शनिवार, 20 मार्च 2010

गौरैया दिवस के अवसर पर-------

उड़ते फ़िरते पक्षी सारे

ज्यों घूमा करते बंजारे

घूम घूम कर डाली डाली

ढूंढ़ रहे अपने घर सारे।

प्रेम की भाषा इनमें इतनी

काश कि इन्सानों में दिखती

इनमें आपस में विश्वास बड़ा

तभी तो रहते घर को संवारे।

देख रहे सूनी आंखों से

अपने संवरे घर को उजड़ते

सोच रहे मन ही मन में

रहें कहां अब हम बेचारे।

बिन इनके तो जंगल सूना

बगिया सूनी सूनी दिखती

चहका करती थी जो घर में

उनकी आवाज को तरसते सारे।

रोज बाग में आती थी गौरैया

इक इक दाना चुगती थी

दाने अपने मुख में भरकर

बच्चों का पेट वो भरती सारे।

अब गौरैया बैठी दीवारों पर

ले बच्चों को बिलख रही

जाऊं तो जाऊं कहां

छोड़ के बच्चे प्यारे प्यारे।

कोयल की कूक भी अब देखो

सुनने को कम ही मिलती है

ठौर ठिकाने ढूंढने में

भूल गयी वो भी सुर सारे।

तिनका तिनका ढूंढ के ये

मेहनत से अपना घर बार बनाते

पर बेदर्द मतलबी इन्सानों ने

इनके घर संसार उजाड़े।

पशु पक्षी से भी प्यार करो

इनसे प्यार के बदले मिलता प्यार

आओ इनका घर फ़िर से संवारें

गौरैया दिवस के अवसर पर आज।

000000

पूनम

34 टिप्‍पणियां:

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

ओह, धन्यवाद याद दिलाने को। चलूं, बाहर देखूं, कि दिखती है गौरैया या नहीं।
सवेरे कबूतर तो आये थे। गौरैया कम ही आती है। :(

देवेश प्रताप ने कहा…

बहुत खूब ....गौरया के व्यथा व्यक्त करती ये सुन्दर सी रचना

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

बढ़िया लिखा है आपनें,बधाई.

M VERMA ने कहा…

प्रेम की भाषा इनमें इतनी
काश कि इन्सानों में दिखती
काश ---------------------

Arvind Mishra ने कहा…

बहुत सुन्दर ,बधाई और आभार भी !

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर आप की कविता
काश हम भी सीख सकते इन पक्षियो से प्रेम करना मिल जुल कर रहना.
धन्यवाद

एक कविता अर्थहीन ,श्याम – शवेत तथा मौन । ने कहा…

बढ़िया लिखा है आपनें,बधाई.

विजय प्रकाश सिंह ने कहा…

इतना अच्छा लिखा आपने, बचपन मे हमारे आंगन मे गौरैया फुदकती रहती थी, अब तो गायब हो गयी है या यों कहें कि इन्सानी सनक के हवाले चढ़ गयी है । शुक्रिया ।

Apanatva ने कहा…

bhavvibhor kar gaee ye rachana.............

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खूब ....गौरया के व्यथा व्यक्त करती ये सुन्दर सी रचना

Babli ने कहा…

वाह अद्भुत सुन्दर रचना! शानदार! बधाई!

sangeeta swarup ने कहा…

पक्षियों की व्यथा को समेटे बहुत अच्छी रचना....

बधाई

Shikha Deepak ने कहा…

पूनम जी, जब लखनऊ में थी तो मेरे घर में हर साल गौरैया या कबूतर एक दो घोंसले तो बनाते ही थे। पर जब से चेन्नई में आई हूँ मैंने गौरैया देखी ही नहीं। सुंदर रचना......बधाई।

विजयप्रकाश ने कहा…

अगर बोलना आता होता तो शायद गौरैया भी यही कहती उनकी भावनाओं को आपने बढ़ी खूबी से अपने शब्द दिये है.

