रविवार, 29 मई 2016

जिन्दगी

जिन्दगी इक बोझ सी
लगने लगती है जब
जिन्दगी का रुख अपनी
तरफ़ नहीं होता
व्यर्थ और निरर्थक
पर तभी अचानक से
रुख पलट जाता है
खुशियों के कुछ
संकेतों से
और फ़िर
हम जिन्दगी से
प्रेम करने लगते हैं
और चल पड़ती है
जिन्दगी
खुशियों का निमन्त्रण पाकर
आगे मंजिल की तरफ़
एक अन्तहीन यात्रा पर
उल्लास से भरी।
  000
पूनम श्रीवास्तव


9 टिप्‍पणियां:

kuldeep thakur ने कहा…

जय मां हाटेशवरी...
अनेक रचनाएं पढ़ी...
पर आप की रचना पसंद आयी...
हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 31/05/2016 को
पांच लिंकों का आनंद
पर लिंक की गयी है...
इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

महेश कुशवंश ने कहा…

सच लिखा, बधाई

Rajesh kumar Rai ने कहा…

आशावाद का संचार करती खूबसूरत कविता। अति सुन्दर।

मनीष प्रताप ने कहा…

निरर्थक और सार्थक का मनोविज्ञान समझाती हुई एक वेहतरीन रचना। मुझे अच्छी लगी।

मनीष प्रताप ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
मनीष प्रताप ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Kavita Rawat ने कहा…

ख़ुशी और गम सिक्के के दो पहलु के तरह है। ..
निराशा के बाहर निकालती हैं आशा , वही जिन्दा रखती हैं हम इंसानों को। .

बहुत सुन्दर

Digamber Naswa ने कहा…

आशा ही है जो प्रेरित करती है जीने के लिए .... बहुत सुन्दर सकारात्मक रचना ...

Madhulika Patel ने कहा…

जिन्दगी के दोनों पलो से इन्सान बहुत कुछ पता है । पर सुख के पल हमे जीना शिखा देते है । बहुत सुंदर ।