बुधवार, 3 अगस्त 2011

मिडिल क्लास लड़की


राह चलते एक मुलाकात हुई

वो फ़िर वो चलते चलते

दोस्ती में बदल गई।

पता नहीं तुमने मुझमें

क्या देखा

जो अचानक ही मेरा हाथ

पकड़ लिया

और मैं भी तुम्हारा हाथ

थाम कर आगे

मंजिल की तरफ़

बढ़ने लगी।

पर

एक दिन हाई सोसायटी

गर्ल से हुयी

तुम्हारी मुलाकात से

न जाने क्यों तुम

मुझसे कतराने लगे

मेरी खूबियां जो तुम्हें

बहुत भाती थीं

वो तुम्हारी नजर

में कमियां नजर आने लगीं।

तुम्हारी नजरों में मैं

अब पुराने संस्कारों के

बंधन में जकड़ी

परंपराओं से जुड़ने वाली

लड़की नहीं

एक मिडिल क्लास की

लड़की लगने लगी

जो तुम्हारे साथ

बियर बार में बैठकर

हाथ में बियर ग्लास लेकर

चियर्स नही कर सकती थी।

न क्लबों में गैरों की

कमर में हाथ डाले

फ़्लोर पर डांस

कर सकती थी

और न ही

देर रात डिनर पर

तुम्हारे दोस्तों के

अश्लील मजाकों का

लुत्फ़ उठा सकती थी।

फ़िर तुमने बीच राह

में ही छोड़ दिया मेरा हाथ

अच्छा ही किया

क्योंकि मैं अपने बुजुर्गों के

संस्कारों में पली बढ़ी

स्वाभिमानी लड़की थी

जो वो सब नहीं कर सकती थी

जैसा तुम चाहते थे।

पर तुमने मुझे

मेरी भावनाओं को

तनिक भी

समझने की कोशिश नहीं की

संस्कारों में पली लड़की

अपने पुराने संस्कारों के

साथ चलते हुये भी

नये जमाने की

विषम परिस्थितियों को

भी बखूबी अपने अनुरूप

ढाल सकती थी।

क्योंकि ये संस्कार ही

हमें आगे परिस्थितियों से

जूझना और आगे बढ़ने की

हिम्मत देते हैं।

मैं भी आगे बढ़ूंगी

जरूर पर अपना आत्मसम्मान

स्वाभिमान बेच कर नहीं

क्योंकि मैं एक

मिडिल क्लास लड़की हूं।

0000

पूनम

49 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सुंदर सशक्त अभिव्यक्ति....बहुत गहरी बात कहती रचना

Roshi ने कहा…

bahut geeeeehre bhav,sarthak rachna

मनोज कुमार ने कहा…

स्वाभिमान और संस्कार बहुत बड़ी चीज़ है जी, इससे जीवन में क्लास आता है, ... फ़र्स्ट क्लास!! चाहे वह मिडल क्लास का हो या हाइयेस्ट क्लास का!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अब संस्कार मिडिल क्लास के पास ही तो बचे हैं ... अच्छी प्रस्तुति

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

स्वाभिमान और संस्कार बेचकर या गिरवी रखकर यदि "क्लासोन्नति" (मिडिल से हाई क्लास) मिलती है तो धिक्कार है उसपर!!
पूनम बहन बहुत अच्छी सीख!!

S.N SHUKLA ने कहा…

सुन्दर रचना , बहुत सुन्दर भाव

सतीश सक्सेना ने कहा…

बढ़िया अभिव्यक्ति मगर नैतिक मूल्यों की समझ वाले यहाँ कम हैं.....शुभकामनायें !

Rakesh Kumar ने कहा…

मैं भी आगे बढ़ूंगी

जरूर पर अपना आत्मसम्मान

स्वाभिमान बेच कर नहीं

क्योंकि मैं एक

मिडिल क्लास लड़की हूं।


आपने 'आत्सम्मान' का गौरव बढाती सुन्दर प्रस्तुति की है.
स्वाभिमान और संस्कार ही हमारी पूँजी हैं,जिनको सद् विवेक के साथ हमे सदा सुरक्षित रखना चाहिये.

आभार.

मेरे ब्लॉग पर आप अभी तक भी नहीं आयीं हैं.
सब कुशल मंगल है न पूनम जी.

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय पूनम जी
नमस्कार !
बहुत ही सुंदर ....सशक्त अभिव्यक्ति
बेहद खूबसूरत आपकी लेखनी का बेसब्री से इंतज़ार रहता है, शब्दों से मन झंझावत से भर जाता है यही तो है कलम का जादू बधाई

वाणी गीत ने कहा…

स्वाभिमान और आत्मसम्मान सिर्फ मिडिल क्लास के पास ही बचा है तो यही सही , आत्मा पर बोझ लेकर चलना ठीक भी नहीं ...
नए ज़माने में तालमेल बैठाने के लिए बेशर्मी और संस्कृति को बिसरा देना हरगिज जरुरी नहीं
यही उत्साह बना रहे ...
सरल शब्दों में सुन्दर सार्थक सन्देश !
बहुत बढ़िया !