Amitraghat ने कहा…

बेहद संवेदनशील रचना........."
amitraghat.blogspot.com

Hitesh ने कहा…

रानीखेत के मेरे घर में गोरैया से रोज़ मुलाकात होती थी. पर दिल्ली में आकर वो सब छूट गया. आपकी रचना मुझे मेरे घर की तरफ ले गयी ! बहुत सुन्दर लिखा है आपने !

रचना दीक्षित ने कहा…

पूनम जी, बहुत अच्छी अभिव्यक्ति. सच गौरैया तो जैसे भूली बिसरी बात हो गयी है.गुजरात में थी मैं तो दिखती थी पर दिल्ली में तो शायद नहीं देखी. हाँ मेरे घर कौवों की आज भी रोज़ दावत होती है यहीं दिल्ली में

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

mere blog par aane aur tipaani dene ke liye danyavaad goraya divas par likhane ke liye aabhar

neelima garg ने कहा…

very nice....the day was celebrated in d doon...

SR Bharti ने कहा…

वाह पूनम जी ,
बहुत सुंदर रचना
बिलुप्त हो रहे पछियों को बचाने का पह्लात्मक सुझाव ,
"बगिया सूनी सूनी दिखती
चहका करती थी जो घर में"

surya goyal ने कहा…

पूनम जी, तसल्ली से आपके ब्लॉग का चक्कर काट कर आ रहा हूँ. पूरा ब्लॉग पढने और देखने के बाद लगा की हां अभी कुछ लोग बचे है जो प्रत्येक चीज पर नजर रखे हुए है. हमारा क्या है पत्रकार है जो देखा और सुना उसे लिख दिया. लेकिन अपने दिल के भावो को जिस तरह सुन्दर शब्दों में पिरो कर आप कविता लिखती है उसके लिए आप बधाई की पात्र है. मैंने भी कुछ ऐसे विषयों पर गुफ्तगू करने के लिए ब्लॉग बनाया है. कभी समय मिले तो गुफ्तगू करने आइयेगा.
www.gooftgu.co.nr

राकेश कौशिक ने कहा…

"प्रेम की भाषा इनमें इतनी
काश कि इन्सानों में दिखती"
"गौरिया दिवस" भी होता है जानकार सुखद लगा.

rashmi ravija ने कहा…

प्रेम की भाषा इनमें इतनी

काश कि इन्सानों में दिखती

इनमें आपस में विश्वास बड़ा

तभी तो रहते घर को संवारे।

बहुत ही बढ़िया कविता...काश हम इंसान भी इन मासूम पक्षियों से कुछ सीख सकें.

shama ने कहा…

Waqayi...bachpanme gharme ghus goraiya ghonsle banati rahti thin...aaj to kahin nazar hi nahi aati..afsos!

मनोज कुमार ने कहा…

गौरया के व्यथा व्यक्त करती ये सुन्दर सी रचना

vikas ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
vikas ने कहा…

खूबसूरत रचना ,,,गौरया के विषय पर अच्छा प्रयास..

विकास पाण्डेय

www.vicharokadarpan.blogspot.com

रश्मि प्रभा... ने कहा…

gauraiya aai hai khidki per. aapki rachna use suna dua ki hai......

CS Devendra K Sharma ने कहा…

achhi rachna aur utna hi umda vishay.......badhai!!

dipayan ने कहा…

ज़माना हो गया, गौरैया को देखे । पहले तो घर के आँगन पर दिख जाती थी । आपने बहुत सुन्दर रचना लिखी है । बधाई ।

dipayan ने कहा…

ज़माना हो गया, गौरैया को देखे । पहले तो घर के आँगन पर दिख जाती थी । आपने बहुत सुन्दर रचना लिखी है । बधाई ।

kshama ने कहा…

Ramnavmiki anek shubh kamnayen!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह .. कमाल का संदेश है आपकी इस रचना में ... पंछी की दुखभरी कहानी कहती अच्छी रचना ...

ज्योति सिंह ने कहा…

gauraiya divas bhi hota hai ye to hame pata hi nahi raha ,sundar rachna ke saath jaankaari dene ke liye bhi shukriyaan .