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रविवार, 8 मई 2011

माँ तेरी याद में……









माँ तेरी कोख में जनम लिया

कोई इससे बड़ा वरदान नहीं

तेरे दिल से निकले आशीर्वचन

मुझसे बड़ा धनवान नही

तूने जो सन्स्कार दिये मुझको

उससे बड़ा कोई रत्न नही

हर पग-पग पर जो सीख मिली तुझसे

उससे बड़ा कोई ज्ञान नही

मुश्किलों में भी चट्टानो से टकराकर

मेरे लिये हरदम मुस्कान बनी

स्नेह,त्याग,ममता की जननी

तुझसे बड़ा कोई मान नही

माँ-माँ तू केवल माँ है मेरी

मेरे लिये तुझसे बड़ा भगवान नही

तुझसे ही तो जाना हमने होते हैं भगवान भी

तुझमें पाते सारे वो रूप,तुझ सम कोई और नहीं

माँ मेरा हर जीवन

हर पल है तुझपे क़ुर्बान

ॠण तेरा कभी ना चुक सकता माँ

पर ये मेरा तुझपर उपकार नही

शत-शत नमन तुझे ओ मेरी माँ

तू मिले मुझे हर जनम-जनम

यादों मे बसी,साँसों मे समाई

ओ माँ,

कैसे कहूँ कि तू अब मेरे पास नहीं…॥

000

पूनम

रविवार, 14 फ़रवरी 2010

यादों के झरोखों में माँ







पिछ्ले साल आज के ही दिन पन्द्रह फ़रवरी को मां की याद में एक कविता लिखी थी,जो आज हकीकत में बदल गई ।पिछ्ले महीने सोलह जनवरी को मां का निधन हो गया । आज अपने ही जन्म दिन पर मां को अब तस्वीरों मे देख कर कुछ बातें दिल ही दिल ही में रूला गईं।

वही कमरा वही आंगन

फ़िर भी लगता है कुछ सूना

वही दीवारें वही दरवाजें जैसे

ढूंढ्ता घर का भी कोना, कोना।

लोरी सुनाती थक भी जाती

फ़िर भी नहीं खुद सोती थीं

थपकी देंती, धीरे गातीं,

जब तक मैं सो जाऊं ना।

याद आई फ़िर छूटे बचपन की,

वही रसोईं छोटी सी,

ताक पे रखे चीनी को देख मेरा वो ,

ललचा कर,फ़िर खा के जल्दी से मुँह धोना।

घी से चुपडी रखी रोटी

कुछ पतली, कुछ मो्टी-मोटी

कौन किससे पहले खाये

याद है उस प्रेम भरी टकरार का होना।

भैया बहनो संग उधम मचाना

ज़रा सी बातो पे इतराना

दिल मे प्यार आँख मे गुस्सा

याद है माँ के आँचल मे छुप के मुस्काना।

बचपन की बातें होती ऐसी

जो कभी नही मिटती दिल से

कोई बचपन से ही सीखे

संघर्षों में भी मुस्काना।

नहीं ज़रूरी सबका बचपन

एक ही साँचे में ढल जाये

किसी क बचपन महलो में बीते

किसी को मिले धरती का बिछौना।

यादें बहुत हैं बहुत सी हैं बातें

बयाँ करूँ क्या क्या और कैसे

यादों की मोती को जोडूं तो

लगे सामने है बीता जमाना।

मां तू तो ईश्वर स्वरूप है

भला तुझे मैं क्या दे सकती हूं

जो तूने आशीष दिया

वही है सपना अब पूरा करना।

दिल में तेरी याद बसी

आखें तस्वीरों में ढूंढ्ती है

लाख बुलाऊं तुझको मैं

पर फ़िर भी तू तो आये न॥

मां तो वो अनमोल खजाना

जो जीवन में ईक बार मिले

जिससे भी ये छिना खजाना

उसने ही इस दर्द को जाना।

पूनम

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