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

वो लड़की "मिडिल क्लास" नही बल्कि "क्लास" है....

minoo bhagia ने कहा…

zamana badal gaya hai poonam ,
kise achhe lagte hain sanskar aajkal,
kavita bahut achhi hai

रश्मि प्रभा... ने कहा…

आत्मसम्मान हो जहाँ ... दरअसल वही है ख़ास... हाई सोसाइटी तो दिमागी फितूर है

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मिडिल क्लास बने रहना ठीक है, बहकने से कहीं अच्छा है।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

इंसान वह है जो हाथ थाम कर न छोड़े वर्ना तो वह केवल एक बरसाती मेंढक है।

आप क्या जानते हैं हिंदी ब्लॉगिंग की मेंढक शैली के बारे में ? Frogs online

rahul ने कहा…

पूनम दीदी....अच्छा लिखा....वैसे मै इसे अच्छा या बहुत अच्छा कह सकने की छ्मता नहीं रखता हूँ....पर मुझे अवश्य अच्छा लगा.....मन की बात आपने प्रस्तुत की.....ये बाते बहुतों के मन में होंगी पर उसे व्यक्त करने की कला सबमे नहीं होती......आपमें है......दिखी........अति सुन्दर रचना.......धन्यवाद दीदी.....

PK Sharma ने कहा…

bhut accha likha hai
balki ek sacchai se rubru karaya hai aapne
www.pksharma1.blogspot.com

PK Sharma ने कहा…

bhut accha likha hai
balki ek sacchai se rubru karaya hai aapne

Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

इस मिडिल क्लास लड़की के स्वाभिमान भरे कलाम को सलाम....

रचना दीक्षित ने कहा…

मिडिल क्लास या क्लास ????/
सुन्दर अभिव्यक्त
बधाई

: केवल राम : ने कहा…

आतीत और वर्तमान को आपने बहुत मार्मिकता से अभिव्यक्त किया है एक लड़की और लड़के के प्रेम के माध्यम से .....और आज के कटु सत्य को उजागर करती आपकी यह रचना ......आपका आभार

mahendra srivastava ने कहा…

वाकई बहुत सुंदर रचना है।
कई सवाल है, जिस पर सोचना होगा

रूप ने कहा…

sundar rachna. badhai

कविता रावत ने कहा…

मैं भी आगे बढ़ूंगी
जरूर पर अपना आत्मसम्मान
स्वाभिमान बेच कर नहीं
क्योंकि मैं एक
मिडिल क्लास लड़की हूं।
....sach apna aatmsmman banaye rakhkar aage badhna hi sachee arthon mein unnatti hai...
ek middle class sanskaarvan ladki ka bahut hi achha sajeev chitran kiya hai aapne..
Saarthak prastuti ke liye aabhar!

वन्दना ने कहा…

वाह पूनम जी जितनी तारीफ़ की जाये कम है।
एक बेहद सशक्त और सार्थक रचना सुन्दर संदेश देती है……………बेहद प्रशंसनीय्।

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, ने कहा…

बदलते ज़माने का बदलता रूप बहुत अच्छे से दर्शाया है आपने . मेरे ब्लॉग पर भी आइयेगा मुझे ख़ुशी होगी .
अक्षय-मन

ktheLeo ने कहा…

मैं भी आगे बढ़ूंगी जरूर पर अपना आत्मसम्मान स्वाभिमान बेच कर नहीं

वाह! यह है आत्मविश्वास!अभाव हो सकता है,अधार मजबूत है! सुन्दर बात शसक्त अभिव्यक्ति!

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

sach kaha aapne sanskar hame zindgi jeena sikhate hai.

bahut acchhi abhivyakti.

राकेश कौशिक ने कहा…

"क्योंकि ये संस्कार ही
हमें आगे परिस्थितियों से
जूझना और आगे बढ़ने की
हिम्मत देते हैं।
मैं भी आगे बढ़ूंगी
जरूर पर अपना आत्मसम्मान
स्वाभिमान बेच कर नहीं"

मुझे इसमें तनिक या कहूँ लेशमात्र भी संदेह नहीं - आपकी रचना के पात्र को हार्दिक शुभकामनाएं और आशीष. इस रचना के लिए आपको साधुवाद.

