गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

दोस्ती के नाम


दोस्ती के नाम

नजदीकियां भी बन जाती हैं दूरियां,

जब आपस में यूं ही हो जाती हैं गलतफ़हमियां।

क्यूं मूक सी दीवार खड़ी है आज दिलों के दरमियां,

कल तक जो डाले हाथों में हाथ करते थे खूब बातियां।

भरोसे और विश्वास से ही चलती हैं जिन्दगानियां,

इनके बगैर तो जिन्दगी हो जाती हैं बेमानियां।

कोशिश करके देख लो भूल पुरानी बातियां,

बढ़ा के हाथ दोस्ती का फ़िर से कर लो गलबहियाँ।

दिल से बोझ उतर जायेगा देखना इक दिन साथियां,

वो दोस्ती ही क्या जहां होती नहीं हैं गलतियां।

दोस्ती में अभिमान होता नहीं साथियां,

वो न बढ़े तुम बढ़ जाओ बांध लो प्रेम की डोरियां॥

---

पूनम

46 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

waah...umda rachna....


http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

मनोज कुमार ने कहा…

वो दोस्ती ही क्या जहां होती नहीं हैं गलतियां।
दोस्ती में अभिमान होता नहीं साथियां,
वो न बढ़े तुम बढ़ जाओ बांध लो प्रेम की डोरियां॥
बिल्कुल सच कहा।

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

अच्छी रचना।
बधाई!

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सही कहा!

Suman ने कहा…

nice

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।

Apanatva ने कहा…

bilkul sahee baat......
sarthak lekhan pyara sa sandesh deta huaa .

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

दोस्ती में अभिमान होता नहीं साथियां,

"किया अभिमान तो फिर मान नही पायेगा
होगा प्यारे वही जो श्रीरामजी को भायेगा"

सुन्दर अल्फ़ाजो मे बँया किया है।

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत खूब...दोस्ती में अभिमान नहीं बस प्रेम होता है....सुन्दर रचना

Atul Sharma ने कहा…

वो दोस्ती ही क्या जहां होती नहीं हैं गलतियां।

होता है।

Amitraghat ने कहा…

वो न बढ़े तुम बढ़ जाओ बांध लो प्रेम की डोरियां"
सुन्दर पँक्तियाँ...."

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने! हर एक पंक्तियों में आपने सही बात का ज़िक्र किया है! दोस्ती में ईमानदारी, विश्वास और सच्चाई होना बहुत ज़रूरी है वरना दोस्ती टूट जाती है!

rashmi ravija ने कहा…

दोस्ती को परिभाषित करती हुई सुन्दर सी कविता

rashmi ravija ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
रश्मि प्रभा... ने कहा…

दोस्ती में अभिमान होता नहीं
yahi mukhya baat hai, bahut achhe bhaw

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर!
इसको चर्चा में भी लिया है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html

kunwarji's ने कहा…

ji bahut sundar or sachi baat...

kunwar ji,

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

वो न बढ़े तुम बढ़ जाओ बांध लो प्रेम की डोरियां॥

सुन्दर रचना है !

dev ने कहा…

गाँठ अगर लग जाये तो फिर, रिश्तें हो या डोरी,

लाख करो कोशिश , खुलने मे वक़्त तो लगता है.



भावपूर्ण कृति के लिए बधईयाँ

Shail ने कहा…

Sach hi farmaya hai aapne...bahut khoob

KAVITA RAWAT ने कहा…

नजदीकियां भी बन जाती हैं दूरियां,
जब आपस में यूं ही हो जाती हैं गलतफ़हमियां।
क्यूं मूक सी दीवार खड़ी है आज दिलों के दरमियां,
कल तक जो डाले हाथों में हाथ करते थे खूब बातियां।
Galatfamiyon ko dhoti dindgi ko kabhi sukun nahi mil paata, jitne jaldi ho esse baahar nikal lene bhi bhi sabki bhalaee hoti hai..
Bhavpurn rachna ke liye badhai

Shekhar Suman ने कहा…

वो दोस्ती ही क्या जहां होती नहीं हैं गलतियां।
bilkul sachhi panktiyaan...
achha laga yahan aakar....ab aksar aaya karoonga...
behtareen likhti hain aap.......

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

bahar men to hai naheen fir gazal kaise?

Shekhar Suman ने कहा…

mere blog par bhi padharein...

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

वो दोस्ती ही क्या जहां होती नहीं हैं गलतियां।

दोस्ती में अभिमान होता नहीं साथियां,

वो न बढ़े तुम बढ़ जाओ बांध लो प्रेम की डोरियां॥

बिलकुल ......!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच है दोस्ती में ग़लतियों का क्या रोना .... दोस्ती तो दिल से होती है .. सब कुछ साझा होता है ... दोस्ती को बस दोस्ती की नज़र से देखना चाहिए ...

देवेश प्रताप ने कहा…

बहेतरीन प्रस्तुती .....

anjana ने कहा…

वाह बहुत ही सुन्दर ।दोस्ती पर बहुत उम्दा रचना रची आप ने ...बधाई

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

your blog is very nice pls.see my blog i am waiting you

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

दोस्ती में अभिमान होता नहीं साथियां,
यह तो है - अभिमान आया और दोस्ती गली!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अच्छी कविता मन के भावों की ।

Apanatva ने कहा…

aaj blog aapka intzar kar raha hai....

महफूज़ अली ने कहा…

यह रचना दिल को छू गई... बहुत सुंदर पंक्तियों के साथ...बहुत सुंदर रचना.....

Reetika ने कहा…

jahan se tum mod mud gaye they...woh mod ab bhi wahin khade hain...hum apne pairon mein na jaane kitne bhanwar lapete hue khade hai...

RAJ SINH ने कहा…

वो दोस्ती ही क्या जहां होती नहीं हैं गलतियाँ .

बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति !

रचना दीक्षित ने कहा…

वाह बहुत ही सुन्दर ।दोस्ती पर बहुत उम्दा रचना
दोस्ती को परिभाषित करती हुई सुन्दर सी कविता

neha ने कहा…

bahut badhiya....dosti ko bakhubi utara hai aapne

kshama ने कहा…

वो दोस्ती ही क्या जहां होती नहीं हैं गलतियां।

दोस्ती में अभिमान होता नहीं साथियां,

वो न बढ़े तुम बढ़ जाओ बांध लो प्रेम की डोरियां॥
Kitna sahaj andaaz hai kahneka! Waah!

ज्योति सिंह ने कहा…

दोस्ती में अभिमान होता नहीं साथियां,

वो न बढ़े तुम बढ़ जाओ बांध लो प्रेम की डोरियां॥
bahut khas baat hai ye ,sundar rachna dosti par .

Shekhar Suman ने कहा…

mere blog par is baar..
वो लम्हें जो शायद हमें याद न हों......
jaroor aayein...

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

sunder rachna.

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

waah keyaa baat hai

Shri"helping nature" ने कहा…

thik thak hai
antra me kani hai thodi

blossoming rose lockus ने कहा…

thanks apne meri haosla afjai ki,
ummid karta hoon aap hamesha apne sujhav bhjti rahengi

रोली पाठक ने कहा…

पूनम जी,
बिलकुल सत्य है...मित्रता में यदि ग़लतफहमी हो जाये तो उसे जल्दी-से-जल्दी दूर कर लेना चाहिए इससे पहले कि नफरत बढ़ जाये क्योंकि...
रहिमन धागा प्रेम का मत टूटे चटकाए
जोड़े से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाये...

Ojaswi Kaushal ने कहा…

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