शनिवार, 13 दिसंबर 2008

एक कौर


माँ प्यार से बच्चे को
फुसला रही है
बस एक कौर और ये कह कर
खिला रही है.

पास ही हम उम्र बच्चा
झाडू लगाता जाता
मां बेटे के खेल को
अचम्भे से निहारता.

क्योंकि उसे तो याद नहीं आता
कभी उसकी मां ने भी उसे
खिलाया हो ऐसे खाना.

उसे तो याद रहता है हरदम
मां ने एक रोटी को
छः टुकडों में बांटा
और मांगने पर देती है एक चांटा.

और कहती है बस
पेट को ज्यादा न बढ़ा
लगी है पेट में इतनी ही आग
तो जा एक घर और काम पकड़.
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पूनम

2 टिप्‍पणियां:

bahadur patel ने कहा…

bahut sundar hai.

SAJAN.AAWARA ने कहा…

DES KE BAHUT SE JAGHO PAR SHAYAD HUMKO YAHI DEKHNE KO MILTA HAI. JAB DES KI JANTA HI BHUKI HOGI TO VIKAS KA KYA FAYDA. . . . JAI HIND JAI BHARAT