गुरुवार, 25 मार्च 2010

दर्दे --जिन्दगी


दवा ही बन ग़यी है जिन्दगी जिनकी,

दुआ कीजिये वो जहर न बने।

लहू जो दौड़ रहा जिस्म में,

दुआ कीजिये बेअसर न बने।

पिये जा रहे हैं गमों के चिलम,

दुआ कीजिये वो कहर न बन॥

नहीं देख सकता जो औरों का चैन,

दुआ कीजिये वो नज़र न बने।

समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,

दुआ कीजिये वो जिगर न बने।

आबाद है जहां नेक इन्सानों से ही,

दुआ कीजिये वो वीराना शहर न बने।

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पूनम

35 टिप्‍पणियां:

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

wah punam ji maja aa gaya apki post padh kar...acchhi rachna. aur rhythem b acchha ban pada he.

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…

Ati sundar bhav jee

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना जी
धन्यवाद

रानीविशाल ने कहा…

bahut sundar nazm likhi hai aapane sundar bhav...badhai!

Udan Tashtari ने कहा…

आनन्द आया..बेहतरीन!!

-

हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

अनेक शुभकामनाएँ.

Suman ने कहा…

nice

देवेश प्रताप ने कहा…

बहुत खूब ......लाजवाब प्रस्तुति

kunwarji's ने कहा…

उम्मीदें तो एक-एक कर के

सारी ढही,

चलो दुआ एक और सही,

जिसे हम बताना चाहते है

वो इतना बेखबर तो नहीं,

चलो दुआ एक और सही,

कुंवर जी,

sangeeta swarup ने कहा…

समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
दुआ कीजिये वो जिगर न बने।

बहुत खूब....बिलकुल दुआ है की गम ज़माने के सब समेट लें...

खूबसूरत भावों से सजी अच्छी ग़ज़ल

Apanatva ने कहा…

आबाद है जहां नेक इन्सानों से ही,
दुआ कीजिये वो वीराना शहर न बने।

ye panktiya bahut pasand aaee .........

aasheesh aur duaa douno sath hai par .........

galat dava hee jahar ban saktee hai poonam jee..........aur adhikta bhee...........:)

Apanatva ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
हरकीरत ' हीर' ने कहा…

दुआ है पूनम जी .....!!

आप यूँ ही नेक ख्यालात से जुडी रहें ......!!

रचना दीक्षित ने कहा…

समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
आबाद है जहां नेक इन्सानों से ही,
दुआ कीजिये वो वीराना शहर न बने।

वाह पूनम जी बहुत नेक ख्याल हैं.हम भी यही दुआ करेंगे. एक बेहतरीन प्रस्तुती पर बधाई स्वीकारें

dev ने कहा…

Shabdo ki kami hai. Dard jinki jindgi ho, wo hamesh khush rahtey hain. Kyonki Bhagwaan ne dard bardasht karney ki taakat sbko nahi di. Shubh Kaamnyeyn.

rashmi ravija ने कहा…

नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
दुआ कीजिये वो नज़र न बने।
क्या बात है पूनम जी, कमाल का लिखा है...बहुत ही बढ़िया

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण ।

Amitraghat ने कहा…

बढ़िया लिखा आपने........."
amitraghat.blogspot.com

रश्मि प्रभा... ने कहा…

dua hai jaisa aapne chaha hai waisa hi ho

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

जरूर, जरूर। यह तो बहुत सात्विक दुआयें हैं। कौन न करना चाहेगा।

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

गमों की चिलम मत पीजिए। चिलम पीना सेहत के लिए हानिकारक है। हाँ चिलम भर सकती हैं किसी की भी। बढिया लिखा है आपने।

राकेश कौशिक ने कहा…

"नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
दुआ कीजिये वो नज़र न बने।"
सच्ची और सीधी बात - सुखी रहने का सार.

Rakesh ने कहा…

समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,

दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
wah poonam ji ...bahut badiya ....acha laga aapko padhna ..bahut khoob

anjana ने कहा…

बहुत बढिया....

CS Devendra K Sharma ने कहा…

koi dua kare to aap jaisi..
may the almighty fulfill ur "dua"!

Babli ने कहा…

नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
दुआ कीजिये वो नज़र न बने।
समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
बहतु सुन्दर और सठिक पंक्तियाँ! ज़िन्दगी की सच्चाई को आपने बखूबी प्रस्तुत किया है ! उम्दा रचना!

Neha ने कहा…

bahut hi umda rachna....aabhar

BrijmohanShrivastava ने कहा…

दबा दबा ही रहे वो ज़हर न बने ,और जो दूसरों को चैन से बसर करते न देख सके वह नजर ही न बने बहुत उत्तम चिंतन |जहां नेक इंसान रहते हों वहां वीरानी न आये |अभी ऐसा लगता है जैसे यह रचना व्यक्तिगत हो |इस रचना को सार्वजनिक बनाने के लिए दो लाइनों में मामूली सा संशोधन करना होगा एक तो पहली लाइन में जिन्दगी मेरी की जगह जिन्दगी जिनकी और पांचवी लाइन में पिए जा रही हूँ की जगह पिए जारहे हैं जो | बहुजन हिताय बहु जन सुखाय रचना |बधाई |

BrijmohanShrivastava ने कहा…

मेरे लिखने का उद्देश्य य़ह नही था कि सुधार किया जाये बल्कि निवेदन यह था कि यह रचना , एक बचन मे है कुछ शब्द बदल देने पर बहुबचन मे भी हो सकती है ।अभी आपकी स्वम की ओर से है, बाद मे सबकी ओर से हो सकती है ।

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

keya khoob kaha aap ne danyavaad

KAVITA RAWAT ने कहा…

नहीं देख सकता जो औरों का चैन,
दुआ कीजिये वो नज़र न बने।
समझता नहीं जो दर्द जिन्दगी का,
दुआ कीजिये वो जिगर न बने।
Par upkar ke bhav jagati aapne rachna bahut achhi lagi.
Bahut badhai

ज्योति सिंह ने कहा…

sachmuch jaroorat hai is tarah ki duao ki ,khoobsurat bahut

सुशीला पुरी ने कहा…

जी मुझे भी आपसे मिलने का मन था ....अब अगली बार ऐसा न हो ....वैसे भी कभी हजरतगंज मे या दूरदर्शन मे यदि आप आती हों तो भेंट हो सकती है .या फिर किसी गोष्ठी मे ....

Apanatva ने कहा…

mera blog aapke hastakshar kee kamee mahsoos karata hai.