शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

उड़ान


अनजाना सपनों में कोई
अच्छा लगता है
अपनों में वो बेगाना भी
अच्छा लगता है।

अनदेखा है फ़िर भी वो
जाना पहचाना लगता है
अनजानी सी डगर पे चलना
फ़िर अच्छा लगता है।

लुका छिपी का खेल निराला
वो तितली की पकड़ा पकडी
गुड्डे गुडियों का ब्याह रचाना
अब बचकाना लगता है।

सखियों के संग समय बिताना
अच्छा लगता है
पर अकेले में मुस्काना भी
अब अच्छा लगता है।

दिल को तन्हाई का आलम
अच्छा लगता है
तस्वीरों से भी बतियाना
अच्छा लगता है।

दिल की बात बताऊँ जिससे
साथी ऐसा नहीं मिला
मिल जाता जो साथी मन का
अच्छा लगता है।
*********
पूनम

17 टिप्‍पणियां:

प्रवीण त्रिवेदी ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति !!
कभी कभी यह अनजाने एहसास काफी रोमांचक अनुभव होते हैं!!

Shikha Deepak ने कहा…

सबकी जिंदगी में आते हैं, ये अनदेखे अनजाने एहसास सच में कभी कभी अच्छे लगते हैं।

अविनाश ने कहा…

सुन्दर रचना, एक बेहतरीन सुंदर और सफल प्रयास
शुक्रिया

रश्मि प्रभा... ने कहा…

प्यार के सुकोमल भावनाओं का प्रस्तुतीकरण बहुत ही बढिया किया है......

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मन का मीत
सभी को भाता,
क्योंकि स्नेह वह लेकर आता!

कोई चाहे
बसे ना बसे,
वह तो है मन में बस जाता!

कविता भंवर राठी ने कहा…

poonamji...
bhavnao ki bahot sundar abhivyakti

बेनामी ने कहा…

बहुत खूब पूनम जी, उड़ान शानदार रही। आपके यहाँ आकर अच्छा लगा वैसे भी अपनी नाम राशि के लोगों से लगाव तो होता ही है। :)

पूर्णिमा वर्मन

द्विजेन्द्र ‘द्विज’ ने कहा…

अच्छी रचना के लिए बधाई

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

अनजाना सपनों में कोई
अच्छा लगता है
अपनों में वो बेगाना भी
अच्छा लगता है।

अनदेखा है फ़िर भी वो
जाना पहचाना लगता है
अनजानी सी डगर पे चलना
फ़िर अच्छा लगता है.....सुन्दर प्रयास....!!

श्यामल सुमन ने कहा…

ऐसी रचनाओं को पढ़ना अच्छा लगता है।

बधाई पूनम जी। आग्रह है कि मीटर की एक बार अपने से जाँच कर लें।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 24-- 11 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज ..बिहारी समझ बैठा है क्या ?

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सुन्दर गीत... वाह!!
सादर बधाई...

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

बेहतरीन।


सादर

vandan gupta ने कहा…

कोमल भावो का सुन्दर समन्वय्।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

मुक्त गगन के आकर्षण में डूबा हो जब मन,
उड़ने को खुल जायँ पंख तब अच्छा लगता है !

Rakesh Kumar ने कहा…

आपकी इस पोस्ट पर आना अच्छा लगता है.
पढकर मन ही मन मुस्कुराना अच्छा लगता है.

आपकी उड़ान का अहसास करना अच्छा लगता है
दिल की बातें आपको बतलाना अच्छा लगता है.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार,पूनम जी.

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

komal bhavo se saji pyarbhari
ati uttam rachana hai...