शनिवार, 13 दिसंबर 2008

वह गुडिया


छोटी सी उम्र में कमाने लग जाती है,
वो नन्हीं सी गुडिया सयानी बन जाती है।

नन्हीं सी जुबान है पर बातें हैं बड़ी बड़ी,
वो नन्हीं सी गुडिया बतियाने लग जाती है।

औरों की उतरन पहन कर भी खुश,
वो नन्हीं सी गुडिया इतराने लग जाती है।

तरेरती हुई आँखों से थोड़ा सा सहम जाती,
वो नन्हीं सी गुडिया फ़िर काम पर लग जाती है।

हाथों में लाडलों के बैग व किताब देख के,
वो नन्हीं सी गुडिया पढाना सीख जाती है।

काम को करते हुए बातें की इधर उधर,
वो नन्हीं सी गुडिया सबकी मुखबिर बन जाती है।

लोगों के देख के रंग ढंग और संग,
वो नन्हीं सी गुडिया सपने सजाने लग जाती है।

खेलने की उम्र में ही सीखने की उम्र में ही ,
वो नन्हीं सी गुडिया दादी अम्मा बन जाती है।
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पूनम


6 टिप्‍पणियां:

Meenu khare ने कहा…

very nice expressions...

रश्मि प्रभा ने कहा…

ek nanhi gudiyaa ki kshamta ko achhe dhang se bataya hai,bahut badhiyaa

BrijmohanShrivastava ने कहा…

छोटी सी उम्र में कमाने तो लड़के भी लग जाते है देखिये किसी ढाबे ,चाय की होटल और दुपहिया वाहन मेकेनिक की दुकान पर /घरेलू नौकर व उनके बच्चे भी उतरे हुए कपड़े पहनते हैं /बच्चों के ऊपर बहुत बढ़िया रचना लिखी है आज कल बच्चों की कविताओं का लगभग आभाव होता जा रहा है /इस ओर आपका प्रयास सराहनीय है

अक्षय-मन ने कहा…

pichli post bhi bahut kuch darshati thi aur ye wali bhi bahut kuch khti hai,,,
aap bahut hi accha likhti hain.......

अक्षय-मन

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

हाथों में लाडलों के बैग व किताब देख के,
वो नन्हीं सी गुडिया पढाना सीख जाती है।

दिल को छू लेनी वाली पंक्तियाँ है जो किसी लड़की के जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से रूबरू करवाती हैं.

अच्छी रचना के लिये बधाईयाँ.

मुकेश कुमार तिवारी

bahadur patel ने कहा…

bahut sundar blog hai likha bhi achchha hai.tippni se word verification hatane ka kasht karen.