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शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

बारिश में

बारिश में माटी की
सोंधी सी खुशबू से
भीज उठा तन
बहक गया मन।

कलियों के होठों पे
नहलाई धूप सा
निथर उठा तन
महक उठा मन।

पक्षियों के कलरव सा
अठखेलती लहरों सा
नाच उठा मन
थिरक उठा तन।

सांझ की झुरमुट में
प्रियतम की आहट पर
गा उठा मन
हुलस उठा तन।
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पूनम