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

पूनम जी, बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता ।
कृपया मेरी भी कविताएँ पढ़ें और अपनी राय दें ।
www.pradip13m.blogspot.com

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (21.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

एक बहुत पुरानी कहावत है कि अगर तुम चाहते हो कि कोइ तुम्हारा राज़ किसी के सामने न कहे तो सबसे पहले तुमुसे किसी के सामने न कहो..वरना राजा के सर पर दो सींग वाली जंगल में कही बात भी पूरे राज्य में फ़ैल गयी..
और जो बात पन्नों पर लफ्ज़ बनकर उतर गयी वो तो हस्ताक्षर बन जाती है, बदलती नहीं, सनद के तौर पर!! बहुत अच्छा!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और भावप्रणव रचना!

नश्तरे एहसास ......... ने कहा…

बहुत ही उम्दा लिखा है............वाह वाह!!

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति| धन्यवाद|

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar ने कहा…

Vah Poonam ji,
bahut hi behatreen tareeke se apne nirjeev divaron ko sajiv bana diya hai....sundar prastuti.......

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

sabhi ke dil ki baat si hai aapki kavita..


sundar bhav..

ashish ने कहा…

सुँदर रचना पूनम जी . आप व्याहरिकता को छंद में ढलने में कुशल है . सुँदर कविता.

वन्दना ने कहा…

मन की बातों के लिये पन्नों से बेहतर कोई जगह नही…………शानदार प्रस्तुति।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

शब्द-शब्द संवेदना भरा है...आन्तरिक भावों के सहज प्रवाहमय सुन्दर रचना....

सदा ने कहा…

बिल्‍कुल सही कहा आपने ...बेहतरीन लिखा है ।

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत रचना! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है! दिल को छू गयी आपकी ये शानदार रचना!

Suman ने कहा…

punam ji,
achhi lagi rachna ......

anupama's sukrity ! ने कहा…

जुबां है अब बंद

इसी लिये दिल की बात

को चुपके से

पन्नों पर उतार गई।
wah bahut sunder ..
tabhi itni sunder kavita ban gayi ..!!

Meenu Khare ने कहा…

man ko chhoo liya aur kuchh sikhaa bhi diya aapki racna ne.sunder.

Rakesh Kumar ने कहा…

शऽऽऽऽऽऽ चुप
पूनम जी एक बात बताऊँ
मेने एक नई पोस्ट लिख दी है.
आप बताईयेगा नहीं,बस चुपके से आ जाईयेगा.
दीवारों के भी कान होतें हैं न.

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

काश, दीवारों के कान ना होते,

Vivek Jain ने कहा…

बहुत सुंदर
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

ज्योति सिंह ने कहा…

bahut sundar rachna poonam ji do baar laut gayi box hi nahi khul raha tha
दिमाग सोचने को
मजबूर और
जुबां है अब बंद
इसी लिये दिल की बात
को चुपके से
पन्नों पर उतार गई।

Sunil Kumar ने कहा…

kavita yun banti hai ... sundar abivyakti. badhai

: केवल राम : ने कहा…

दिमाग सोचने को
मजबूर और
जुबां है अब बंद
इसी लिये दिल की बात
को चुपके से
पन्नों पर उतार गई।

बहुत शिद्दत से कह दिया आपने अपनी भावनाओं में सब कुछ ....कविता बन गयी ...आपका आभार

BrijmohanShrivastava ने कहा…

यही तो । आदमी बोलता कुछ है मगर वह किस रुप मे प्रचलित होता है जो कहा नहीं वह भी लोगों व्दारा सुन लिया जाता है । अच्छी रचना

Rachana ने कहा…

इसी लिये दिल की बात
को चुपके से
पन्नों पर उतार गई।
aksar aesa hi hota dil ki baat kuchh aese hi kagaz pr utarti hai
badhai
rachana

कविता रावत ने कहा…

आपने जुबां घर पे
खोली
और बात दरो दीवारों
से गुजर कर
हवाओं में फ़ैल गयी शायद आपने सुना नहीं?
...बहुत सही... बात घर से निकलती है तो उसका बहुत दूर तक जाना लाज़मी है, घर की बात घर तक ही सीमित रहे, इससे अच्छा कुछ नहीं...

Rakesh Kumar ने कहा…

Are you alright Poonamji?
I pray for your good health.
Whenever find time,please visit my blog.

Jyoti Mishra ने कहा…

very true !!
nice post.

Ravi Rajbhar ने कहा…

Kaya bat hai bahut hi sunder prastuti
bhawpoorn rachna ke liye badhai swikare.

Rakesh Kumar ने कहा…

अति सुन्दर और दिल से टिपण्णी करतीं हैं आप पूनम जी.
आपके पवित्र हृदय को मैं सादर नमन करता हूँ.
बिना आपकी उपस्तिथि के मेरा ब्लॉग एक दम अधूरा है.
आपका बहुत बहुत आभार.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आ.पूनम जी

आपने जुबां घर पे खोली
और बात दरो दीवारों से गुजर कर हवाओं में फ़ैल गयी

वाकई कैसे हो जाता है … :)
एक और सुंदर रचना के लिए आभार !

हार्दिक शुभकामनाओं सहित
राजेन्द्र स्वर्णकार

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बेहतरीन, हृदयस्पर्शी बधाई

नश्तरे एहसास ......... ने कहा…

पूनम जी,

आपने इतना सराहा की कुछ पल को आँखे भर आई की पहली बार आई हुई एक लड़की को लेखन शैली की इतनी बड़ी ब्लोगर ने इतना पसंद किया ! शायद बड़ों का बड़प्पन इसको ही कहते हैं.
आपका बहुत आभार !
धन्यवाद
अब से लिखूंगी.
आपकी नेहा:)

नूतन .. ने कहा…

बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ।