मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

साकी


बहुत कुछ सुनने सुनाने को बाकी

मगर पहले थोड़ी पिला दे तू साकी।

सुना है इसमें बहुत है दम

ताकत है इसमें भुलाने को गम

असर मुझपे भी हो जाये ताकि-----।

सुना है इसको जिसने पिया है

वो हर बार मर मर के ही तो जिया है।

निभाता है साथ हर गम में बाकी----।

माना गमे दर्द में काम करता दवा का

मगर बन जाता इक दिन नशा जिन्दगी का

जिगर तो जलाता साथ जां भी जो बाकी---।

नशा तो नशा है किसी किस्म का भी

जहर बन जाता इक दिन दवा भी

फ़िर भी नशा लोग करते हैं बाकी----।

सुना है जहर को मारता जहर है

सब करता इंसान जो चाहे अगर वो

फ़िर इसमें कसर क्यूं अब भी है बाकी---।

रहने दे तू मुझको पिलाने को साकी

रहने दो मुझको पिलाने को साकी-----।

0000

पूनम

40 टिप्‍पणियां:

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

एक बढ़िया भाव..सुंदर रचना...बधाई पूनम जी

M VERMA ने कहा…

जहर हमेशा ढाती है कहर
सुन्दर भाव की रचना

दिलीप ने कहा…

bahut khoob mam...
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

Dev ने कहा…

बहुत खूब आज तो साकी का पैमाना भी छलक जायेगा

संजय भास्कर ने कहा…

हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.

राज भाटिय़ा ने कहा…

अब तो हम ने पीनी छोड दी, लेकिन सच कहूं आप की कविता से पुरा नशा हो गया, बहुत सुंदर कविता लगी.
धन्यवाद

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

पूनम जी,
मैँ समझ सकता हूँ कि आप पीती नहीँ हैँ ।तो फिर दूसरोँ को पीने के लिए मजबूर क्योँ कर रही हैँ?
इस सम्बन्ध मेँ भाटिया जी की बात मेँ भी दम है।खैर!
आपकी कविता अच्छी है जिसने इतना सोचने को लाचार किया।

अभिषेक ओझा ने कहा…

"नशा तो नशा है किसी किस्म का भी" ये सभी समझे तब न !

abhi ने कहा…

पता नहीं क्यों ये नशा और पीनेवालों की शायरी मुझे बड़ी भाती है...वैसे मैं पीता नहीं लेकीन फिर भी ये शायरियां अच्छी लगती हैं :P ...और हाँ , जहर को जहर ही मरता है..
हम भी कुछ सोचने लगे आपके इस कविता पे..बेहद ही अच्छी, सोचने को मजबूर कर देने वाली कविता

sangeeta swarup ने कहा…

सुना है इसको जिसने पिया है
वो हर बार मर –मर के ही तो जिया है।
निभाता है साथ हर गम में बाकी----

बहुत खूबसूरती से कह दी है ये बात....बहुत खूब

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah......paimana paimane ke saath

Shri"helping nature" ने कहा…

saki ek anutha rista bahut badhiya

Amitraghat ने कहा…

सुन्दर भाव लिये है ये कविता....:

Dr.Bhawna ने कहा…

Bahut sundar rachna.bahut2 badhai...

arun c roy ने कहा…

bahut sunder rachna punam ji...
"बहुत कुछ सुनने सुनाने को बाकी
मगर पहले थोड़ी पिला दे तू साकी। "
pehli hi panktiyon me bahut dard hai...

kunwarji's ने कहा…

"सुना है जहर को मारता जहर है
सब करता इंसान जो चाहे अगर वो
फ़िर इसमें
कसर क्यूं अब भी है बाकी"

ji bahut khoob!

kunwar ji,

बेचैन आत्मा ने कहा…

ऊपर पढ़ा तो मजा आ गया
थोड़ा हमें भी नशा छा गया।

नीचे पढ़ा तो जुलुम हो गया
पूरा नशा ही हिरण हो गया।

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत लाजवाब,हर इक बात बहुत गहरी साथ ही नशा भी गहरा चढ़ा दिया आपने तो.इतनी बेहतरीन प्रस्तुती के लिए आभार

kshama ने कहा…

Harek shabd gadha hua hai..harek pankti mukammal!

SAMVEDANA KE SWAR ने कहा…

एक नशीली रचना... इतने ऐब बता दिए आपने फिर भी इस रचना के नशे से बाहर आने को जी नहीं चाह्ता...अब तो ये आलम है कि होश आया भी तो कह दूँगा मुझे होश नहीं...

Shekhar Suman ने कहा…

bahut hi achhi rachna...
hamesha ki tarah pasand aayi..
yun hi likhte rahein...\
regards..
http://i555.blogspot.com/

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जहर को मारता जहर है ।

वाह

Uma ने कहा…

bade sundar shabdo me dhala hai apni bhavnao kao..

Apanatva ने कहा…

gum ke bahane peena...............

ye kaisaa jeena....................

rashmi ravija ने कहा…

bahut hi sundar kavita...aanand aa gaya padhkar

आशीष/ ASHISH ने कहा…

Aise hi tukbandi mila raha hoon, nosh farmaayen!
May de mujhko ke suroor to ho!
Nasha na ho paaye saaki!
Bas katra bhar madhoshi ho!
Par hosh rahe mera baaki!!!

लोकेन्द्र ने कहा…

वाह क्या बात कही......
एकदम नशे में सराबोर..

अरुणेश मिश्र ने कहा…

क्या लिख दिया पूनम ! मन प्रसन्न हो गया ।
ज्यादा मथने से
तीता हो जाता नीबू ।
अमृत भी विष
हो जाता है पीते पीते ।

दीर्घतमा ने कहा…

punam ji namaste.
kabita ka bhaw bahut acchha hai.
bahut sundar.
dhanyabad

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ने कहा…

तू क्या जाने पीना पिलाना कैसे पिलायी जाती है
ढक्कन खुलता है बाद में बोतल पहले हिलायी जातीहै
बोदा नशा शराब का उतर जाय प्रभात
नाम खुमारी नानका चङी रहे दिन रात

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ने कहा…

तू क्या जाने पीना पिलाना कैसे पिलायी जाती है
ढक्कन खुलता है बाद में बोतल पहले हिलायी जातीहै
बोदा नशा शराब का उतर जाय प्रभात
नाम खुमारी नानका चङी रहे दिन रात

nilesh mathur ने कहा…

waah! kya baat hai !

अल्पना वर्मा ने कहा…

बहुत खूब पूनम जी,
आज कुछ अलग से मूड की ग़ज़ल लगी.

-अच्छी लिखी है.

dipayan ने कहा…

क्या बात है.. आगाज़ कुछ, अन्ज़ाम कुछ .. बहुत खूब..

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने उम्दा रचना प्रस्तुत किया है! बधाई!

कमलेश वर्मा ने कहा…

poonam ji..kya baat hai ...alfajon ki jadoogari....uttam

जितेन्द़ भगत ने कहा…

सुंदर भाव।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आपकी कविता में पूरी बोतल का नशा है ... बहुत ही लाजवाब ... बहुत दीनो बाद मदहोशी की रचना पढ़ने को मिली ... मज़ा आ गया ...

Dimpal Maheshwari ने कहा…

होशो-हवास अपने सलामत रहे 'जिगर',
मंजिल से पूछ लूंगा कहाँ जा रहा हूँ मैं...

Parul ने कहा…

so nice :)