शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

बारिश में

बारिश में माटी की
सोंधी सी खुशबू से
भीज उठा तन
बहक गया मन।

कलियों के होठों पे
नहलाई धूप सा
निथर उठा तन
महक उठा मन।

पक्षियों के कलरव सा
अठखेलती लहरों सा
नाच उठा मन
थिरक उठा तन।

सांझ की झुरमुट में
प्रियतम की आहट पर
गा उठा मन
हुलस उठा तन।
00000000
पूनम

19 टिप्‍पणियां:

‘नज़र’ ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत कविता, लखनऊ की बारिश को आप और भी सुहाना बना रही हैं
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संतोष कुमार सिंह ने कहा…

पिंकी इस देश की बेटी हैं जिसे कुछ दरिंदो ने इस हालात में पहुचा दिया हैं जहां से बाहर निकलने में आप सबों के प्यार और स्नेह की जरुरत हैं।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

मनोभावों का सुन्दर चित्रण है।
बधाई।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

रिमझम फुहारें ऐसी ही होती हैं ......

Babli ने कहा…

बहुत सुंदर कविता और साथ में ख़ूबसूरत तस्वीर! वाह बारीश का मज़ा तो हम आपके कविता के दौरान ले रहे हैं!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

पक्षियों के कलरव सा
अठखेलती लहरों सा
नाच उठा मन
थिरक उठा तन।

आपने मन के भावः को इतना सुन्दर शब्द संसार दिया है ..... वैसे बरखा कुछ भी करा देती है.........

अल्पना वर्मा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता लगी पूनम जी.
अभी अभी 'महक 'की बारिशों में भीगी अब आप की कविता भी बारिश पर पढ़ी..बहुत ही आनंद आया.
सुन्दर शब्द संयोजन और साथ दिया चित्र दोनों मन को भा गए.

vishnu-luvingheart ने कहा…

kya baat hai...

mehek ने कहा…

पक्षियों के कलरव सा
अठखेलती लहरों सा
नाच उठा मन
थिरक उठा तन।
waah man kemayur pankh pasaare nachane lage,baarish ke har khubsurat lamhe ko sunder shabdon mein piroya hai.man bhig gaya,badhai

sandhyagupta ने कहा…

Samay ke sath vartalap karti aapki is rachna ne man moh liya.

M.A.Sharma "सेहर" ने कहा…

पक्षियों के कलरव सा
अठखेलती लहरों सा
नाच उठा मन
थिरक उठा तन।

bahut meethe meethe kavita likhi hai .

Murari Pareek ने कहा…

अब तो इन्तजार है माटी की खुशबु आये बारिस से भीग कर, तरस गए हैं बारिस को, ऐसे में आपकी कविता से भीग उठा मन बहक गया मन!!

शोभना चौरे ने कहा…

bshut pyarisi rachna.
badhai

raj ने कहा…

सांझ की झुरमुट में
प्रियतम की आहट पर
गा उठा मन
हुलस उठा तन।..kya baat hai...boht sunder likha apne...

k.r. billore ने कहा…

kya baat hai, saanjh ki jhurmut me priytam,,,,,,sunder rachanaa hai,,,kamana mumbai,,

k.r. billore ने कहा…

kya baat hai, saanjh ki jhurmut me priytam,,,,,,sunder rachanaa hai,,,kamana mumbai,,

Meenu khare ने कहा…

बहुत सुन्दर चित्रण किया है वर्षा का पूनम जी. अब बादलों को चाहिए कि वे जम कर बरसें और सराबोर कर दें धरती का कण-कण.

Ramaajay Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर भाव .....मन मुग्ध हो गया ...

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर!!