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar ने कहा…

Bahut sarthak aur sashakt abhivyakti......
Hemant

vidhya ने कहा…

बेहतरीन।
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

G.N.SHAW ने कहा…

स्वार्थी लोगो के पास संस्कार का अभाव होता है ! द्वन्द पूर्ण कविता

arpana pandey ने कहा…

kavita sunder lagi

सुमन'मीत' ने कहा…

sateek kavita.....jhan sanskar ho vahi high class hai .....

सदा ने कहा…

सटीक एवं सार्थक लेखन के लिये आपका आभार ।

somali ने कहा…

bahut gehre bhav abhivyakr kiye aapne

Suman ने कहा…

poonam ji,
sach me bahut sunder rachna hai..........

S.N SHUKLA ने कहा…

मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं,आपकी कलम निरंतर सार्थक सृजन में लगी रहे .
एस .एन. शुक्ल

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

पूनम जी
इस संस्कारवान सभ्य "मिडिल क्लास लड़की" को मेरा नमन है !

आपने हमेशा कविता में निर्मल-निश्छल-पावन हृदय की कोमल भावनाओं को बिना लाग-लपेट के प्रस्तुत किया है ।
… और इस ईमानदार लेखन से कोई बेईमान ही प्रभावित नहीं होगा … :)

मैं भी आगे बढ़ूंगी जरूर
पर
अपना आत्मसम्मान स्वाभिमान बेच कर नहीं !

आप अवश्य ही अपने निश्चय में सफल हैं … और सदैव रहेंगी ।
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ


-राजेन्द्र स्वर्णकार

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना! सुन्दर सन्देश देती हुई लाजवाब प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

BANKA RAM CHOUDHARY ने कहा…

इस हाई क्लास से तो वो मिडिल क्लास ही बेहतर है. बहुत ही बढ़िया, और सुन्दर अभिव्यक्ति. भारतीय संस्कारी समाज के लिए आदर्श रचना. धन्यवाद

Vaneet Nagpal ने कहा…

पूनम जी,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम"के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

Vivek Jain ने कहा…

क्या बात है,बहुत गहरी बात कहती रचना,
बधाई,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

देवेश प्रताप ने कहा…

bahut badhiya prastuti .....

ashish ने कहा…

संस्कारों से जुडी भारतीय मानसिकता को बहुत सुन्दत ढंग से परिभाषित किया है आपने

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

हमारी शांति, हमारा विकास और हमारी सुरक्षा आपस में एक दूसरे पर शक करने में नहीं है बल्कि एक दूसरे पर विश्वास करने में है।
राखी का त्यौहार भाई के प्रति बहन के इसी विश्वास को दर्शाता है।
भाई को भी अपनी बहन पर विश्वास होता है कि वह भी अपने भाई के विश्वास को भंग करने वाला कोई काम नहीं करेगी।
यह विश्वास ही हमारी पूंजी है।
यही विश्वास इंसान को इंसान से और इंसान को ख़ुदा से, ईश्वर से जोड़ता है।
जो तोड़ता है वह शैतान है। यही उसकी पहचान है। त्यौहारों के रूप को विकृत करना भी इसी का काम है। शैतान दिमाग़ लोग त्यौहारों को आडंबर में इसीलिए बदल देते हैं ताकि सभी लोग आपस में ढंग से जुड़ न पाएं क्योंकि जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उसी दिन ज़मीन से शैतानियत का राज ख़त्म हो जाएगा।
इसी शैतान से बहनों को ख़तरा होता है और ये राक्षस और शैतान अपने विचार और कर्म से होते हैं लेकिन शक्ल-सूरत से इंसान ही होते हैं।
राखी का त्यौहार हमें याद दिलाता है कि हमारे दरम्यान ऐसे शैतान भी मौजूद हैं जिनसे हमारी बहनों की मर्यादा को ख़तरा है।
बहनों के लिए एक सुरक्षित समाज का निर्माण ही हम सब भाईयों की असल ज़िम्मेदारी है, हम सभी भाईयों की, हम चाहे किसी भी वर्ग से क्यों न हों ?
हुमायूं और रानी कर्मावती का क़िस्सा हमें यही याद दिलाता है।

रक्षाबंधन के पर्व पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं...

देखिये
हुमायूं और रानी कर्मावती का क़िस्सा और राखी का मर्म

Maheshwari kaneri ने कहा…

सशक्त सुंदर अभिव्यक्ति...

ज्योति सिंह ने कहा…

मैं भी आगे बढ़ूंगी

जरूर पर अपना आत्मसम्मान

स्वाभिमान बेच कर नहीं

क्योंकि मैं एक

मिडिल क्लास लड़की हूं।
sundar likha hai ,swatantrata divas ki badhai aapko .

Kunwar Kusumesh ने कहा…

Happy Independence Day.