दो क्षणिकाएं
एक बूंद
बारिश की एक बूंद
गिरी टप
गुलमेहंदी के
फ़ुल पर
स्थिर हुई कुछ
चमकी
सागर के मोती सी
हवा चली
फ़ूल हिला
बूंद फ़िर गिरी
टप
प्यासी सी भूमि पर।
000
जिन्दगी और मौत
जिन्दगी
एक सोया हुआ आदमी
मौत
कच्चे सूत सी लटकती
कटार
कब टूटे
कब गिर पड़े
किसे पता।
पूनम